तड़पकर रह जाएगा चीन, ड्रैगन के ‘दोस्त’ ने भारत में ₹4 लाख करोड़ रुपये के निवेश का कर दिया ऐलान

नई दिल्ली: चीन अपनी गिरती इकॉनमी को संभालने में जुटा हुआ है। कोविड के बाद से चीन की हालात खराब है। रियल एस्टेट से मिले झटके ने चीन की इकॉनमी की नींव को हिला कर रखा दिया है। चीन की कंपनियां दिवालिया हो रही है तो वहीं विदेशी कंपनियां साथ छोड़ रही है। इकॉनमी में जान फूंकने के लिए चीन विदेशी निवेश की ताक में है, लेकिन उसे बड़ा झटका लगा है। भारत ने चीन को एक बार फिर से बड़ा झटका दिया है। दरअसल यूएई ने भारत में बड़े निवेश की बात कही है। संयुक्‍त अरब अमीरात सरकार भारत में 50 अरब डॉलर का निवेश करने की बात कही है। माना जा रहा है कि यूएई अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भारत में 50 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान कर सकता है। इस निवेश की आहट ने चीन की खलबली को बढ़ा दिया है। चीन तिलमिलाया हुआ है।

​भारत से बढ़ रही नजदीकी​

यूएई और भारत की नजदीकी बढ़ रही है। साल 2014 में पीएम मोदी सत्‍ता संभालने के बाद यूएई के राष्‍ट्रपति शेख मोहम्‍मद बिन जायद के बुलावे पर अब तक 5 बार अबूधाबी की यात्रा पर जा चुके हैं। मुस्लिम देश से भारत की बढ़ रही दोस्ती चीन के पेट में मरोड़ पैदा कर रहा है। वहीं यूएई के 50 बिलियन डॉलर के निवेश की बात ने चीन का ब्लड प्रेशर भी बढ़ा दिया है। यूईए ने देती से बढ़ रही भारत की इकॉनमी पर भरोसा करते हुए इस बड़े निवेश की बात कही है। 50 बिलियन डॉलर यानी 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश चीन के दर्द को बढ़ा रहा है। चीन जो अपन इकॉनमी को मजबूत करने के लिए विदेशी निवेश को तरस रहा है , भारत को मिल रहे इस निवेश से परेशान हो सकता है।

​भारत को मिलेगी मजबूती

यह निवेश इस बात के संकेत दे रहे हैं कि दुनियाभर के देश भारत की तेज रफ्तार से भाग रही इकॉनमी को देख उसका साथ दे रहे हैं। भारत और यूएई के बीच रिश्ते और मजबूत हो रहे हैं। यूएई से आने वाले इस निवेश से भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और इंफ्रा को काफी मजबूती मिलेगी। भारत की इकॉनमी और मजबूत होगी। आपको बता दें कि मौजूदा समय में यूएई और भारत के बीच नॉन ऑयल बाइलेटरल ट्रेड 100 अरब डॉलर का हो चुका है। दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्ते और मजबूत हो रहे हैं। आपको बता दें कि यूएई में भारतीयों की संख्या अच्छी-खासी है। यूएई की कुल आबादी में से भारत के लोगों की संख्या करीब 30 फीसदी है। दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्ते का नतीजा है कि यूएई भारत में अपना निवेश और बढ़ा रहा है।

​चीन को क्यों लगी मिर्ची​

मुस्लिम देशों से भारत की बढ़ती नजदीकी, मजबूत हो रहे रिश्ते और भारत में बढ़ रहे निवेश को चीन बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। भारत को लगातार मिल रहे विदेशी निवेश ने देश की इकॉनमी को बल मिल रहा है। बीते कुछ समय से भारत की तेज रफ्तार इकॉनमी ग्रोथ इसी का नतीजा है। जहां कोविड के बाद अधिकांश देशों की हालात बिगड़ गई, भारत ने न केवल कोविड पर नियंत्रण पाया बल्कि अपनी इकॉनमी को भी बचाने में सफलता हासिल की। जिस रफ्तार से भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि भारत जल्दी ही एशिया में इकोनॉमिक मोर्चे पर चीन को पीछे छोड़ते हुए एशिया का बॉस बन जाएगा। चीन की डूबती इकॉनमी मुश्किल दौर से गुजर रही है। विदेशी कंपनियां चीन से मुंह मोड़ रही है। चीन से निकलकर विदेशी कंपनियां भारत को अपना नया ठिकाना बना रही है । जिसमें एपल, टेस्ला , माइक्रॉन, फॉक्सकॉन और ताइवान की और भी कई कंपनियां है, जो चीन से निकलकर भारत आ रही है। ऐसे में भारत की तरक्की को देखकर चीन को मिर्ची लगना लाजिमी है।

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