अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई में 2 करोड़ लोगों के जुटने का अनुमान, कब होंगे सुपुर्द-ए-खाक?

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को उनकी मृत्यु के तीन महीने बाद सुपुर्द-ए-खाक जाएगा. 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमलों में उनकी मौत हो गई थी. ईरानी अधिकारियों ने बताया कि खामेनेई के जनाजे के लिए तीन दिनों के राजकीय शोक और सार्वजनिक अंतिम संस्कार का ऐलान किया गया है. ईरान प्रशासन ने इस सार्वजनिक शोक यात्रा में लगभग 2 करोड़ लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया है.

ईरान के सरकारी मीडिया आउटलेट IRNA के मुताबिक, तेहरान के डिप्टी मेयर मोहम्मद अमीन तवाकोली-जादेह ने बताया कि अंतिम संस्कार में तीन दिन तक सार्वजनिक समारोह होंगे. खामेनेई की आखिरी विदाई यात्रा राजधानी तेहरान के अलावा देश के प्रमुख धार्मिक केंद्रों वाले दो शहर- ‘कोम’ और ‘मशहद’ से होकर गुजरेगी. सार्वजनिक सभाओं और प्रार्थनाओं के बाद उन्हें उनके गृहनगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की तैयारी है.
डिप्टी मेयर तवाकोली-जादेह ने आगे बताया कि तेहरान में अंतिम संस्कार की रस्में कम से कम 24 घंटे तक चलेंगी. रिपोर्ट के मुताबिक, अंतिम संस्कार जून के बीच मोहर्रम के समय हो सकता है. हालांकि, समय या तारीख अभी नहीं बताई गई है.
ईरानी सरकारी चैनल प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, डिप्टी मेयर ने कहा कि सार्वजनिक शोक यात्रा में लगभग 2 करोड़ लोगों के शामिल होने का उम्मीद है. इसी लिहाज से प्रशासन की तैयारी चल रही है. पाकिस्तान, अफगानिस्तान, भारत और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों से भी शोक मनाने वालों के आने की उम्मीद है.

इस्लामी परंपरा के मुताबिक, अंतिम संस्कार आम तौर पर किसी व्यक्ति की मौत के कुछ दिनों के अंदर किया जाता है. 28 फरवरी को अमेरिकी-इजराइल हमले में अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. मार्च की शुरुआत में ईरानी अधिकारियों ने बताया था कि उन्होंने सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया है. तब उन्होंने सुरक्षा कारणों और युद्ध की परिस्थितियों का हवाला देते हुए देरी की वजह बताई थी.

अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया था. अंग्रेजी अखबार ‘द सन’ की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मोजतबा खामेनेई कथित तौर पर कोमा में हैं और एक हवाई हमले के दौरान उन्होंने अपना एक पैर भी खो दिया है. इसी हमले में उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की जान गई थी. दावा है कि मोजतबा के पेट और लिवर में भी गंभीर चोटें आई हैं.

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