आज रामनवमी है। 500 वर्षों बाद आज रामनवमी पर अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार रामलला का सूर्य तिलक स्वयं सूर्यदेव करेंगे। रामलला के सूर्याभिषेक की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। रामनवमी के मौके पर आज दोपहर 12 बजकर 16 मिनट पर रामलला का सूर्य तिलक होगा। वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान विष्णु के सातवें अवतार प्रभु श्रीराम का जन्म त्रेतायुग में कर्क लग्न और अभिजीत मुहूर्त में हुआ था। अयोध्या के राम मंदिर में सुबह से भगवान राम के बालक स्वरूप रामलला का जन्मोत्सव और सूर्य तिलक की तैयारियां शुरू हो चुकी है। आज रामनवमी पर अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए भक्तों का काफी समय मिलेगा। करीब 20 घंटे तक रामलला के दर्शन होंगे। ब्रह्रा मुहूर्त में मंगला आरती के साथ रामलला के दर्शन और जन्मोत्सव शुरू हो गया है। जानते हैं रामनवमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और दोपहर को सूर्य तिलक के बारे में सबकुछ…
आज रामनवमी पर दिखेगा रामलला के मस्तक पर सूर्य तिलक का खूबसूरत नजारा
आज देशभर में भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव रामनवमी बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाई जा रही है। अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का बाद पहली रामनवमी बहुत खास है। विशेष इसलिए हैं क्योंकि भव्य मंदिर में रामलला की मूर्ति का सूर्य तिलक किया जाएगा, जिसके लिए तैयारियां चल रही हैं। दोपहर 12 बजे राम भक्त अपने प्रभु राम के मस्तक पर सूर्य तिलक का खूबसूरत नजारा देख सकेंगे। सूर्य तिलक के लिए देश के वैज्ञानिकों ने इसके लिए खास तैयारी की है।
भगवान राम का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर कर्क लग्न और दोपहर अभिजीत मुहूर्त में हुआ था। आज रामनवमी पर दोपहर 12 बजे जब भगवान रामलला का जन्मोत्सव मनाया जाएगा ठीक उसी समय उनके माथे पर सूर्य की किरणें पड़ेगी और स्वयं सूर्यदेव भगवान का सूर्याभिषेक करेंगे। आज रामनवमी पर जब प्रभु राम का सूर्य तिलक होगा तो देश-दुनिया में इस अनोखे और अद्बभुत नजारे को लाइव प्रसारण के माध्यम से देख सकेंगे। आप अमर उजाला. कॉम पर भी सूर्य तिलक का लाइव कार्यक्रम देख सकते हैं। आप AmarUjala.Com के YouTube चैनल पर जाकर रामलला के सूर्य तिलक का लाइव प्रसारण देख सकते हैं और प्रभु राम के दर्शन कर सकते हैं।
कैसे होगा रामलला का सूर्य तिलक ?
आज देश-विदेश में रामनवमी की धूम है। इस बार की रामनवमी बहुत खास है क्योंकि 500 वर्षों के बाद अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामलला का सूर्य तिलक किया जाएगा। आज दोपहर में 12 बजे रामलला का सूर्य अभिषेक किया जाएगा। इसके लिए खास तैयारी पूरी हो चुकी है। सूर्य तिलक के लिए वैज्ञानिकों ने खास तैयारी की है। मंदिर के सबसे ऊपरी तल पर लगे दर्पण पर ठीक दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणें पडे़ंगी। दर्पण से 90 डिग्री पर परावर्तित होकर ये किरणे एक पीतल के पाइप में जाएंगी। पाइप के छोर पर एक दूसरा दर्पण लगा है। इस दर्पण से सूर्य किरणें एक बार फिर से परावर्तित होंगी और पीतल की पाइप के साथ 90 डिग्री पर मुड़ जाएंगी।
दूसरी बार परावर्तित होने के बाद सूर्य किरणें लंबवत दिशा में नीचे की ओर चलेंगी। किरणों के इस रास्ते में एक के बाद एक तीन लेंस पड़ेंगे, जिनसे इनकी तीव्रता और बढ़ जाएगी। लंबवत पाइप जाती है। लंबवत पाइप के दूसरे छोर पर एक और दर्पण लगा है। बढ़ी हुई तीव्रता के साथ किरणें इस दर्पण पर पड़ेंगी और 90 डिग्री पर मुड़ जाएंगी। 90 डिग्री पर मुड़ी ये किरणें सीधे राम लला के मस्तक पर पड़ेंगी। इस तरह से राम लला का सूर्य तिलक पूरा होगा
राम नवमी तिथि पर हुआ था भगवान राम का जन्म
भगवान श्री राम का जन्म चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी को अयोध्या में हुआ। श्रीराम का जन्म दिन के 12 बजे हुआ था इस समय नवमी तिथि, पुष्य नक्षत्र व कर्क लग्न था। माता कौशल्या की कोख से जन्म लेने पर भगवान विष्णु के मानव अवतार लेने पर इस जन्मोत्सव का आनंद देवताओं, ऋषियों, किन्नरों, चारणों सहित अयोध्या नगरी की समस्त प्रजा ले रही थी।
रामनवमी शुभ मुहूर्त
आज रामनवमी के दिन बेहद ही दुर्लभ संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार इस बार राम नवमी के दिन आश्लेषा नक्षत्र, रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। इस दिन सुबह 6 बजकर 8 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा और पूरे दिन भर रवि योग रहेगा। रामनवमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त 11 बजकर 1 मिनट पर दोपहर 01 बजकर 36 मिनट तक रहेगा।
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देशभर में राम नवमी धूम
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क्या है सूर्य अभिषेक
आज चैत्र नवरात्रि का आखिरी दिन है और इसी के साथ देशभर में राम नवमी का त्योहार भी मनाया जा रहा है। अयोध्या में बने राम मंदिर में पहली बार रामलला का सूर्य अभिषेक किया जाएगा, जिसकी तैयारियां पूरी हो चुकी है। दोपहर 12 बजकर 16 मिनट पर सूर्य की पहली किरण रामलला के मस्तक पर पड़ेगी। सभी को बेसब्री का इंतजार है। सनातन धर्म और ज्योतिष में सूर्य का विशेष स्थान है। सूर्य की पहली किरण से मंदिर का अभिषेक होना बहुत शुभ माना जाता है। सूर्य को ऊर्जा का स्रोत और ग्रहों का राजा माना जाता है। ऐसे में जब देवता अपनी पहली किरण से भगवान का अभिषेक करते हैं तो उसे आराधना में और देवत्व का भाव जाग जाता है । इस परिकल्पना को सूर्य किरण अभिषेक कहा जाता है।
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