इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पांच दिन के दौरे पर शनिवार शाम को बीजिंग पहुंची हैं। ये उनकी पहली चीन यात्रा है। अपनी 5 दिन के दौरे पर मेलोनी सोमवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से मिलेंगी।
PM मेलोनी चीनी नेताओं से दोनों देशों के बीच बिजनेस को बढ़ावा देने और यूक्रेन में युद्ध को खत्म करने जैसे मुद्दों को लेकर बात कर सकती हैं। इटली चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) से साल 2019 में जुड़ा था और ऐसा करने वाला G7 का एकमात्र देश था।
इस प्रोजेक्ट से जुड़ने के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने इटली की आलोचना की थी और कहा था कि चीन उसे इस प्रोजेक्ट के जरिए कर्ज के जाल में फंसाना चाहता है। फिर प्रधानमंत्री बनने के बाद मेलोनी ने दिसंबर 2023 में BRI से अलग होने का फैसला किया था।
इटली पीएम ने आरोप लगाया था कि इसके जरिए शी जिनपिंग विदेशों में अपना प्रभाव बढ़ाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि इटली के BRI प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना एक बड़ी गलती थी। अब मेलोनी की इस यात्रा को लेकर चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि वह चीन के साथ खराब हुए रिश्तों को ठीक करने के लिए बीजिंग आई हैं।
चीनी अखबार ने लिखा- मेलोनी को जिनपिंग का भरोसा जीतना होगा
ग्लोबल टाइम्स ने शनिवार को लिखा है कि मेलोनी को अब चीन का यकीन जीतने के लिए और मेहनत करनी होगी। वे ये नहीं कह सकती कि वे अपने देश में चीनी निवेश का स्वागत करती हैं जबकि हकीकत कुछ और है। अखबार ने आरोप लगाया कि मेलोनी सरकार इटली में चीनी निवेश रोकने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाती हैं।
चीनी अखबार के मुताबिक पीएम मेलोनी की इस यात्रा के दौरान रविवार और सोमवार को बीजिंग में इटली-चीन बिजनेस मीट का आयोजन होगा जिसमें इटली की कई बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।
ग्लोबल टाइम्स ने जानकारों के हवाले से लिखा है कि मेलोनी चीन के साथ तनाव कम करने के उद्देश्य से वहां पहुंची हैं। दोनों देशों के बीच पिछले एक साल से तनाव जारी है। मेलोनी इस यात्रा के जरिए इटली के व्यापारियों के लिए चीनी बाजार खोलना चाहती हैं और इटली में चीनी निवेश ले जाना चाहती हैं।
चाइना डेली ने लिखा- यूरोप में मेलोनी का प्रभाव बढ़ा
चीन की अंग्रेजी वेबसाइट चाइना डेली लिखता है कि फ्रांस और जर्मनी जैसे बड़े यूरोपीय देशों में राजनीतिक संकट पैदा हो गया है। इस वजह से यूरोपीय यूनियन में इटली का प्रभाव बहुत बढ़ गया है। मेलोनी की ये यात्रा चीन के साथ यूरोपीय यूनियन के संबंधों के लिए भी अहम साबित हो सकती है।
चाइना डेली ने आगे लिखा है कि इटली इस साल G7 की अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में वह पश्चिमी देशों और चीन के बीच बेहतर कम्यूनिशन का काम भी कर सकता है। अखबार ने लिखा है कि चीन-इटली और चीन-ईयू संबंध मलोनी जैसी बड़ी यूरोपीय नेताओं की पसंद पर निर्भर करेगा।
18 जुलाई, 2024 को यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के फिर से चुने जाने के बाद से किसी यूरोपीय नेता की ये पहली चीन यात्रा होगी। फिलहाल EU के इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर टैरिफ लगाने के कारण चीन के साथ उसके संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं।
इटली यूरोपीय यूनियन में चीन का चौथा सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर है। एशिया में चीन, इटली का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों देशों के बीच 2023 में 6 लाख करोड़ रुपए का व्यापार हुआ था जो कि साल 2022 के मुकाबले 7.2% कम था।
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