ईरान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. सरकार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों में पिछले 24 घंटों में कई लोगों की मौत की खबर है. इस बीच, ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से तुरंत दखल देने की अपील की है. देश में सरकार विरोधी प्रदर्शन अब 12वें दिन में पहुंच चुका है और इस दौरन अब तक कुल 62 लोगों के मारे जाने की खबर है.
रिपोर्ट के मुताबिक, रजा पहलवी ने शुक्रवार, 9 जनवरी को एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा,
राष्ट्रपति महोदय, मैं आपसे तुरंत ध्यान देने और मदद करने की अपील करता हूं. कल रात आपने देखा कि लाखों बहादुर ईरानी नागरिक सड़कों पर गोलियों का सामना कर रहे थे. आज हालत और भी खराब है.
पहलवी ने लिखा कि लोग न सिर्फ गोलियों का सामना कर रहे हैं, बल्कि उनका पूरी तरह से संपर्क भी काट दिया गया है. न इंटरनेट चल रहा है, न लैंडलाइन.
ईरान की सड़कों पर इन दिनों रजा पहलवी के पोस्टर दिखाई दे रहे हैं और लोग ‘राजशाही वापस लाओ’ जैसे नारे लगा रहे हैं. रजा पहलवी के पिता को 1979 की इस्लामिक क्रांति में सत्ता से हटा दिया गया था.
इससे पहले, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अपने पहले संबोधन में ट्रंप की कड़ी आलोचना की थी. खामनेई ने कहा,
अमेरिका के राष्ट्रपति पूरी दुनिया को लेकर घमंड से भरी बातें करते हैं, लेकिन उन्हें इतिहास से सीख लेनी चाहिए. फिरौन, निमरूद, मोहम्मद रजा पहलवी जैसे कई तानाशाह अपने घमंड के शिखर पर थे, और तभी उनका पतन हुआ… ट्रंप का भी यही हश्र होगा.
कुछ दिन पहले पहलवी ने एक ट्वीट के जरिए लोगों से खामेनेई सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने की अपील की थी. उन्होंने लोगों से शासन को उखाड़ फेंकने की बात कही थी.
वहीं, जब ट्रंप ने ‘शांतिपूर्ण’ प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को लेकर ईरान को चेतावनी दी, तो पहलवी ने इसके लिए ट्रंप का धन्यवाद भी किया. ट्रंप ने साफ चेतावनी दी थी कि अगर तेहरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिंसक तरीके से मारता है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा.
ट्रंप से होगी पहलवी की मुलाकात?
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी अगले हफ्ते फ्लोरिडा (अमेरिका) में होने वाले एक कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि फिलहाल उनसे मिलने का उनका कोई इरादा नहीं है.
ट्रंप ने कहा कि इस वक्त किसी ईरानी विपक्षी नेता का समर्थन करना ठीक नहीं होगा. उनका मानना है कि पहले ईरान के अंदर चल रहे हालात को समझना और देखना जरूरी है कि वहां से कौन नेता उभरकर सामने आता है.
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