लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून केरल में दस्तक देने वाला है. मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, मॉनसून 4 जून के आसपास केरल पहुंच जाएगा. इसके साथ ही अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कई इलाकों में भी मॉनसून के आगे बढ़ने की अच्छी संभावना है.
IMD के मुताबिक, अगले दो दिनों में भारत में मॉनसून की एंट्री हो जाएगी. मॉनसून केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों, लक्षद्वीप, अरब सागर के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व भागों, साथ ही बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य, पूर्व-मध्य, उत्तर-पूर्वी और शेष दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में आगे बढ़ सकता है.
सामान्य से देरी, लेकिन अब तैयारी पूरी
आमतौर पर मॉनसून 1 जून के आसपास केरल में आ जाता है. इस बार IMD ने पहले 26 मई का अनुमान लगाया था, लेकिन मॉनसून समय पर नहीं पहुंचा. बता दें कि 29 मई को मौसम विभाग (IMD) ने कहा था कि भारत में अगले हफ्ते मॉनसून आ सकता है. अब आधिकारिक रूप से 4 जून का समय तय किया गया है.
इस साल कम बारिश का अनुमान
IMD ने पिछले हफ्ते संशोधित पूर्वानुमान में कहा है कि इस मॉनसून सीजन में देशभर में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. भारत को इस साल लंबी अवधि के औसत (LPA) की सिर्फ 90 प्रतिशत ही बारिश मिलने की उम्मीद है.
LPA क्या है?
यह 1971 से 2020 तक के 50 सालों का औसत है. पूरे भारत में मॉनसून का औसत वर्षा 87 सेंटीमीटर मानी जाती है. अगर 90 प्रतिशत से कम बारिश हुई तो IMD इसे ‘कम’ (Deficient) श्रेणी में रखता है.
मॉनसून की बारिश पर El Nino का असर
इस साल कम बारिश का एक बड़ा कारण El Nino है. IMD के अनुसार, प्रशांत महासागर के भूमध्य रेखीय क्षेत्र में न्यूट्रल स्थिति से El Nino की स्थिति बन रही है.जून में यह कमजोर रहेगा, लेकिन सितंबर तक मध्यम से मजबूत हो सकता है. El Nino की स्थिति भारत में मॉनसून की बारिश को कम कर देती है.
बता दें कि मॉनसून की देरी से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है. अब जब मॉनसून केरल पहुंचेगा तो धीरे-धीरे पूरे देश में इसकी रफ्तार बढ़ेगी. अब 4 जून को केरल में मॉनसून की एंट्री तय मानी जा रही है. इसके बाद मॉनसून तेजी से उत्तर की ओर बढ़ेगा और देश के बाकी हिस्सों को भी गर्मी से राहत मिलेगी.
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