आज पूरे देश में रोशनी का सबसे बड़ा त्योहार दीपावली धूमधाम से मनाया जा रहा है. हर गली, हर घर दीपों की चमक से रोशन हो उठा है. ऐसी मान्यताएं हैं कि इस दिन भगवान राम 14 साल का वनवास काटकर अयोध्या वापस लौटे थे. तब उनके स्वागत में नगरवासियों ने अयोध्या को दीपों से सजाया था. ऐसा भी कहा जाता है कि दिवाली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण के लिए निकलती हैं और अपने भक्तों को सुख, शांति, समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. आइए जानते हैं कि इस साल दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है.

मां लक्ष्मी की महिमा
मां लक्ष्मी धन और संपत्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं. ऐसा माना जाता है कि उनका जन्म क्षीर सागर से हुआ था और बाद में उन्होंने भगवान विष्णु से विवाह किया. मां लक्ष्मी की आराधना से धन, समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है. यदि मां लक्ष्मी किसी से प्रसन्न हो जाएं तो उसके जीवन में धनधान्य और खुशियों का अंबार लगा देती हैं. ज्योतिषशास्त्र में उनका संबंध शुक्र ग्रह से माना गया है.
दिवाली पूजा के 3 शुभ मुहूर्त
आज दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए तीन विशेष मुहूर्त बन रहे हैं. पहला मुहूर्त प्रदोष काल है, जो कि शाम 5 बजकर 46 मिनट से रात 8 बजकर 18 मिनट तक रहेगा. दूसरा शुभ मुहूर्त वृषभ काल का है, जो शाम 7 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 3 मिनट तक रहेगा. वहीं तीसरा और सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त शाम 7 बजकर 8 मिनट से रात 8 बजकर 18 मिनट तक का रहेगा. इस दौरान लक्ष्मी पूजा के लिए 1 घंटा 11 मिनट का समय मिलेगा.
दिवाली की पूजन सामग्री
दिवाली पूजा के लिए लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा, कलश, चांदी का सिक्का, मिट्टी के दीये, लकड़ी की चौकी, गंगाजल, घी, शक्कर, पंच मेवा, दूर्वा, अगरबत्ती, कपूर, धूप, खील-बताशे, नारियल, कुमकुम, कलावा, तुलसी दल, इत्र, कलावा, छोटी इलायची, लौंग, सरसों का तेल, गुलाब या कमल के फूल, रूई, चंदन, लाल कपड़ा व कुबेर यंत्र आदि.
दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा विधि
दिवाली पूजन के लिए सबसे पहले घर के ईशान कोण या उत्तर-पूर्व दिशा की अच्छी तरह सफाई करें. इसके बाद वहां लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं. इसके बाद गंगाजल से मूर्तियों का स्नान कराएं और चौकी पर स्थापित करें. लक्ष्मी जी को दाहिनी ओर और गणेश जी को बाईं ओर स्थान दें. भगवान के सामने एक घी या तेल का दीपक जलाएं. इसके बाद भक्ति भाव के साथ एक-एक करके सभी पूजा सामग्री चढ़ाएं.
सबसे पहले लक्ष्मी-गणेश को कमल या गुलाब के फूल और इत्र अर्पित करें. लक्ष्मी-गणेश को लाल फूल, कमल, चावल, इत्र, फल और मिठाई अर्पित करें. चूंकि मां लक्ष्मी को खील और बताशे अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए इन्हें अवश्य चढ़ाएं. इसके बाद माता लक्ष्मी और गणेश जी के मंत्रों का जाप करें, उनकी आरती उतारें. आखिर में मां लक्ष्मी से हाथ जोड़कर धनधान्य और सुख-समृद्धि की कामना करें.
पूजा के बाद घर के विभिन्न हिस्सों में दीपक जलाएं. ये दीपक मां लक्ष्मी के स्वागत और सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए जलाए जाते हैं. इस दिन घर के मुख्य द्वार, आंगन, नल के पास, उत्तर दिशा और घर के अंधेरे हिस्सों में दीपक जलाना न भूलें. मां लक्ष्मी के सामने जो मुख्य दीपक जलाया था, उसे पूरी रात प्रज्वलित रहने दें. इस दीपक को बुझने न दें.
मां लक्ष्मी की पूजा के नियम और सावधानियां
मां लक्ष्मी की पूजा करते समय श्वेत या गुलाबी वस्त्र धारण न करें. लक्ष्मी जी की उस प्रतिमा की आराधना करें, जिसमें वे कमल के पुष्प पर विराजमान हों. और उनके हाथों से धन की वर्षा हो रही हो. इस दिन घर में तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल न करें. घर में शुद्धता का विशेष ध्यान रखें. मुख्य द्वार पर आए लोगों का अपमान न करें.
मां लक्ष्मी के चमत्कारी मंत्र
महालक्ष्मी मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नमः॥
बीज मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय चिंतायै दूरय दूरय स्वाहा॥
कुबेर अष्टलक्ष्मी मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥
मां लक्ष्मी की आरती
ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। मैया सुख सम्पत्ति दाता॥
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता। मैया तुम ही शुभदाता॥
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। मैया सब सद्गुण आता॥
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। मैया वस्त्र न कोई पाता॥
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता। मैया क्षीरोदधि-जाता॥
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता। मैया जो कोई जन गाता॥
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। ऊं जय लक्ष्मी माता।।
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