कतर की जेल में बंद 8 भारतीयों को बड़ी राहत मिली है. कतर की एक अदालत ने 2023 साल खत्म होने से पहले 28 दिसंबर को पूर्व नौसैनिकों की फांसी की सजा पर रोक लगा दी.
इन्हें पिछले साल अगस्त में जासूसी के कथित आरोप में गिरफ्तार किया गया था. भारत सरकार की ओर से इन भारतीयों को हर तरह की कानूनी मदद दी जा रही है.
इस फैसले को भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि इसी महीने की शुरुआत में पीएम नरेंद्र मोदी और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी की दुबई में मुलाकात हुई थी. लेकिन क्या आप जानते हैं ऐसे कितने और भारतीय हैं जो दुनियाभर के देशों की जेल में बंद हैं, भारत सरकार उनकी किस तरह से मदद करती है?
विदेशों में रह रहे भारतीय
तीन करोड़ से ज्यादा भारतीय इस समय विदेशों में बसे हुए हैं. इनको आमतौर पर ‘प्रवासी भारतीय’ कहा जाता है. विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 210 देशों में 3 करोड़ 22 लाख 85 हजार 425 भारतीय विदेशों में रह रहे हैं.
इनमें से 1 करोड़ 36 लाख 1 हजार 780 लोग अनिवासी भारतीय (NRI) हैं. यानी कि ऐसे भारतीय नागरिक जो व्यापार, नौकरी, पढ़ाई या किसी भी वजह से विदेशों में रह रहे हैं, जिनके पास भारतीय पासपोर्ट है.
वहीं 1 करोड़ 86 लाख 83 हजार 645 लोग PIO हैं. यानी ऐसे लोग जो भारतीय मूल के तो हैं मगर अब उन्होंने दूसरे देश की नागरिकता ले ली है. उनके पास विदेशी पासपोर्ट होता है.
आंकड़ों से पता चलता है कि अमेरिका में सबसे ज्यादा 44 लाख 60 हजार भारतीय बसे हुए हैं लेकिन संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में 34.19 लाख से ज्यादा निवासियों के साथ NRI की संख्या सबसे ज्यादा है. अमेरिका में 44 लाख भारतीयों में महज 12.80 लाख लोग ही एनआरआई हैं, 31.80 लाख ने अमेरिकी नागरिकता ले ली है.
दुनिया में अनिवासी भारतीय (NRI) वाले टॉप-10 देश: यूएई, सऊदी अरब, अमेरिका, कुवैत, ओमान, कतर, नेपाल, यूके, सिंगापुर, बेहरीन
दुनिया में भारतीय मूल (PIO) वाले टॉप-10 देश: अमेरिका, मलेशिया, म्यांमार, श्रीलंका, कनाडा, साउथ अफ्रीका, यूके, मॉरीशस, ट्रिनिडाड एंड टोबैगो, फिजी.
गैर कानूनी तरीके से विदेश जाने वाले भारतीय
यूएस कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन ने अपनी रिपोर्ट में बताया, अक्टूबर 2022 से सितंबर 2023 के बीच अमेरिका में गैर कानूनी तरीके से एंट्री करते समय रिकॉर्ड तोड़ 96,917 भारतीयों को पकड़ा गया है.
साल 2019-20 की तुलना में ये आंकड़ा पांच गुना ज्यादा है. एजेंसी का अनुमान है कि पकड़े गए व्यक्ति के साथ कम से कम अन्य लोग हो सकते हैं जिन्होंने सफलतापूर्वक अमेरिका में घुसपैठ की है.
96,917 भारतीयों में से 30,010 को कनाडा बॉर्डर पर और 41,770 को मैक्सिको की सीमा पर पकड़ा गया. एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, ये ज्यादातर पंजाब और गुजरात के लोग हैं जो अमेरिका में बसने की महत्वाकांक्षा रखते हैं. चिंता की बात यह है कि 730 अकेले बच्चों को भी हिरासत में लिया गया है.
कतर की जेलों में तीसरी सबसे बड़ी आबादी
विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इस वक्त 90 देशों की जेलों में 9521 प्रवासी भारतीय कैद हैं. 62 फीसदी से ज्यादा लोग मध्य पूर्व की जेलों में हैं और उसके बाद एशिया में हैं. भारतीय कैदियों की तीसरी बड़ी आबादी कतर में है. सबसे ज्यादा भारतीय कैदी 2200 सऊदी अरब में बंद हैं. इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात में 2143, कतर में 752, कुवैत में 410, बहरीन में 310 भारतीय कैदी हैं.
क्या होता है जब किसी भारतीय को विदेश में कैद कर लिया जाता है?
जब किसी भारतीय को विदेश में कैद कर लिया जाता है, तो उसपर उस देश के कानूनों के अनुसार मुकदमा चलाया जाता है. अगर उसे दोषी ठहराया जाता है तो सजा सुनाई जाती है, जो जेल की सजा, जुर्माना और यहां तक कि फांसी भी दी जा सकती है.
भारतीय सरकार विदेश में कैद भारतीय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.
विदेशों में भारतीय मिशन और विदेश मंत्रालय भारतीय नागरिकों को जेल भेजे जाने की घटनाओं पर बारीकी से नजर रखते हैं. जैसे ही किसी नागरिक की हिरासत या गिरफ्तारी की जानकारी मिलती है, तुरंत स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया जाता है.
भारत सरकार विदेश में भारतीय नागरिकों को हर तरीके से कानूनी सहायता प्रदान करती है और उनकी रिहाई की कोशिश करती है.
सबसे पहले विदेश मंत्रालय के अधिकारी मामले के तथ्यों का पता लगाते हैं और भारतीय नागरिकता की पुष्टि करते हैं. इसके बाद भारत सरकार के कॉन्सुलर सेवाएं उसकी मदद करती हैं. भारतीय दूतावास आरोपी को एक वकील नियुक्त करने में मदद करते हैं.
वकील आरोपी की ओर से मुकदमा लड़ता है और उसे कानूनी सलाह देता है. दूतावास की ओर दी जाने वाली सुविधाओं के लिए कोई फीस नहीं ली जाती है.
इसमें कानूनी सहायता के लिए वित्तीय सहायता के साथ-साथ भारत वापसी के लिए जरूरी कागज और हवाई टिकट भी शामिल हैं.
यही नहीं, भारत सरकार दोषी भारतीय नागरिकों की रिहाई के लिए भी राजनयिक स्तर पर बातचीत कर सकती है. भारत सरकार गैर-दोषी भारतीय नागरिकों की रिहाई के लिए मानवीय आधार पर भी बातचीत कर सकती है.
उदाहरण के लिए- 2023 में संयुक्त अरब अमीरात में एक भारतीय नागरिक को ड्रग्स की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. भारत सरकार ने संयुक्त अरब अमीरात सरकार से उसकी रिहाई के लिए बातचीत की और आखिरकार उसे रिहा कर दिया गया.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में एक सवाल के जवाब बताया था कि साल 2014 के बाद से अलग-अलग माध्यम से 4597 भारतीय नागरिकों को विदेशी सरकारों द्वारा दी गई सजा को माफ या कम कराया जा चुका है.
हर महीने कितने भारतीयों की विदेश में मौत?
मुंबई स्थित आरटीआई एक्टिविस्ट जतिन देसाई की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय ने बताया, जनवरी 2018 से मई 2019 के बीच 17 महीनों में अलग-अलग देशों में 12,223 भारतीय नागरिकों की मौत हुई है. यानी कि हर महीने 719 और हर दिन 23-24 भारतीय विदेशों में मौत की नींद सो गए. ये आंकड़ा चौंकाने वाला है.
वहीं केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन ने राज्यसभा में बताया है कि साल 2018 से 2023 तक अलग-अलग कारणों से कम से कम 403 भारतीय छात्रों की विदेश में मौत हुई है. 34 देशों में से सबसे ज्यादा मौतें कनाडा में हुईं. आंकड़ों के अनुसार, कनाडा ने 2018 से 91 भारतीय छात्रों की मौत की जानकारी दी है. इसके बाद यूके (48), रूस (40), अमेरिका (36), ऑस्ट्रेलिया (35), यूक्रेन (21), जर्मनी का स्थान है.
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