मतदाताओं के पते में जीरो नंबर क्यों, राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग; वजह भी बताई

मतदाताओ के पते में जीरो नंबर क्यों है, चुनाव आयोग ने इस पर राहुल गांधी को जवाब दे दिया है। चुनाव आयोग ने कहा कि मकान नंबर ‘जीरो’ का मतलब फर्जी मतदाता नहीं। रविवार को प्रेस कांफ्रेंस में आयोग ने कहा कि देश में ऐसे करोड़ों वोटर्स हैं, जिनके पते में जीरो नंबर है। उन्होंने कहा कि हर पंचायत में मकान नंबर नहीं होता है। उन्होंने कहा कि वोटर बनने के लिए मकान होना जरूरी नहीं होता। मुख्य चुनाव आयुक्त ने ज्ञानेश कुमार ने कहा कि तमाम वोटर्स हैं जो सड़कों पर सोते हैं। इन सभी के पते में मकान नंबर जीरो ही हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों राहुल गांधी ने यह सवाल उठाया था। राहुल गांधी ने मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि मकान नंबर जीरो होने और पिता का नाम एक्सवाईजेड है।राहुल गांधी के लिए डेडलाइनइसके अलावा चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के लिए डेडलाइन भी तय कर दी है। आयोग ने कहा कि यदि सात दिन के भीतर हलफनामा नहीं दिया गया तो दावों को निराधार और अमान्य माना जाएगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिना किसी सबूत के किसी भी मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। निर्वाचन आयोग हर मतदाता के साथ चट्टान की तरह खड़ा है। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध करना एक साझा जिम्मेदारी है, लेकिन बिहार में चूंकि हमारे बूथ लेवल अधिकारियों ने बूथ लेवल एजेंटों और राजनीतिक दलों के साथ मिलकर काम किया… शायद इसीलिए 1 अगस्त के बाद से किसी भी राजनीतिक दल ने एक भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई है।

राजनीतिक दलों से आह्वानमुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इसके दो ही मतलब हो सकते हैं – क्या मसौदा सूची पूरी तरह से सही है? जिसे चुनाव आयोग नहीं मानता, चुनाव आयोग कह रहा है कि इसमें गलतियां हो सकती हैं, इसे शुद्ध करते हैं, अभी 15 दिन बाकी हैं, अगर 1 सितंबर के बाद भी उसी तरह के आरोप लगने शुरू हुए, तो कौन ज़िम्मेदार है? हर मान्यता प्राप्त पार्टी के पास अभी 15 दिन बाकी हैं… मैं सभी राजनीतिक दलों से आह्वान करता हूं कि 1 सितंबर से पहले इसमें त्रुटियां बताएं चुनाव आयोग उन्हें सुधारने के लिए तैयार है।

चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि या तो हलफनामा देना होगा या देश से माफी मांगनी होगी। कोई तीसरा विकल्प नहीं है। अगर 7 दिनों के अंदर हलफनामा नहीं मिलता है तो इसका मतलब है कि ये सभी आरोप बेबुनियाद हैं।

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