ऑपरेशन सिंदूर पर राज्यसभा में दो दिनों (16 घंटे तक) से चल रही चर्चा पर सरकार की तरफ से जवाब देने के लिए आज (30 जुलाई,बुधवार को) जैसे ही केंद्रीय गृह मंत्री खड़े हुए तो विपक्षी सांसद हंगामा करने लगे और सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब देने की मांग करने लगे। विपक्षी सदस्यों ने इस बात को लेकर हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक सदन में जवाब दिया तो वह उच्च सदन में जवाब देने के लिए क्यों नहीं आये? इस पर गृह मंत्री शाह ने विपक्षी कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि मेरे से ही निपट लीजिए, काहे को प्रधानमंत्री जी को बुला रहे हो?
शाह ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री जी को बुलाओगे तो और तकलीफ होगी, क्या अभी तक मन नहीं भरा है, जो उन्हें बुलाना चाहते हो। इस पर भी जब हंगामा होता रहा तो उपसभापति ने विपक्षी सांसदों और विपक्ष के नेता मल्विकार्जुन खड़गे को रोका और इस तरह के बर्ताव पर आपत्ति जताई। खड़गे ने कहा कि यह तय हुआ था कि प्रदानमंत्री सदन में जवाब देंगे लेकिन वह नहीं आए।
उपसभापति हरिवंश ने कहा कि बिजनेस एडवायजरी कमेटी की बैठक में प्रधानमंत्री के आने पर कोई सहमति नहीं बनी थी। इसी बीच, शाह ने कहा कि इतने सालों तक आतंकवाद को रोकने के लिए इन्होंने कुछ नहीं किया, इसलिए ये डिबेट सुनना नहीं चाह रहे। शाह ने आरोप लगाया कि ज्यादातर मौकों पर कांग्रेस पार्टी अपने विपक्ष के नेता को बोलने नहीं देती, लेकिन वही विपक्ष के नेता खड़गे साहब इस समय मांग कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री जी को जवाब देना चाहिए। जब विपक्ष की मांग नहीं सुनी गई तो विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
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