पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से तनाव और सीमा विवाद चल रहा है. पाकिस्तान ने काबुल पर एयरस्ट्राइक की जिसमें 400 लोग मारे गए. अब अफगानिस्तान पाकिस्तान की तीन ऐसी लाइफलाइन को रोक दे तो पाकिस्तान की पूरी अर्थव्यवस्था, एनर्जी सेक्टर और व्यापार बुरी तरह चरमरा सकता है.
वह जीवन रेखा है TAPI गैस पाइपलाइन, CASA-1000 बिजली परियोजना और अफगानिस्तान से गुजरने वाला मध्य एशिया ट्रेड कॉरिडोर. इनमें से कोई भी एक चीज अफगानिस्तान टारगेट कर दे तो पाकिस्तान की हालत खराब हो जाएगी.
TAPI गैस पाइपलाइन: पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा की सबसे बड़ी उम्मीद
TAPI (तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत) गैस पाइपलाइन पाकिस्तान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. यह पाइपलाइन अफगानिस्तान के रास्ते गुजरती है. पाकिस्तान को सस्ती प्राकृतिक गैस देगी. पाकिस्तान पहले से ही गैस की भारी कमी से जूझ रहा है. हर साल अरबों डॉलर का आयात करता है.
TAPI से पाकिस्तान को सालाना 3.5 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस मिलने वाली थी, जो उसकी ऊर्जा जरूरतों को काफी हद तक पूरा कर सकती थी. अगर अफगानिस्तान इस पाइपलाइन को रोक दे, हमला कर दे या निर्माण नहीं होने दे तो पाकिस्तान का संकट और गहरा हो जाएगा. बिजली प्लांट बंद हो सकते हैं. उद्योग ठप पड़ सकते हैं. आम लोगों को महंगी गैस और बिजली का सामना करना पड़ेगा.
CASA-1000 बिजली परियोजना: सस्ती बिजली का रास्ता
CASA-1000 (सेंट्रल एशिया साउथ एशिया) परियोजना ताजिकिस्तान और किर्गिज़स्तान से अफगानिस्तान होते हुए पाकिस्तान तक 1300 मेगावाट सस्ती बिजली लाएगी. यह परियोजना भी अफगानिस्तान के इलाके से गुजरती है. पाकिस्तान की बिजली की भारी मांग को देखते हुए यह परियोजना उसकी जीवन रेखा बन सकती है.
अगर अफगानिस्तान इस परियोजना को बाधित कर दे या सुरक्षा की वजह से रोक दे तो पाकिस्तान को महंगी बिजली खरीदनी पड़ेगी. इससे औद्योगिक उत्पादन प्रभावित होगा. बिजली बिल बढ़ेंगे. इकोनॉमी पर बोझ बढ़ेगा.
मध्य एशिया ट्रेड कॉरिडोर: निर्यात का मुख्य रास्ता
अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान मध्य एशिया के बाजारों तक पहुंचता है. तोरखम और चमन बॉर्डर से गुजरने वाला यह ट्रेड कॉरिडोर पाकिस्तान के निर्यात का बहुत बड़ा हिस्सा है. अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान सेंट्रल एशिया को चीनी, सीमेंट, चीनी और अन्य सामान भेजता है.
अगर अफगानिस्तान सीमा बंद कर दे, हमला कर दे या ट्रक काफिलों को रोक दे तो पाकिस्तान का निर्यात रुक जाएगा. इससे विदेशी मुद्रा की आमदनी घटेगी, उद्योग प्रभावित होंगे और अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगेगा.
खतरा क्यों इतना बड़ा है?
अफगानिस्तान में तालिबान सरकार है. पाकिस्तान के साथ उसके संबंध अच्छे नहीं हैं. तालिबान TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) को समर्थन देता है. अगर अफगानिस्तान इन परियोजनाओं को सुरक्षा की आड़ में रोक दे या बलूच या तालिबान समर्थित गुटों से हमला करवाए तो पाकिस्तान की हालत खराब हो जाएगी.
पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट, महंगाई और ऊर्जा कमी से जूझ रहा है. इन जीवन रेखाओं के रुकने से स्थिति और बिगड़ सकती है. पाकिस्तान की सबसे बड़ी कमजोरी अफगानिस्तान से गुजरने वाली ये परियोजनाएं और ट्रेड रूट हैं. अफगानिस्तान इन्हें टारगेट करके पाकिस्तान पर बिना सीधे युद्ध के भारी दबाव बना सकता है.
पाकिस्तान को इन परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए अफगानिस्तान के साथ अच्छे संबंध रखने पड़ेंगे, वरना उसकी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा दोनों खतरे में पड़ सकती हैं. यह स्थिति दिखाती है कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव कितना महंगा पड़ सकता है.
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