अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार को हैदराबाद हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं. इन बैठकों का मकसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई वार्ता में तय किए गए एजेंडे को आगे बढ़ाना था.
रुबियो के साथ डोभाल और जयशंकर की इस मीटिंग में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद से निपटने और रक्षा सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई. डोभाल ने बातचीत के दौरान आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख साफ किया. डोभाल ने कहा कि आतंकवाद सिर्फ एक विचारधारा नहीं है, बल्कि ये एक पूरा इकोसिस्टम है.
डोभाल ने बताया कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकी नेटवर्क लगातार एक्टिव हैं. इसकी वजह से अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया के पूरे क्षेत्र में आस्थिरता बनी हुई है.
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और जॉइंट डेवलपमेंट पर चर्चा
इस बैठक में भारत की ओर से साफ किया गया कि अब भारत सतर्क नहीं करेगा, बल्कि सीधे कार्रवाई करेगा. इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर भी सहमति बनी. दोनों देशों के बीच ‘आईसेट’ (iCET) के तहत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, जॉइंट डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन पर फोकस रहेगा.
इस बड़े बदलाव के बाद भारत रक्षा क्षेत्र में सिर्फ एक खरीदार बनकर नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका के साथ मिलकर रक्षा तकनीकों का को-क्रिएटर बनेगा.
रुबियो ने पीएम मोदी को दिया न्योता
इससे पहले, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. इस हाई-लेवल मीटिंग में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल भी मौजूद थे. उस दौरान दोनों देशों ने व्यापार, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ग्लोबल सप्लाई चेन, रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर चर्चा की. रुबियो ने राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से पीएम मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण भी दिया है.
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