गर्भावस्था के चलते रुकी महिला IPS की ट्रेनिंग, सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से किया इनकार

गर्भावस्था की वजह से ट्रेनिंग से बाहर हुई मध्य प्रदेश कैडर की IPS अधिकारी उर्वशी सेंगर को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. अदालत ने चल रही ट्रेनिंग में उन्हें शामिल कराने का आदेश देने से इनकार कर दिया. हालांकि कोर्ट ने केंद्र के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया कि इससे उनकी वरिष्ठता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा ट्रेनिंग का नौ हफ्ते का कार्यक्रम चल रहा है और इसमें से तीन हफ्ते पूरे हो चुके हैं. ऐसे में अब अधिकारी पूरी ट्रेनिंग नहीं कर पाएंगी. इसी वजह से अदालत ने फिलहाल उन्हें ट्रेनिंग में शामिल करने का आदेश नहीं दिया. साथ ही ट्रिब्यूनल से कहा कि वह इस मामले की मूल याचिका पर मेरिट के आधार पर सुनवाई करे.

कोर्ट ने केंद्र से पूछा अहम सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र से यह भी पूछा कि अगर कोई महिला अधिकारी मेडिकल तौर पर फिट है और ट्रेनिंग के लिए तैयार है, तो उसे मातृत्व लाभ के नाम पर उसके अधिकारों से क्यों रोका जाए. कोर्ट ने इस सवाल पर केंद्र का पक्ष भी सुना, लेकिन अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया

क्या है पूरा मामला?

यह मामला मध्य प्रदेश कैडर की 2023 बैच की IPS अधिकारी उर्वशी सेंगर से जुड़ा है. ट्रेनिंग के दौरान वह गर्भवती हो गई थीं. बच्चे के जन्म के बाद मेडिकल फिटनेस हासिल करने पर उन्होंने जून में शुरू हुए फेज-II प्रशिक्षण में शामिल होने की अनुमति मांगी थी. लेकिन अकादमी ने 1993 के गृह मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए उनकी मांग स्वीकार नहीं की.

1993 के नियम में क्या है?

1993 के गृह मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन के मुताबिक, अगर कोई महिला IPS प्रोबेशनर ट्रेनिंग के दौरान गर्भवती हो जाती है, तो उसकी ट्रेनिंग रोक दी जाती है. उसे प्रसव के एक साल बाद दोबारा प्रशिक्षण में शामिल होने की अनुमति मिलती है. उर्वशी सेंगर ने इसी नियम को चुनौती दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह नीति महिलाओं को राहत देने के लिए बनाई गई थी, न कि उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए.

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *