लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए लाए गए प्रस्ताव पर बुधवार को तीखी बहस हुई. अब गृहमंत्री अमित शाह बहस का जवाब दे रहे हैं. उन्होंने कहा, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना सामान्य घटना नहीं है. यह अफसोसजनक घटना है. स्पीकर किसी एक दल के नहीं होते. इसी दौरान गृहमंत्री ने विपक्ष को चुनौती दी. उन्होंने कहा, आप चाहें तो प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रसताव लाइए. लेकर तो आइए. लेकिन स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ठीक नहींं.
गृहमंत्री ने कांग्रेस पर करारा हमला किया. उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी की ही सरकार थी जब चीन ने अक्साई चिन हड़प लिया. ये लोग डोकलाम के समय चीनी दूतावास में बैठकर मीटिंग कर रहे थे. चीन के साथ कांग्रेस ने एमओयू साइन किया है. नेहरू सरकार में चीन ने अक्साई चिन कब्जाया. गृहमंत्री अमित शाह के जवाब के बाद लोकसभा स्पीकर के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. क्योंकि किसी ने वोटिंग की मांग नहीं की, इसलिए वोटिंंग नहीं कराई गई.
यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने पेश किया था, जिसे 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिला. प्रस्ताव को सदन में पेश करने की अनुमति भाजपा सांसद जगदंबिका पाल, जो उस समय पीठासीन थे, ने दी. उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है और सांसदों से आग्रह किया कि वे चर्चा के दौरान प्रस्ताव के विषय तक ही सीमित रहें.
बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, कुछ लोग इस सदन में ‘माइनस ट्रिपल सी’ (-CCC) के साथ प्रवेश करते हैं. कोई सिविक सेंस (नागरिक समझ) नहीं, कोई कॉमन सेंस (सामान्य समझ) नहीं, और कोई संवैधानिक समझ नहीं. जब हम लोकसभा के सदस्य बने थे, तो हमें बताया गया था कि सदन के अंदर कैसा व्यवहार करना चाहिए. लेकिन एक व्यक्ति इन सभी नियमों को तोड़ता है, और वह है प्रोपेगैंडा (दुष्प्रचार) का नेता। यह ‘FOMO गांधी’ हैं। उन्हें सुर्खियों में न रहने का डर सताता है.
विपक्ष की ओर से कुल 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं. उनका आरोप है कि लोकसभा स्पीकर ने अपने पद की निष्पक्षता बनाए रखने के बजाय कई मामलों में सत्तापक्ष के पक्ष में रुख अपनाया है. मंगलवार को इस प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत होते ही सदन में प्रक्रिया को लेकर तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली. AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन को पहले किसी ऐसे सदस्य का चुनाव करना चाहिए था जो इस बहस की अध्यक्षता करे. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल में से पीठासीन सदस्य का चयन किस आधार पर किया गया. हालांकि, भाजपा नेताओं ने इन आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया. पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने विपक्ष के तर्कों को “निराधार” करार दिया और कहा कि संसदीय प्रक्रिया के तहत ही कार्यवाही चल रही है.
व्यक्तिगत विरोध नहीं – विपक्ष
बहस की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं लाया गया है, बल्कि संसद की गरिमा की रक्षा के लिए लाया गया है. उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव ओम बिरला के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से नहीं है, बल्कि सदन की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है. गोगोई ने अपने भाषण में संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसद की कार्यवाही पर शोध होगा, तो आंकड़े यह दिखाएंगे कि रिजिजू ऐसे संसदीय कार्य मंत्री रहे जिन्होंने विपक्षी सदस्यों को सबसे अधिक बार बीच में रोका. प्रस्ताव में कहा गया है कि लोकसभा स्पीकर ने वह निष्पक्ष रवैया बनाए रखना बंद कर दिया है जो सदन के सभी वर्गों का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है. विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने कई मामलों में विपक्ष के अधिकारों की अनदेखी की और विवादित मुद्दों पर सत्तापक्ष के पक्ष को समर्थन दिया.
अपशब्द का प्रयोग किया और उन्हें रोका नहीं गया: प्रियंका गांधी
राहुल गांधी पर गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा, अविश्वास प्रस्ताव स्पीकर पर था , राहुल जी पर नहीं था … उनके बारे में बोलना चाहिए था. अपशब्द का प्रयोग किया है उन्होंने संसद में और स्पीकर ने उन्हें रोका नहीं.
ध्वनिमत से लोकसभा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव खारिज
स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बुधवार को भी चर्चा हुई, लेकिन गृहमंत्री अमित शाह के जवाब के बाद हंगामा होने लगा. क्योंकि किसी ने वोटिंग की मांग नहीं की, इसलिए वोटिंंग नहीं कराई गई और लोकसभा स्पीकर के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया. इसके साथ ही सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी गई.
राहुल गांधी पर अमित शाह के बयान को लेकर सदन में हंगामा
अमित शाह ने राहुल गांधी पर करारा हमला किया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को पार्टी के उद्देश्यों और प्रचार के लिए अलग-अलग जगहों की यात्रा करनी पड़ती है, लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण, … पर बहस छोड़ दी,चर्चा में शामिल नहीं हुए. शाह ने कहा, 17वीं लोकसभा में राहुल गांधी की उपस्थिति 51% थी, जबकि सदन का औसत 66% था; 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 52% थी, जबकि औसत 80% था. इस पर विपक्ष ने विरोध जताना शुरू कर दिया और गृह मंत्री से माफी की मांग करते हुए ‘माफी मांगो’ के नारे लगाए.
इसीलिए पार्टी छोटी से छोटी होती जा रही… शाह का कांग्रेस पर हमला
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, असंसदीय शब्दों का लिस्ट जबसे सदन अस्तित्व में आया है तब से बनता चला आया है. विपक्ष को संविधान ने अधिकार दिया है लेकिन विशेषाधिकार नहीं दिया है. इसीलिए जनता भी संरक्षण नहीं दे रही है इसीलिए पार्टी छोटी से छोटी होती जा रही है. पीएम के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव लाएं, कोई नहीं रोक सकता. लेकिन लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ जब ये प्रस्ताव लाया गया है तो ये अफ़सोसजनक बात है.
शाह ने कहा, इससे पहले भी तीन स्पीकरों के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया लेकिन वो चेयर पर बैठे रहे एकमात्र स्पीकर ओम बिरला ही थे जो मारल ग्राउंड पर चेयर पर नहीं बैठे. पीएम को हटाना है तो साधारण बहुमत चाहिए और अगर स्पीकर को हटाना है तो एफेक्टिव मेजोरिटी चाहिए. ये संविधान ने स्पीकर की इंपार्टेंस के तहत व्यवस्था दी है.
जो प्रस्ताव लाया गया था उसमें तारीख गलत थी, संकल्प गलत था, दूसरा नोटिस विपक्ष ने लाया ..दूसरे नोटिस में सिर्फ गौरव गोगोई के ओरिजिनल साइन थे, बाकी सदस्यों को साइन फ़ोटो कापी थे ये नियम के विपरीत है ..लोकसभा के नियम से सदन चलेगा न कि किसी पार्टी के नियम से
हाई मारल ग्राउंड यही है हमारे स्पीकर ने दो बार विपक्ष की गलती होने के बावजूद उनके नोटिस को रिजेक्ट नहीं किया ..माइक गिरिराज जी का बंद कर दिया जब वो पप्पू यादव के संबंध में बोल रहे थे ..माइक बंद होना ही चाहिए . विपक्ष खुद के प्रस्ताव के लिए भी गंभीर नहीं है क्योंकि जब उनका प्रस्ताव आना था तो उसे बिखेर देने का काम किया.
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