ग्वालियर: फर्जी दस्तावेज तैयार कर अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने वाले अनिल श्रीवास्तव को न्यायाधीश अशोक कुमार त्रिपाठी ने 10 साल कारावास की सजा के साथ 1.25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अनिल के पिता हरीशंकर श्रीवास्तव का 1988 में निधन हुआ था।
इसके बाद उनके बड़े बेटे सुनील श्रीवास्तव को 1991 में अनुकंपा नियुक्ति मिली। 1995 में अनिल श्रीवास्तव ने बड़े भाई को अनुकंपा नियुक्ति मिलने की बात छिपाकर खुद भी अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त कर ली। जब इसकी शिकायत हुई तो 2017 में वीआरएस ले लिया।
अपर लोक अभियोजक मिनी शर्मा ने बताया कि इस मामले में हरेंद्र सिंह सिकरवार की शिकायत पर 17 अक्टूबर 2018 को एफआईआर दर्ज की गई। बता दें अनिल के बड़े अभी नौकरी कर रहे हैं।
ऐसे समझें पूरा फर्जीवाड़ा
• 6 अप्रैल 1988: पिता हरीशंकर श्रीवास्तव का निधन हुआ।
• 10 जुलाई 1991: बड़े भाई सुनील को मुरैना में क्लर्क की नौकरी मिली।
• 7 अप्रैल 1995: छोटे भाई अनिल ने तथ्य छिपाकर सहायक शिक्षक की नौकरी हथियाई।
• 14 सितंबर 2017: शिकायत के बाद जांच कमेटी बनी।
• 17 अक्टूबर 2018: कोतवाली थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ।
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