सैलरी देने के पैसे नहीं, महापौर-पार्षदों को बांटे 70 लाख के लैपटॉप, अब स्मार्ट फोन देने की तैयारी में नगर निगम

नगर निगम की वर्तमान में माली हालत खराब है और वित्तीय संकट निगम में बना हुआ है। स्थिति यह है कि कर्मचारियों को भी समय पर सैलरी नहीं मिल पा रही है और वेतन के लाले पड़ रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी वित्त विभाग की ओर से महापौर व पार्षदों को लगभग 40 लाख के लैपटॉप दे दिए गए हैं और अब इन्हें स्मार्ट फोन देने की भी तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। बताया जा रहा है कि लगभग 30 लाख रुपए में स्मार्ट फोन खरीदे जा रहे हैं। नगर निगम के वित्त अपर आयुक्त रजनी शुक्ला का कहना है कि हमने पार्षद व महापौर को लैपटॉप दे दिए हैं। अब स्मार्ट फोन जल्द ही दिए जाएंगे। चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि आते ही कर्मचारियों को वेतन दिया जाता है।

कांग्रेस के 24 तो भाजपा के 42 पार्षद

निगम परिषद में महापौर डॉ. शोभा सिकरवार के साथ कांग्रेसी दल के साथ ही अन्य को मिलाकर 24 पार्षद है। जबकि विपक्ष में भाजपा के साथ ही अन्य को मिलाकर पार्षदों की संख्या 42 है।

लैपटॉप में सॉफ्टवेयर ही नहीं, पत्र जारी कर वापस मंगाए

नगर निगम की ओर से पार्षदों को पेटी पैक लैपटॉप दिए गए हैं, लेकिन किसी भी पार्षद ने अब तक उसमें वार्ड और क्षेत्र की जानकारी, सॉफ्टवेयर अपलोड न होने और संचालन के लिए अन्य किसी जानकारी के न होने पर भी उसकी मांग नहीं की है। ऐसे में अधिकारियों ने लैपटॉप वापस लाकर जानकारी व सॉफ्टवेयर अपलोड कराने के लिए सभी पार्षदों को पत्र जारी किए गए।

40 लाख में खरीदें 70 लैपटॉप

निगम की वित्तीय स्थिति खराब होने के बाद भी वर्ष 2024 में परिषद से सभी सदस्यों को लैपटॉप देने का प्रस्ताव सत्तापक्ष और विपक्ष ने सामूहिक सहमति के बाद पारित कर दिया था। इसके बाद जनवरी 2025 में ही निगम के कंप्यूटर सेक्शन ने 40 लाख से एसर कंपनी के 70 लैपटॉप खरीदे। बाद में महापौर व पार्षदों को लैपटॉप दिए जा चुके है। बाकी के दो लैपटॉप को परिषद के लिए रिजर्व रखा गया है।

हर माह सैलरी और पेंशन के बांटे जाते है 19.86 करोड़

नगर निगम में नियमित, विनियमित व आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या लगभग 8500 हैं और उन्हें प्रतिमाह वेतन राशि लगभग 17 करोड़ और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दी जाने वाली पेंशन राशि ढाई करोड़ सहित कुल 19.86 करोड़ रुपए प्रतिमाह कर्मचारियों को वेतन व पेंशन के रूप में बांटे जाते हैं। यह राशि निगम चुंगी क्षतिपूर्ति के जरिए और बाकी का पैसा संपत्तिकर, जलकर व राजस्व के जरिए वसूलकर कर्मचारियों को देता है। वर्तमान में नगर निगम सिर्फ 12 करोड़ रुपए प्रति माह चुंगी क्षतिपूर्ति के रूप में मिल रहे हैं। हालात यह हैं कि बीते एक साल से निगम एक तारीख को कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रहा है।

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