क्या दुबई ड्रोन और मिसाइल हमलों का नुकसान छिपा रहा है? विदेशी लगा रहे हैं आरोप

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच दुबई को लेकर कई नए दावे सामने आए हैं. कुछ ब्रिटिश नागरिकों का आरोप है कि ईरानी मिसाइल हमलों को लेकर जो आधिकारिक जानकारी दी जा रही है, वह जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती. उनका कहना है कि सरकार की ओर से जारी बयान और वास्तविक स्थिति में फर्क दिखाई देता है.

सोशल मीडिया पर सख्त नियम

ब्रिटिश अखबार द मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक दुबई में युद्ध से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करने को लेकर कड़े नियम लागू हैं. इंफ्लुएंसर और सोशल मीडिया यूजर्स को ईरानी मिसाइल या ड्रोन हमलों से जुड़े वीडियो साझा करने की अनुमति नहीं है.

मानवाधिकार संगठनों ने भी यूएई के साइबर कानूनों को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि इन नियमों के तहत आरोप लगने पर विदेशी नागरिकों को भारी जुर्माना, जेल या निर्वासन का सामना करना पड़ सकता है.

मिसाइलों की वीडियो रिकॉर्डिंग पर गिरफ्तारी

रिपोर्ट्स के अनुसार लंदन के 60 वर्षीय एक व्यक्ति समेत अलग-अलग देशों के 21 लोगों को आसमान में दिखाई दे रही मिसाइलों का वीडियो बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. इन लोगों की मदद ‘Detained in Dubai’ नाम का एक अभियान समूह कर रहा है.
द मिरर की रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार वकील बेन कीथ के हवाले से कहा गया है कि यूएई प्रशासन दुबई को विदेशी पर्यटकों और कामगारों के लिए सुरक्षित दिखाना चाहता है. उनके मुताबिक सरकार नहीं चाहती कि मिसाइल हमलों की तस्वीरें या वीडियो सार्वजनिक रूप से सामने आएं.

पर्यटन पर पड़ सकता है असर

दुबई की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की बड़ी भूमिका है. अनुमान है कि यह क्षेत्र हर साल करीब 30 अरब डॉलर का राजस्व पैदा करता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक हालात को देखते हुए हजारों पर्यटक और विदेशी कामगार क्षेत्र छोड़ चुके हैं.
एक ब्रिटिश नागरिक ने दावा किया कि उसने अपने परिवार के साथ ओमान के रास्ते दुबई छोड़ा. उसके मुताबिक आसमान में मिसाइलें दिखाई दे रही थीं, जबकि सरकारी बयान उससे अलग तस्वीर पेश कर रहे थे.

हमलों से प्रभावित हुई सेवाएं

बताया जा रहा है कि युद्ध के दौरान यूएई की रक्षा प्रणाली ने बड़ी संख्या में मिसाइलों और ड्रोन को रोक लिया. इसके बावजूद कुछ हमलों से बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आईं. एक प्रसिद्ध होटल और कुछ सैन्य प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है.
दो डेटा सेंटर पर हमले के बाद कुछ समय के लिए डिजिटल भुगतान सेवाएं भी प्रभावित हुईं. इस बीच कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को दुबई से बाहर भेजने का फैसला किया.

क्षेत्रीय पर्यटन पर भी असर

इस संघर्ष का असर केवल दुबई तक सीमित नहीं बताया जा रहा. खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों, जैसे कतर और सऊदी अरब के पर्यटन उद्योग पर भी दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
कई पर्यटकों ने बताया कि हमलों की खबरों के बाद बड़ी संख्या में लोग अपनी यात्राएं रद्द कर रहे हैं. इससे स्थानीय टूर गाइड और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों की आय पर असर पड़ रहा है.
ब्रिटेन के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में ब्रिटिश नागरिक मौजूद थे. इनमें से हजारों लोगों को सरकारी और नियमित उड़ानों के जरिए सुरक्षित वापस लाया गया.

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