साल के आखिरी सूर्य ग्रहण और सोमवती अमावस्या पर बन रहा है विशेष संयोग

इस बार साल के आखिरी सूर्य ग्रहण पर अगहन मास की सोमवती अमावस्या और पांच ग्रहों का विशेष संयोग बन रहा है। इस संयोग के कारण स्नान और दान का कई गुणा फल मिलेगा

वाहन चोर पकड़ने गए पुलिस बल पर हमला:ग्रामीणों ने पुलिस पर किया पथराव, दरोगा घायल, क्षतिग्रस्त किया वाहन

मुरैना(दिमनी)। वाहन चोर को पकड़ने गए पुलिस बल पर ग्रामीणों ने हमला बोल दिया। घटना मंगलवार रात साढ़े सात बजे की है। हमलावरों ने पुलिस बल पर अचानक पथराव कर दिया। अचानक हुए इस हमले से पुलिस बल घबरा गया। हमले में एक एएसआई के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। इसके अलावा अन्य पुलिस वालों को भी हल्की चोटें आई हैं। दिमनी थाने का पुलिस बल माता का पुरा गांव में एक वाहन चोर को पकड़ने गया था। पुलिस बल के साथ फरियादी भी गया था, जिसकी मोटरसाइकिल चोरी हुई थी। वाहन चोर गांव से भाग गया था। वापस पुलिस बल लौट रहा था तथा गांव के बाहर आया। ग्रामीणों ने सड़क के बीचो पीच पत्थर की पटिया डाल दी। पटिया देखकर पुलिस को गाड़ी रोकना पड़ी। उसी समय हाथ में लाठी-डंडा लेकर ग्रामीण पुलिस बल पर टूट पड़े। उन्होंने पुलिस की गाड़ी के कांच तोड़ डाले। हमले में एएसआई नाथूराम शर्मा के सिर में गंभीर चोट आई है। उसके अलावा अन्य पुलिस वालों के भी चोटें आईं।हमले के बाद पुलिस बल घायल एएसआई नाथूराम शर्मा को दिमनी के सामुदायिक स्वास्थय केन्द्र ले गई। वहां उनकी मलहम पट्‌टी की गई। उसके बाद मुरैना जिला चिकित्सालय में रैफर कर दिया गया।इस संबंध में एडिशनल एसपी रायसिंह नरवरिया से बात की गई। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को शक हो गया था कि पुलिस बल में मौजूद अधिकारी शराब पिए हुए हैं। उन्होंने रास्ते में पटेला डालकर जीप रुकवा दी। उसके बाद मारपीट कर दी। कल पुलिस पार्टी पहुंचाकर दबिश दी जाएगी।

डिलिवरी से पहले जांच में महिला निकली पाजिटिव, पूरे गांव में निकले 34 संक्रमित

ग्वालियर.: भितरवार विधान सभा में कोविड -19 का संक्रमण पैर पसार चुका है। ईटमा के बाद अब रिछैला एक बड़ा हाट स्पाट के रूप में उभरा है। इस गांव में एक महिला की डिलेवरी होनी थी। डिलेवरी से पहले डाक्टर ने महिला की कोविड रिपोर्ट कराने के लिए कहा। महिला पाजिटिव निकली। इसके बाद महिला का पति भी पाजिटिव आ गया। दो लोगों के संक्रमित होने पर चीनौर में जांच कराने पहुंचे। एंटीरैपिड टेस्ट में 9 लोग संक्रमित मिले। 9 लोगों के संक्रमण के बाद प्रशासन जागा और पूरी टीम के साथ रिछैरा गांव पहुंचे। रैपिड एंजीटन टेस्ट कराने के लिए गांव हर अादमी तैयार हो गया। अधिकतर लोगों ने अपनी जांच कराई। गांव में 34 पाजिटिव निकले। इन्हें दवाई देकर आइसोलेट कर दिया। रिछैरा में संक्रमितों की स्थिति देखकर आस पास के लोगों में दहशत पैदा गई। खांसी जुकाम होने पर ये लोग भी जांच कराने पहुंचे।

खांसी जुकाम था, कोविड नहीं सोची

– रिछैरा निवासी कल्याण सिंह उनका कहना है कि खांसी-जुकाम पहले लोगों को था। गांव से ही दवाई लेकर ठीक हो रहे थे, लेकिन एसा नहीं सोचा था कि कोविड संक्रमित हो जाएंगे।

– गांव में फिलहाल किसी हालत गंभीर नहीं है। दवाइयों से उनकी सेहत में सुधार हो रहा है। जिन लोगों के टेस्ट पाजिटव नहीं आए हैं, उनमें से अधिकतर ने दवाइयां खाना शुरू कर दी हैं।

जेयूः कोविद स्पेशल ओपीडी में होम्योपैथिक व आयुर्वेदिक चिकित्सक करेंगे इलाज

ग्वालियर
बुधवार को हुए टीकाकरण में दो सौ लोगों ने वैक्सीन लगवाई
कोरोना महामारी के संक्रमण से शहरवासियों को बचाने के लिए आगे आए जीवाजी विश्वविद्यालय में इन दिनों वैक्सीनेशन चल रहा है। लोगों को आसानी से टीका लग सके और उनको किसी तरह की कोई पेरशानी न हो, इसके लिए अब जेयू के हेल्थ सेंटर को अब मैनेजमेंट बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया है। बुधवार को यह टीकाकरण हेल्थ सेंटर की नई बिल्डिंग में ही लगा। इसके तहत 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 100 लोगों को, जबकि 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के भी 100 लोगों को वैक्सीन लगाई गई। हेल्थ सेंटर के कोऑर्डिनेटर प्रो. जीबीकेएस प्रसाद ने बताया कि कोरोना से बचाव के लिए जेयू के हेल्थ सेंटर में कोविद स्पेशल ओपीडी शुरू होने जा रही है, जिसमें होम्योपैथिक व आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा मरीजों का ईलाज किया जाएगा, दवाएं वितरित की जाएंगी और उन्हें परामर्श भी दिया जाएगा। कुलाधिसचिव प्रो. उमेश होलानी ने बताया कि टीका लगवाने के लिए आने वाले लोगों और कोविद स्पेशल ओपीडी में चिकित्सा के लिए आने वाले लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए भी पूरी व्यवस्थाएं की गई हैं। कुलपति प्रो. संगीता ने हेल्थ सेंटर बिल्डिंग का मुआयना किया और कोरोना से बचाव के लिए शहर के लोगों से वैक्सीन लगवाने के लिए अपील भी की। इसके अलावा टीका लगवाने के लिए आए हुए लोगों ने भी अपने विचार रखे।


इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. आनंद मिश्रा, डीसीडीसी डॉ. केशव सिंह गुर्जर, डीएसडब्ल्यू प्रो. एसके द्विवेदी, प्रॉक्टर डॉ. हरेंद्र शर्मा सहित डॉ. शांतिदेव सिसोदिया, ईसी मेंबर डॉ. शिवेंद्र सिंह राठौड़, जेयू कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह भदौरिया और समाजसेवी देवेंद्र सिंह तोमर मौजूद रहे।

झटका: भोपाल और इंदौर समेत इन शहरों में 100 रुपये के पार हुआ एक लीटर पेट्रोल, जानिए कीमत

देश में कोरोना महामारी की बेकाबू दूसरी लहर के बीच पेट्रोल-डीजल के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों पर अब कोई नियंत्रण नहीं हैं। देश के कई शहरों में एक लीटर पेट्रोल के लिए ग्राहकों को 100 रुपये से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। सरकारी तेल कंपनियों की ओर से आज पेट्रोल की कीमत 22 से 25 पैसे तक बढ़ी है। वहीं डीजल की कीमत भी 24 से 27 पैसे तक बढ़ी है। बात अगर मध्यप्रदेश की करें, तो राजधानी भोपाल में, इंदौर में, अनूपपुर में और रीवा में पेट्रोल ने शतक पूरा कर लिया है। इसके अलावा राजस्थान के श्रीगंगानगर में भी तेल 100 रुपये के पार है। आइए जानते हैं इन शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमत क्या है।

शहर पेट्रोल (प्रति लीटर में)डीजल (प्रति लीटर में)भोपाल100.08 रुपये90.05 रुपयेइंदौर 100.16 रुपये91.04 रुपयेरीवा 102.30 रुपये92.73 रुपयेअनूपपुर 102.66 रुपये93.33 रुपयेश्रीगंगानगर 102.96 रुपये95.33 रुपये

देश के प्रमुख महानगरों की बात करें, तो आइए जानते हैं यहां आज पेट्रोल और डीजल की क्या कीमत है।
 शहरपेट्रोल (प्रति लीटर में)डीजल (प्रति लीटर में)दिल्ली92.05 रुपये82.61 रुपयेमुंबई98.36 रुपये89.75 रुपयेकोलकाता92.16 रुपये85.45 रुपयेचेन्नई93.84 रुपये87.49 रुपये

इन मानकों के आधार पर तय होती है कीमत
बता दें कि प्रतिदिन सुबह छह बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। सुबह छह बजे से ही नई दरें लागू हो जाती हैं। पेट्रोल व डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है। इन्हीं मानकों के आधार पर पेट्रोल रेट और डीजल रेट रोज तय करने का काम तेल कंपनियां करती हैं। डीलर पेट्रोल पंप चलाने वाले लोग हैं। वे खुद को खुदरा कीमतों पर उपभोक्ताओं के अंत में करों और अपने स्वयं के मार्जिन जोड़ने के बाद पेट्रोल बेचते हैं। पेट्रोल रेट और डीजल रेट में यह कॉस्ट भी जुड़ती है।

जानिए आपके शहर में कितना है दाम
पेट्रोल-डीजल की कीमत आप एसएमएस के जरिए भी जान सकते हैं। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, आपको RSP और अपने शहर का कोड लिखकर 9224992249 नंबर पर भेजना होगा। हर शहर का कोड अलग-अलग है, जो आपको आईओसीएल की वेबसाइट से मिल जाएगा।

शुभेंदु अधिकारी के जरिये, बीजेपी खोलेगी ममता के ‘राज’?

नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कल तक राजदार रहे शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता बनाकर बीजेपी ने सियासी शतरंज की वो चाल खेली है, जो आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन सकती है. अधिकारी की तरह ही टीएमसी छोड़कर बीजेपी में आये मुकुल रॉय के मुकाबले अधिकारी को नेता सिर्फ इसलिये ही नहीं बनाया गया कि उन्होंने नंदीग्राम में ममता को पटखनी दी है. बीजेपी के सूत्रों की मानें, तो इसके और भी कई कारण हैं जो बंगाल की भविष्य की राजनीति की दशा-दिशा तय करने के साथ ही कुछेक उलटफेर को भी अंजाम दे सकते हैं.

यह सही है कि मुकुल के मुकाबले अधिकारी के पास संसदीय अनुभव ज्यादा है. लेकिन इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि ममता के साथ ही उनके नजदीकियों की जो कमियां हैं, उसका राज शुभेंदु से बेहतर शायद ही कोई और जानता हो. दरअसल, बीजेपी की रणनीति है कि पिछली ममता सरकार के कथित भ्रष्टाचार की जो लड़ाई अब तक सड़कों पर लड़ी जा रही थी, उसे अब दमदार तरीके से विधानसभा के भीतर कुछ ऐसे लड़ा जाएगा कि हर रोज सरकार को शर्मिन्दगी उठानी पड़े. यह ठीक है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास इतना अधिक बहुमत है कि उनकी सरकार को 77 विधायकों वाले विपक्ष से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. लेकिन जब मुख्यमंत्री के नजदीकी रिश्तेदारों के कथित कारनामों से जुड़े दस्तावेज अगर विपक्ष का नेता सदन में लहराने लगे, तब सरकार की हालत इतनी पतली हो ही जाती है कि उसे अपने बचाव में तमाम तरह के तर्क गढ़ने पड़ते हैं. केइसी बजी सरकार के लिए यह स्थिति बेचारगी वाली ही होती है और तब विपक्ष को और ज्यादा हमलावर होने का मौका मिलता है.

कुछ यही रणनीति बीजेपी ने भी तैयार कर रखी है. दावा तो यह भी किया जा रहा है कि शुभेंदु अधिकारी के पास पिछली सरकार में मंत्री रहे टीएमसी नेताओं के कथित घोटालों से जुड़े दस्तावेज भी हैं, जो सामने आने पर सरकार की नींद उड़ाने के लिए पर्याप्त हैं. बताया गया है कि उनमें से कुछ इस सरकार में भी मंत्री बन गए हैं. शुभेंदु के जरिये बीजेपी की रणनीति है कि ऐसे सभी मंत्रियों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों से जांच करवा कर ममता सरकार के लिये मुश्किलें पैदा की जाएं.

जाहिर है कि ममता अपनी सरकार के किसी भी मंत्री के खिलाफ केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग सिरे से ठुकरा देंगी. ऐसे में राज्यपाल के अलावा न्यायपालिका के विकल्प को आजमाकर सरकार की इमेज पर बट्टा लगाने की सियासत परवान चढ़ेगी. बताते हैं कि शुभेंदु बीजेपी में आने से पहले तक ममता को अपना राजनीतिक गुरू मानते रहे हैं और बदले में ममता ने भी उन्हें अपना सबसे भरोसेमंद शिष्य मान रखा था. लेकिन अब बंगाल की विधानसभा गुरु-शिष्य परंपरा का एक ऐसा नया रुप देखेगी, जहां हर रोज भरोसे की धज्जियां उड़ रही होंगी.

भीमा कोरेगांव मामला: गौतम नवलखा को राहत नहीं, SC ने जमानत याचिका खारिज की

भीमा कोरेगांव केस में गौतम नवलखा को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने कथित एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है। गौतम नवलखा ने बंबई हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ 19 फरवरी को शीर्ष अदालत में अपील दायर की थी। हाई कोर्ट ने आठ फरवरी को उनकी जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा था, ”उसे विशेष अदालत के आदेश में दखल देने का कोई कारण नजर नहीं आता। विशेष अदालत ने उनकी (नवलखा की) जमानत याचिका खारिज कर दी थी।”

न्यायमूर्ति यू यू ललित, न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश के विरुद्ध नवलखा की अपील पर सुनवाई की। पुलिस के अनुसार कुछ कार्यकर्ताओं ने 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में एल्गार परिषद की बैठक में कथित रूप से उत्तेजक और भड़काऊ भाषण दिया था जिससे अगले दिन जिले के कोरेगांव भीमा में हिंसा भड़की थी।

पुलिस ने यह आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम को कुछ माओवादी संगठनों का समर्थन प्राप्त था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी इस मामले की जांच कर रही है। नवलखा ने विशेष एनआईए अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती थी। विशेष एनआईए अदालत ने 12 जुलाई, 2020 को सांवधिक जमानत की उनकी अर्जी खारिज कर दी थी।

हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान नवलखा ने कहा था कि हाउस अरेस्ट की अवधि को  हिरासत अवधि के रूप में गिनी जानी चाहिए। हालांकि, आठ फरवरी को हाई कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उन्हें पहले ही नजरबंद रखने के आदेश को अवैध घोषित किया जा चुका है और इसलिए इस गैर-कानूनी हिरासत को गिरफ्तारी की अवधि में नहीं जोड़ा जा सकता है। 

असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने 13 मंत्रियों को सौंपे मंत्रालय, जानें किसे मिला कौनसा पोर्टफोलियो

भारतीय जनता पार्टी के नेता हेमंत बिस्वा सरमा ने 10 मई को असम के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली है. उन्हें राज्यपाल जगदीश मुखी ने पद व गोपनीयता की शपथ दिलायी थी. वहीं कोविड-19 प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए उनके साथ 14 अन्य विधायकों ने भी शपथ ली थी.

वहीं अब हेमंत बिस्वा सरमा ने अपने कैबिनेट का गठन करते हुए मंत्रियों को मंत्रालय सौंपे हैं.

जानें किस मंत्री को क्या मंत्रालय दिया गया

रंजीत कुमार दास को पंचायत और ग्रामीण विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग, खाद्य और नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मंत्रालय सौंपा गया.

अतुल बोलाको कृषि, बागवानी, पशुपालन और पशु चिकित्स, सीमा क्षेत्र विकास, असम समझौते का कार्यान्वयन, सहगोग मंत्रालय सौंपा गया.

अरखाओ ग्वारा ब्रह्मा को हथकरघा औ वस्त्र, मिट्टी संरक्षण, जनजाति कल्याण, पिछड़ा वर्ग मंत्रालय दिया गया.

चंद्र मोहन पटोवरीको परिवहन, उद्योग और वाणिज्य, कौशल विकास, अल्पसंख्यकों का कल्याण मंत्रालय सौंपा गया.

परिमल शुक्लाबैद्यको पर्यावरण और वन, मत्सय, आबाकारी विभाग दिया गया.

केशव महंत को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयल सौंपा गया.

रानुज पेगुको शिक्षा, कल्याण जनजाति और पिछड़ा वर्ग मंत्रालय सौंपा गया.

अशोक सिंघलको शहरी विकास, सिंचाई मंत्रालय सौंपा गया.

जोजन मोहनको राजस्व और आपदा प्रबंधन, हिल्स क्षेत्र विकास, खान और खनिज मंत्रालय सौंपा गया.

संजय किशन को चाय जनजातियों का कल्याण, श्रम और रोजगार मंत्रालय सौंपा गया.

अजंता नियोगको समाज कल्याण, वित्त मंत्रालय सौंपा गया.

पीयूष हजारिका को जल संसाधन, सूचना और पब्लिक रिलेशन, संसदीय कार्य मंत्रालय सौंपा गया.

बिमल बोराको खेल और युवा कल्याण, सांस्कृतिक मामले, बिजली, पर्यटन मंत्रालय सौंपा गया.

बंगालः भाजपा विधायकों की सुरक्षा के लिए किए गए जम्मू-कश्मीर जैसे इंतजाम, आतंकियों से बचाने के लिए की जाती थी ऐसी व्यवस्था

बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद हुए हिंसा के बाद से केंद्र सरकार बीजेपी विधायकों की सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर है। बंगाल में सभी 77 बीजेपी विधायकों को केंद्रीय सुरक्षा प्रदान की जाएगी। ये सुरक्षा जम्मू-कश्मीर में मिली सुरक्षा की तरह ही होगी। कश्मीर में आतंकियों से बचाने के लिए ऐसी सुरक्षा दी गयी थी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से सोमवार को जारी आदेश में कहा गया है कि 61 विधायकों को ‘एक्स’ कैटेगरी की सुरक्षा दी जाएगी इसके अलावा अन्य विधायकों को ‘वाई’ या अन्य सुरक्षा दी जाएगी। अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तैयार की गयी रिपोर्ट और हाल ही में बंगाल गई टीम के इनपुट के आधार पर यह फैसला लिया है। सूत्रों के अनुसार भाजपा विधायकों को यह सुरक्षा सिर्फ बंगाल में ही मिलेगा। जब वो बंगाल से बाहर रहेंगे तो उन्हें ये लाभ नहीं मिलेंगे।

इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक पूर्व अधिकारी ने कहा कि 1996 में जम्मू और कश्मीर में जब आतंकवाद अपने चरम पर था तब केंद्रीय सुरक्षा के तहत चुनाव हुए थे। लेकिन उस समय उम्मीदवारों को सुरक्षा चुनाव से पहले दी गयी थी। क्योंकि उस समय आतंकवादियों से उन्हें खतरा था। पंजाब में भी उग्रवाद के चरम के दौरान किसी भी पार्टी के नेताओं को ऐसी सुरक्षा नहीं दी गयी थी।

आदेश में कहा गया है कि एक्स-श्रेणी की सुरक्षा में एक बंदूकधारी चौबीसों घंटे उनकी सुरक्षा में रहेगा। रोटेशन के तहत  तीन या चार सुरक्षा कर्मियों को इसमें शामिल किया जाएगा। केंद्रीय सुरक्षा बल के एक अधिकारी ने कहा कि देश में वीआईपी सुरक्षा के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब एक राज्य में एक ही पार्टी के सभी निर्वाचित सदस्यों को इस तरह की सुरक्षा दी जा रही है। अब तक ये फैसले खतरों को देखते हुए व्यक्तिगत स्तर पर दी जाती थी।

बताते चलें कि प्रक्रिया के अनुसार, किसी व्यक्ति को केंद्रीय सुरक्षा प्रदान करने के दो तरीके हैं – या तो व्यक्ति सुरक्षा खतरे का हवाला देते हुए सरकार से सुरक्षा का अनुरोध करता है तब या सरकार स्वयं सुरक्षा का आकलन कर ऐसा करती है।

कोरोना पॉजिटिव मां मासूम को पिलाती रही दूध, वायरस छू भी न पाया, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

मां के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भी उसके तीन माह के बच्चे को वायरस छू भी नहीं पाया जबकि वह इस दौरान बेटे को पहले की तरह स्तनपान कराती रही। संक्रमण के 10 दिन बाद मां पूरी तरह से स्वस्थ्य और निगेटिव हो चुकी है और, बच्चा भी भला-चंगा है। हालांकि घरवाले बच्चे को स्तनपान न कराने की सलाह देते रहे लेकिन मां ने उनकी एक न सुनी और तीन मास्क लगाकर बच्चे को स्तनपान कराती रही। 

गोरखपुर में जेल बाईपास रोड पर सरस्वतीपुरम में रहने वाली शिक्षिका मधुलिका तिवारी एक मई को संक्रमित हो गईं थीं। संक्रमण का पता चलने पर उन्होंने बाकी घर के सदस्यों को खुद से अलग कर लिया। चिकित्सक की सलाह से उन्होंने जरूरी दवाइयां शुरू कर दीं। इस बीच घरवालों ने कहा कि वह बच्चे को उन्हें दे दें, वह बाहर का दूध पिलाती रहेंगी। बच्चा मां के पास रहेगा तो उसे भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। शिक्षिका ने घरवालों की नहीं अपने दिल की सुनी। मधुलिका ने बच्चे को अपने पास ही रखा और जब स्तनपान कराना होता था तो तीन मास्क लगा लेती थीं ताकि संक्रमण की आशंका न के बराबर रहे। हुआ भी यही मधुलिका ने 9 मई को दोबारा जांच कराई तो पता चला कि निगेटिव हो चुकी हैं और बच्चा भी पूरी तरह से स्वस्थ है।

सिर्फ रात में सोते वक्त उतारती थी मास्क

परिवार में सभी लोग सुरक्षित रहें, इसके लिए मधुलिका दिनभर मास्क लगाकर रखती थी। सिर्फ रात में सोते वक्त ही मास्क उतारती थीं। बेटे को गोद में लेने से पहले हाथ सैनिटाइज करने के बाद साबुन से भी धुलती थीं। बच्चे को स्तनपान कराने के बाद भी हाथ सैनिटाइज करती थीं। 

खुद की नहीं, बेटे की चिंता थी

मधुलिका ने बताया कि उन्हें खुद के संक्रमण की चिंता नहीं थी। उन्हें सबसे अधिक चिंता बच्चे की थी। अभी वह महज 3 माह का है। लोगों ने कई बार कहा कि उसे मैं खुद से दूर रखूं। लेकिन मैं जानती थी कि अगर उसे स्तनपान नहीं कराया तो उसकी इम्यूनिटी कमजोर हो जाएगी और वह संक्रमण की चपेट में आ सकता है।