मंत्री बनने के 18 महीने बाद आतिशी की हुई दिल्ली! केजरीवाल के मास्टर स्ट्रोक का मकसद ये रहा

आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार (17 सितंबर) को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. वहीं, दिल्ली सरकार में मंत्री रहीं आतिशी अब नई सीएम होंगी. उन्होंने राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है. पिछले साल 9 मार्च को दिल्ली सरकार की मंत्री बनने वाली AAP की आतिशी करीब 18 महीने बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं. 

जब से अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा देने का एलान किया था, तब से ही कई नामों की चर्चा हो रही थी. हालांकि, बाजी मारी केजरीवाल कैबिनेट में शिक्षा और जल समेत 14 मंत्रालयों को संभाल रही आतिशी ने. रेस में कई नाम चल रहे थे, लेकिन केजरीवाल ने उत्तराधिकारी आतिशी को बनाया है. इस स्थिति में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आतिशी को सीएम बनाकर केजरीवाल ने दिल्ली की सियासी बाजी पलट दी है? 

केजरीवाल के इस्तीफे से निकले क्या संदेश?

अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा देकर ये संदेश देने की कोशिश की है कि वो बेदाग हैं और उन्हें फंसाया गया है. AAP सुप्रीमो ने कुर्सी छोड़कर अपनी कट्टर ईमानदार वाली छवि को मजबूत करने की कोशिश की है. चुनावी माहौल में उन्होंने इस्तीफे का दांव खेलकर विपक्ष से इस्तीफा मांगने वाला एक बड़ा मुद्दा छीन लिया है.

AAP चीफ के इस्तीफे से होगा कितना फायदा? 

दिल्ली के सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद अब अरविंद केजरीवाल हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड के चुनाव पर फोकस कर पाएंगे. इसके साथ ही आतिशी के जरिए महिला विरोधी छवि होने का दाग भी धोने की कोशिश होगी. दिल्ली में आतिशी की साफ और संघर्ष करने वाली नेता की छवि को भुनाने की कोशिश होगी. 

जाति की राजनीति को तरजीह न देकर भी दिल्ली को संदेश दिया गया है. केजरीवाल के इस्तीफे से पहले दिल्ली की राजनीति में शराब घोटाले की चर्चा हो रही थी. वहीं, अब इस्तीफे के दांव से केजरीवाल ने उस चर्चा को दागदार-बेदाग और ईमानदार-बेईमान की तरफ मोड़ दिया है.

क्या केजरीवाल का दांव है मास्टर स्ट्रोक?

अरविंद केजरीवाल की राजनीति को समझें तो एक तरीके से वो देश में ट्रेंड सेट करने वाले नेता बन चुके हैं. सॉफ्ट हिंदुत्व की छवि बनाए रखते हुए वो मुस्लिमों में भी लोकप्रिय हैं. अब अगले साल दिल्ली में जो चुनाव होंगे, उसमें विपक्ष को आतिशी का विकल्प पेश करना होगा.

आतिशी को सीएम बनाकर अरविंद केजरीवाल ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं. उनमें से एक सियासी निशाना महिलाओं को साधने का भी है. आतिशी के जरिए केजरीवाल ने आधी आबादी को साथ लेकर चलने का संदेश दिया है. लोकसभा चुनाव से पहले जिस तरह से स्वाति मालीवाल की कथित पिटाई का मामला सामने आया था, उसके चलते पार्टी को नुकसान झेलना पड़ा था.

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