ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए आर्थिक संकट के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन अब एक व्यापक राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है. शुरूआती विरोध महंगाई, बेरोजगारी और ईरान मुद्रा के गिरते वैल्यू को लेकर था, लेकिन अब यह सीधे इस्लामिक शासन की वैधता को चुनौती दे रहा है.
विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने लगभग 78 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जिनमें 50 प्रदर्शनकारी और 15 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं. हालांकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के अनुसार, इस संख्या से कहीं अधिक मौतें हुई हो सकती हैं. केवल तेहरान के कुछ अस्पतालों में ही एक रात में सैकड़ों घायल और मृतकों के मामले दर्ज हुए हैं.
स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए ईरान सरकार ने 7 जनवरी से देशभर में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं. बावजूद इसके, विरोध तेहरान, तबरेज़, मशहद और कुर्दिश इलाकों समेत 100 से ज्यादा शहरों में फैल चुका है.
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों पर विदेशी ताकतों के साथ पकड़ होने का आरोप लगाया है. वहीं अटॉर्नी जनरल ने चेतावनी दी है कि विरोध में शामिल लोगों को “भगवान का दुश्मन” मानते हुए मौत की सजा दी जा सकती है.
अमेरिका की प्रतिक्रिया ने स्थिति को और जटिल बना दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी जनता की मदद का आश्वासन दिया है, जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है. ईरानी मीडिया ने विदेशी साजिश का आरोप लगाते हुए सैकड़ों गिरफ्तारियों की बात कही है.
अपने बच्चों को दंगाइयों के साथ शामिल न होने दें’, ईरान के राष्ट्रपति की जनता से अपील
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा, ‘हम पूरी तरह दृढ़ हैं और हमने यह फैसला कर लिया है कि आर्थिक समस्याओं का हर संभव तरीके से समाधान किया जाएगा.’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘उन्होंने देश के भीतर और बाहर एक समूह को ट्रेनिंग दी है और बाहर से आतंकियों को देश में लाया गया है, जिन्होंने मस्जिदों में आग लगाई.’ राष्ट्रपति ने कहा, ‘अगर इस देश से जुड़ा कोई व्यक्ति विरोध करता है, तो हम उस विरोध को सुनते हैं, समझते हैं और उसका समाधान करते हैं.’ अमेरिका और इजरायल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘अमेरिका और इजरायल वहां बैठकर इन लोगों को निर्देश दे रहे हैं और कह रहे हैं कि आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं. यही वे लोग हैं जिन्होंने इस देश पर हमला किया, हमारे युवाओं और हमारे बच्चों को मारा, और आज वही इन्हें आदेश दे रहे हैं कि तुम तोड़फोड़ करो, हम पीछे से तुम्हारा समर्थन करेंगे.’ उन्होंने परिवारों से अपील करते हुए कहा, ‘मैं परिवारों से कहना चाहता हूं कि वे अपने छोटे बच्चों को दंगाइयों और आतंकियों के साथ शामिल न होने दें, जो लोगों के सिर काटते हैं और दूसरों की हत्या करते हैं.’
ईरान की खुली चेतावनी, हमला हुआ तो हम अमेरिकी सेना और इज़रायल को बनाएंगे निशाना
ईरान के संसद के स्पीकर ने अमेरिका और इजरायल को खुली चेतावनी दे दी है. स्पीकर का कहना है कि अगर उपर हमला होता है तो उनका लक्ष्य अमेरिकी सैनिक और इजरायल होंगे. यानि कि ईरान का कहना है कि अमेरिका के खिलाफ सैन्य और इजरायल के ठिकानों को लक्ष्य माना जाएगा.
ट्रंप को ईरान की चेतावनी, जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है तेहरान
ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने उस पर हमला किया तो तेहरान इज़रायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करेगा.
नेतन्याहू-रूबियो कॉल के बाद इजरायल हाई अलर्ट मोड में
इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी सांसद मार्क रूबियो ने शनिवार को एक फोन कॉल के दौरान ईरान में अमेरिकी हस्तक्षेप की संभावना पर चर्चा की, ऐसा एक इजरायली अधिकारियों के हवाले से बताया गया है. यह बातचीत इस समय हुई है जब क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वैश्विक चिंता गंभीर हो गई है.
तीन इजरायली सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, इजरायल हाई अलर्ट की स्थिति में है और वे किसी भी संभावित अमेरिकी कार्रवाई के लिए पूरी तरह से तैयार है. इजरायली सुरक्षा अधिकारियों ने कहा है कि वे क्षेत्र की नाजुक स्थिति को देखते हुए हर संभव स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं और अमेरिकी निर्णयों पर कड़ी नजर रख रहे हैं.
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