क्या मान गए रूठे युवराज?”करीब 2 माह बाद ग्वालियर आए महानआर्यमन सिंधिया”

“ग्वालियर से शिवपुरी तक जबरदस्त स्वागत”
ग्वालियर में #मध्यप्रदेशक्रिकेट एसोसिएशन (#MPCA) के अध्यक्ष #महानआर्यमन सिंधिया का ग्वालियर से शिवपुरी तक जबरदस्त स्वागत हुआ, और उनका इंतजार कर रहे उनके समर्थकों में उत्साह दिखाई दिया।
  महानआर्यमन करीब 2 माह बाद ग्वालियर आए हैं, जिसे लेकर कई चर्चाएं हैं। सूत्रों के मुताबिक  इसका कारण  उनके द्वारा लिए गए एक फैसले को चार दिन के भीतर ही उनके पिता  द्वारा खारिज कर देना था जिससे वो नाराज चल रहे थे, और ग्वालियर के कार्यक्रमों से व्यस्तता का हवाला देते हुए  दूरी बना ली थी।  क्योंकि इस फैसले से उनके समर्थकों में  उनकी कॉफी किरकिरी हुई थी।
ये था मामला:-
हुआ ये कि महानआर्यमन #सिंधिया ने ऊर्जा मंत्री #प्रद्युमनसिंह तोमर के बेटे #रिपुदमनसिंह और #सिंधिया परिवार के करीबी धीरज पाराशर को MPL (मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग) गवर्निंग कमेटी में सदस्य बनाया था। इन नियुक्तियों पर विवाद खड़ा हो गया था। विवाद बढ़ने के बाद चार दिन के भीतर ही यह फैसला बदल दिया गया। दोनों नए सदस्यों को कमेटी से हटाकर उनके स्थान पर नए नाम जोड़े गए हैं।
       सूत्रों के अनुसार, जैसे ही यह जानकारी #ज्योतिरादित्य सिंधिया तक पहुंची थी तो उन्होंने इस फैसले को तुरंत पलटवाने का निर्देश दिए, क्योंकि उन्हें लगा कि इन नियुक्तियों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। दोनों को इस पद से हटाते हुए महल के सरदार संग्राम सिंह कदम और क्रिकेटर विजय प्रकाश शर्मा उर्फ बेटू को एमपीएल की गवर्निंग बॉडी में नियुक्त कर दिया गया था।
इसलिए हुआ था नियुक्तियों का  विरोध:-             नियुक्तियों की जानकारी सामने आते ही सवाल उठने लगे थे आखिर इनका क्रिकेट में योगदान क्या है। कहा जाने लगा कि जब यह दोनों #जीडीसीए तक के सदस्य नहीं हैं तो फिर एमपीएल की गवर्निंग बॉडी में कहां से आ गए। गौरतलब है कि रिपुदमन, मध्यप्रदेश सरकार में सिंधिया कोटे से ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के बेटे थे तो धीरज पाराशर के बारे में कहा जा रहा है कि यह सिंधिया के स्टाफ मेंबर से जुड़े हुए थे। 24 अक्टूबर को इनकी नियुक्ति का आदेश जारी किया गया था। जीडीसीए के सचिव संजय आहूजा के दस्तखत से यह आदेश जारी किया गया था। इसके बाद इन दोनों नियुक्ति पर सवाल खड़े हुए थे।

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