आयुष्मान भारत से लाडली लक्ष्मी तक… एमपी में 47 विभागों की 125 योजनाएं ठप्प, ठन-ठन गोपाल हुई मोहन सरकार!

भोपाल: लाडली लक्ष्मी, पीएम जन आरोग्य (आयुष्मान भारत) और महाकाल विकास समेत 47 विभागों की 125 योजनाओं को मध्य प्रदेश सरकार ने रोक दिया है। इस महीने की शुरुआत में राज्य के बजट के बाद, वित्त विभाग ने निर्देश दिया है कि इन योजनाओं के लिए पैसा उसकी अनुमति के बिना नहीं निकाला जा सकता है। यही वजह है कि लाडली लक्ष्मी और 124 अन्य योजनाओं का फंड रुका हुआ है।
बजट पेश करने के एक हफ्ते बाद 10 जुलाई को, एमपी सरकार ने राज्य के लिए एक जेट विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, लेकिन अब राम वन गमन पथ, मंत्रियों के बंगलों का नवीनीकरण और तीर्थ यात्रा योजना सहित कई प्रमुख योजनाओं के लिए धन रोकने का फैसला किया गया है।

किस विभाग को पड़ी सबसे ज्यादा मार

सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को ‘फंड-होल्ड’ सूची में डाली गई परियोजनाओं के मामले में सबसे बड़ी मार पड़ी है। इसके बाद शहरी विकास और आवास विभाग, किसान कल्याण और कृषि विकास का स्थान है। वित्त विभाग की ओर से 23 जुलाई को जारी निर्देश के मुताबिक लोक स्वास्थ्य और किसान कल्याण से जुड़ी योजनाओं की भी राशि बिना मंजूरी के नहीं निकाली जा सकेगी।

हालांकि वित्त विभाग के अधिकारी इस सख्ती के बारे में बताने में विफल रहे। एक अधिकारी ने इतना ही कहा, ‘फंड का उपयोग संसाधनों की उपलब्धता और सरकार की प्राथमिकता के अनुसार किया जाता है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे निर्देश ‘आम तौर पर बजट के बाद जारी किए जाते हैं।’

लाडली बहना योजना अभी तक सेफ

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि ‘फंड निकालने से पहले वित्त विभाग की अनुमति लेने का मतलब यह नहीं है कि योजना बंद हो गई है। लेकिन, इससे कई विभागों को योजनाओं के लिए वित्त विभाग से संपर्क करने में परेशानी होगी। सरकार की प्रमुख वित्तीय जिम्मेदारियों में लाडली बहना योजना भी शामिल है, जिस पर हर महीने करीब 1,600 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यह योजना पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई थी और इसे बीजेपी के लिए गेम चेंजर बताया गया था। अच्छी बात ये है कि इस योजना के लिए अभी तक पैसे की कमी नहीं हुई है।

एमपी सरकार पर भारी कर्जा

पिछले साल नवंबर में विधानसभा चुनाव के बाद बनी नई सरकार को 3.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज विरासत में मिला था। मप्र सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में 42,500 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। इसमें से नई मोहन यादव सरकार ने मार्च तक केवल तीन महीनों में 17,500 करोड़ रुपए लोन में लिए थे।

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