अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक एडिटेड नक्शा पोस्ट किया है. इसमें अमेरिकी झंडा कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला के इलाकों पर दिखाया गया है. ट्रंप ने पहले भी कई बार मजाक में या गंभीरता से कहा है कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बन जाना चाहिए. यह पोस्ट 20 जनवरी 2026 को आया, जिसके बाद कनाडा में काफी गुस्सा और चिंता है.
कनाडा की सरकार और लोग इसे मजाक नहीं मान रहे. कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पहले ही ट्रंप के ऐसे बयानों को सिरे से खारिज कर दिया था. उन्होंने कहा था कि इच्छाओं और हकीकत में फर्क समझना जरूरी है. लेकिन सवाल यह है — अगर ट्रंप की तरफ से कोई असली दबाव या खतरा आया, तो कनाडा कैसे विरोध करेगा? क्या उसकी सेना अमेरिका से मुकाबला कर पाएगी?
कनाडा विरोध कैसे कर सकता है?
कनाडा अमेरिका से सीधे सैन्य लड़ाई नहीं लड़ सकता, क्योंकि दोनों देश NATO (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) के सदस्य हैं. NATO का नियम है कि एक सदस्य पर हमला हुआ तो सभी सदस्य मिलकर उसकी रक्षा करेंगे. लेकिन अगर अमेरिका ही हमलावर हो, तो यह नियम टूट सकता है. बहुत बड़ा संकट पैदा हो सकता है.
फिलहाल कनाडा के विरोध के तरीके ये हो सकते हैं…
• कूटनीतिक विरोध – कनाडा संयुक्त राष्ट्र, NATO और G7 जैसे मंचों पर अमेरिका के खिलाफ आवाज उठा सकता है.
• आर्थिक कदम – व्यापार पर रोक, टैरिफ बढ़ाना या अमेरिकी सामान का बहिष्कार.
• अंतरराष्ट्रीय मदद – ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी जैसे सहयोगी देशों से समर्थन मांगना.
• घरेलू एकता – कनाडाई लोग और प्रांत (जैसे क्यूबेक, ओंटारियो) एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं.
लेकिन सैन्य रूप से मुकाबला करना बहुत मुश्किल है. आइए दोनों देशों की सेनाओं की तुलना देखें…
ग्लोबल रैंकिंग और पावर इंडेक्स
Global Firepower के 2025 रैंकिंग में अमेरिका दुनिया में नंबर 1 स्थान पर है, जिसका Power Index स्कोर 0.0744 है (जितना कम स्कोर, उतनी ज्यादा ताकत). वहीं कनाडा 145 देशों में 28वें स्थान पर है. इसका Power Index स्कोर 0.5179 है. यह दिखाता है कि अमेरिका की सैन्य क्षमता कनाडा से बहुत ज्यादा मजबूत है. दोनों के बीच का अंतर काफी बड़ा है.
एक्टिव और रिजर्व सैनिकों की संख्या
अमेरिका के पास लगभग 13,28,000 एक्टिव सैनिक हैं, जबकि कनाडा के पास सिर्फ लगभग 68,000 एक्टिव सैनिक हैं. इसका मतलब है कि अमेरिका के एक्टिव सैनिक कनाडा से करीब 20 गुना ज्यादा हैं। रिजर्व सैनिकों में भी अंतर बहुत है — अमेरिका के पास लगभग 7,99,500 रिजर्व हैं, जबकि कनाडा के पास सिर्फ लगभग 27,000. कुल मिलिट्री पर्सनल (एक्टिव + रिजर्व) की बात करें तो अमेरिका के पास 20 लाख से ज्यादा हैं, जबकि कनाडा के पास 1 लाख के आसपास ही हैं.
टैंक और बख्तरबंद वाहन
जमीन पर लड़ाई के लिए टैंक बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. अमेरिका के पास हजारों टैंक हैं (सटीक संख्या गुप्त रखी जाती है, लेकिन बहुत बड़ी संख्या में). कनाडा के पास सिर्फ 74 टैंक हैं. बख्तरबंद वाहनों (जैसे आर्मर्ड कार, ट्रांसपोर्ट वाहन) में भी अमेरिका बहुत आगे है — उसके पास लाखों की संख्या में ऐसे वाहन हैं, जबकि कनाडा के पास 21,700 से ज्यादा हैं. यह अंतर अमेरिका को जमीन पर कहीं भी तेज और मजबूत हमला करने की क्षमता देता है.
हवाई ताकत (फाइटर जेट और कुल एयरक्राफ्ट)
हवाई ताकत में अमेरिका का दबदबा है. उसके पास हजारों फाइटर जेट और अन्य एयरक्राफ्ट हैं, जैसे F-35, F-22 जैसे एडवांस्ड लड़ाकू विमान. कुल मिलाकर अमेरिका के पास हजारों एयरक्राफ्ट हैं. कनाडा के पास कुल 351 एयरक्राफ्ट हैं, जिनमें से सिर्फ 66 फाइटर जेट हैं. यह अंतर दिखाता है कि हवा में अमेरिका आसानी से कंट्रोल कर सकता है.
नौसेना की ताकत
समुद्र में अमेरिका की नौसेना दुनिया की सबसे बड़ी और मजबूत है. उसके पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं (जो बड़े जहाज हैं जो फाइटर जेट ले जा सकते हैं), साथ ही सैकड़ों अन्य युद्धपोत और पनडुब्बियां हैं. कनाडा की नौसेना छोटी है — उसके पास कुल 66 जहाज हैं, जिनमें 4 पनडुब्बियां शामिल हैं, लेकिन कोई एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है. अमेरिका की नौसेना वैश्विक स्तर पर कहीं भी ऑपरेशन कर सकती है, जबकि कनाडा मुख्य रूप से अपनी सीमाओं और आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा पर फोकस करता है.
डिफेंस बजट
सैन्य खर्च में भी बड़ा फर्क है. अमेरिका का डिफेंस बजट दुनिया का सबसे बड़ा है — लगभग 895 बिलियन डॉलर (करीब 800+ बिलियन डॉलर से ज्यादा). कनाडा का डिफेंस बजट लगभग 41 बिलियन डॉलर है (कुछ स्रोतों में 30-35 बिलियन के आसपास बताया जाता है, लेकिन 2025 में बढ़ोतरी के साथ 41 बिलियन तक पहुंचा). इसका मतलब अमेरिका का बजट कनाडा से 20-25 गुना ज्यादा है, जो उसे नई तकनीक, हथियार और ट्रेनिंग में बहुत फायदा देता है.
अमेरिका की सेना दुनिया की सबसे ताकतवर है. उसके पास न्यूक्लियर हथियार, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, स्पेस फोर्स और वैश्विक बेस हैं. कनाडा की सेना छोटी लेकिन आधुनिक है. यह मुख्य रूप से शांति मिशन, आर्कटिक सुरक्षा और NATO में मदद के लिए बनी है. कनाडा की सेना अमेरिका के साथ NORAD (उत्तर अमेरिकी एयरोस्पेस डिफेंस) में मिलकर काम करती है, यानी दोनों की रक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है.
क्या कनाडा ट्रंप से बच पाएगा?
सच्चाई यह है कि सैन्य रूप से कनाडा अकेले अमेरिका से नहीं लड़ सकता. अगर कोई सैन्य संघर्ष हुआ, तो कनाडा हार जाएगा. लेकिन वास्तविकता में ऐसा होने की संभावना बहुत कम है.
• दोनों देशों के बीच गहरे आर्थिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक रिश्ते हैं.
• लाखों कनाडाई-अमेरिकी सीमा पार रहते हैं.
• ट्रंप के ज्यादातर बयान और पोस्ट मजाक, दबाव या ट्रेड वार के लिए होते हैं, न कि असली युद्ध के लिए.
• अंतरराष्ट्रीय कानून और NATO जैसे संगठन बड़े युद्ध को रोकते हैं.
कनाडा की असली ताकत उसकी कूटनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय दोस्ती में है, न कि सेना में. ट्रंप के इस नक्शे से कनाडा में राष्ट्रवाद बढ़ सकता है और लोग ज्यादा एकजुट हो सकते हैं.
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