कांग्रेस को पटखनी देने भाजपा ने वेट एंड वॉच का खेला माइड गेम, जाने 94 सीटें अटकने की वजह

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 17 नवंबर को मतदान है। 21 अक्टूबर से नामांकनअधिसूचना जारी हो जाएगी। इससे पहले कांग्रेस ने 230 में से 229 सीटों पर अपने प्रत्याशियों का एलान कर दिया है। आमला सीट निशा बांगरे के लिए होल्ड कर  रखी है। वहीं, अगस्त में पहली सूची जारी करने वाली भाजपा कांग्रेस से प्रत्याशी उतारने में पिछड़ गई है। भाजपा ने अपने 136 ही उम्मीदवार उतारे है। अभी 94 प्रत्याशियों के नाम का एलान होना बाकी है। इसमें 67 विधायक शामिल है। इसके पीछे की वजह भाजपा की एक-एक सीट पर तैयार की गई रणनीति बताई जा रही है। पार्टी ने कांग्रेस को पटखनी देने के लिए प्रत्याशी उतारने में माइंड गेम खेला है। 

सबसे पहले हारी सीटों पर उतारे प्रत्याशी 
कांग्रेस ने चुनाव की तारीखों के एलान के दो से तीन महीने पहले 66 लगातार हारती आ रही सीटों पर प्रत्याशी उतारने की बात कही थी, लेकिन इसमें भाजपा कांग्रेस से आगे निकल गई। भाजपा ने 17 अगस्त को लगातार हारती हा रही 39 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए। इसके कुछ दिन बाद लगातार हारती आ रही कुछ और सीटों पर प्रत्याशियों का एलान कर दिया। इससे प्रत्याशियों को चुनाव प्रचार करने दो महीने ज्यादा का समय मिल गया। साथ ही पार्टी को टिकट कटने से विरोध और असंतोष उभरने के डैमेज कंट्रोल करने का भी ज्यादा समय मिल गया।  

दिग्गजों को उतार सभी क्षेत्रों को बैलेंस किया
भाजपा ने तीसरी सूची में तीन केंद्रीय मंत्री समेत सात सांसदों को चुनाव मैदान में उतार कर सबको चौंका दिया। इसमें कई सीएम पद के दावेदार भी शामिल है। इससे नाराज कार्यकर्ताओं में उनके क्षेत्र के नेता के सीएम बनने की उम्मीद जगी और वह पार्टी के काम में एक्टिव हो गए। साथ ही यह मैसेज भी गया कि उनके नेता ज्यादा सीटों से जीतेंगे तो वह सीएम बनेंगे। दूसरा पार्टी ने बढ़े नेताओं के चुनाव मैदान में उतार कर सभी क्षेत्र को बैलेंस किया है। 

पांचवीं सूची में वेट एंड वॉच की रणनीति 
भाजपा के अभी 94 प्रत्याशियों के नामों पर घोषणा बाकी है। इसमें 8 मंत्री और 67 विधायकों की सीट पर निर्णय होना है। क मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने स्वास्थ्य कारणों से चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया है। मध्य प्रदेश को लेकर भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक दो बार टल चुकी हैं। इसके पीछे की वजह कांग्रेस की सूची का इंतजार बताया जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पाचवीं सूची में सर्वे रिपोर्ट के अनुसार करीब दो दर्जन विधायकों और चार से पांच मंत्रियों के टिकट खतरे में है। इनके टिकट कटते है तो बड़ी संख्या में बगावत हो सकती है। अब कांग्रेस के प्रत्याशियों के एलान से बगावत और विरोध बड़े स्तर पर नहीं होने का अनुमान है। वहीं, यदि कोई निर्दलीय या किसी तीसरे दल से लड़ता है तो उतना नुकसान नहीं होगा। इससे पार्टी डैमेज कंट्रोल भी कर लेंगी।

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