मोदी के भरोसे ही रह गए सांसद… पीएम-सीएम के प्रचार के बाद भी सिमटी भाजपा, अब होगा एक्शन!

लखनऊ। भाजपा लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन की समीक्षा करेगी। उत्तर प्रदेश में भाजपा को अपेक्षा के अनुरूप आधी सीटें भी नहीं मिली हैं। इसे पार्टी ने गंभीरता से लिया है, लेकिन पहली प्राथमिकता केंद्र में सरकार बनाने की है। उसके बाद उत्तर प्रदेश की समीक्षा की जाएगी।

उत्तर प्रदेश में भाजपा को 2014 के लोस चुनाव में 71 और 2019 के चुनाव में 62 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। 2019 के बाद दो सीटों पर हुए उप चुनाव में भी भाजपा ने जीत दर्ज कर अपनी सीटों की संख्या 64 कर ली थी। इस बार प्रदेश की सभी 80 सीटों पर जीत का लक्ष्य लेकर चुनावी मैदान में उतरी भाजपा ने 75 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। साथ ही पांच सीटें सहयोगी दलों को दी थीं। 

चुनाव प्रचार में नहीं छोड़ी कोई कसर

पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित भाजपा के तमाम केंद्रीय और राज्य सरकार के मंत्रियों ने चुनाव प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। इसके बाद भी भाजपा 33 सीटों पर सिमट गई। 

भाजपा ने 47 सांसदों को चुनाव मैदान में उतारा था। इनमें 26 सांसदों के चुनाव हारने से भाजपा को बड़ा झटका लगा है। टिकट बंटवारे के बाद अंदरखाते तमाम सीटों पर विधायकों के विरोध के चलते भाजपा अपनी ही अपेक्षाओं पर खरा उतर पाने में सफल नहीं हो पाई। 

मोदी के नाम जीतने की उम्मीद

भाजपा के अधिकतर सांसद इसी उम्मीद में थे कि वह पिछले चुनावों की तरह ही मोदी के नाम पर इस बार भी जीत जाएंगे। उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रदर्शन को लेकर प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी ने चुनाव परिणाम आने के बाद ही तत्काल अपनी प्रतिक्रिया देकर समीक्षा के संकेत दे दिए हैं। 

भाजपा के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी का कहना है कि पार्टी अपने हर आयोजन की समीक्षा करती है। इस बार भी उप्र में प्रदर्शन को लेकर कठोर समीक्षा होगी। फिलहाल पार्टी का सारा ध्यान केंद्र में सरकार बनाने पर है।

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