मैं भारत की वफादार नागरिक हूं’, फरीदा बहनजी ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से तोड़ा नाता; देश के खिलाफ लड़कियों को भड़काती थी

कश्मीर में बह रही बदलाव की बयार के बीच शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर मास मूवमेंट की अध्यक्ष फरीदा बहनजी ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के दोनों गुटों समेत देश-विदेश में सक्रिय किसी भी राष्ट्रविरोधी संगठन से खुद को अलग कर दिया। इसकी घोषणा करते हुए फरीदा ने कहा, मैं भारत की एक वफादार नागरिक हूं। बता दें कि फरीदा की यह घोषणा कश्मीर में अलगाववाद के कमजोर होने और राष्ट्रीय मुख्यधारा की ओर बढ़ते कदमों का संकेत है। अब तक 12 राजनीतिक समूहों ने हुर्रियत से अपने संबंध तोड़ लिए हैं, जिससे दोनों गुट प्रासंगिक बने रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कश्मीर की सबसे पुरानी महिला अलगाववादी नेता
जम्मू-कश्मीर मास मूवमेंट और उसकी अध्यक्ष फरीदा बहनजी जिसका असली नाम फरीदा डार है। वह कश्मीर के सबसे पुरानी महिला अलगाववादी नेताओं में एक है। जम्मू-कश्मीर मास मूवमेंट कश्मीर में महिलाओं में विशेषकर छात्राओं में अलगाववादी भावनाओं को भड़काने और उन्हें भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए तैयार करने का काम करती रही है।

दरक गया अलगाववादियों का किला

एक सार्वजनिक घोषणा में, जम्मू और कश्मीर मास मूवमेंट की अध्यक्ष फरीदा बहनजी ने खुद को और अपने संगठन को कश्मीर में सक्रिय अलगाववादी समूहों से अलग कर लिया है, जिसमें ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (APHC) के दोनों गुट शामिल हैं। एक हलफनामे में, फरीदा बहनजी ने कहा कि न तो उनका और न ही उनके संगठन का एपीएचसी (जी), एपीएचसी (ए), उनके घटकों या अलगाववादी या इसी तरह के एजेंडे को आगे बढ़ाने वाले किसी अन्य समूह से कोई संबंध या संबद्धता है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि एपीएचसी की विचारधारा उनके या उनकी पार्टी के साथ प्रतिध्वनित नहीं होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच जम्मू-कश्मीर के लोगों की वैध आकांक्षाओं और शिकायतों को संबोधित करने में विफल रहे हैं।  

भारतीय संविधान में जताई आस्था

फरीदा ने उन्हें या जम्मू-कश्मीर मास मूवमेंट को ऐसे समूहों से जोड़ने के किसी भी प्रयास के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाइयों के कानूनी परिणाम होंगे। उन्होंने कहा, “मैं भारत की एक वफादार नागरिक हूं। मैं और मेरा संगठन भारत के संविधान के प्रति निष्ठा रखते हैं और किसी ऐसे समूह से जुड़े नहीं हैं जो राष्ट्र के हितों के खिलाफ काम करता है।

लड़कियों को दिलाती थी मजहबी तालीम

कश्मीर की अलगाववादी सियासत में फरीदा बहनजी के दबदबे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी हो या उदारवादी हुर्रियत प्रमुख मीरवाइज मौलवी उमर फारूक या कोई अन्य अलगाववादी नेता या फिर कोई आतंकी कमांडर उनकी उपेक्षा नहीं कर सकता था। वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए भी बड़ा महत्व रखती थी। फरीदा बहनजी ने लड़कियों को मजहबी तालीम देने के लिए भी एक संस्था बना रखी थी।
जम्मू-कश्मीर में दिख रही शांति की झलक- BJP
वहीं, इस पर जम्मू-कश्मीर भाजपा इकाई ने कहा, अब 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में शांति की झलक देखने को मिल रही है। जो लोग पहले ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाते थे और दूसरी बातों पर विश्वास करते थे, उन्हें अब लग रहा है कि यह झूठा प्रचार था जो वे पाकिस्तान के इशारे पर करते थे। गृह मंत्री ने अलगाववादी राजनीति से इस बढ़ते प्रस्थान का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एकजुट और मजबूत भारत के दृष्टिकोण को दिया।

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