संजय कपूर की 30,000 करोड़ की विरासत पर विवाद, करिश्मा कपूर की पूर्व सास ने ठोका दावा

बॉलीवुड एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के पूर्व पति संजय कपूर के निधन के बाद से उनकी विरासत को लेकर विवाद चल रहा है. संजय एक बड़े उद्योगपति थे. वो बीएलडब्ल्यू प्रिसिजन फोर्जिंग्स (Sona Comstar) के चेयरमैन थे. जून महीने में उनकी मौत हो गई. उनकी मां रानी कपूर ने कंपनी के स्टेकहोल्डर्स को एक पत्र लिखा है. उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी पारिवारिक विरासत को हड़पने की कोशिश की जा रही है. इसकी वैल्यू लगभग 30,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

25 जुलाई को कंपनी की सालाना आम बैठक (AGM) हुई. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 24 जुलाई को रानी कपूर ने पत्र में लिखा,
अचानक बेटे की मौत के बाद उसके खड़े किए गए ग्रुप को प्रभावित करने वाले सभी तरह के फैसलों से मुझे जानबूझकर बाहर रखा गया है, जबकि मैं अपने पति की पंजीकृत वसीयत की एकमात्र लाभार्थी हूं और मैजोरिटी शेयरहोल्डर भी.

उन्होंने दावा किया कि भावनात्मक संकट की स्थिति में उन्हें डॉक्युमेंट्स पर साइन करने के लिए मजबूर किया गया. ये दस्तखत बंद दरवाजों के पीछे कराए गए. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कंपनी के अकाउंट्स की जानकारी नहीं दी गई. 

रानी कपूर के आरोपों पर कंपनी ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बयान जारी कर कहा है कि सभी फैसले कॉर्पोरेट कानून और रेग्युलेटरी डेडलाइन के मुताबिक लिए गए हैं. कंपनी ने साफ कहा है कि रानी कपूर उनके रिकॉर्ड में शेयरधारक के रूप में लिस्टेड नहीं हैं. इसलिए कंपनी बोर्ड के मामलों में उनसे सलाह लेने के लिए बाध्य नहीं है. 

उन्होंने आगे कहा कि संजय कपूर के निधन के बाद कंपनी ने उनकी मां से कोई दस्तावेज नहीं लिए हैं और न ही साइन कराए गए हैं. 
सोना कॉमस्टार ने कहा कि 25 जुलाई की बैठक में एक नए बोर्ड मेंबर की नियुक्ति की गई है. कंपनी ने बताया कि संजय कपूर की विधवा प्रिया सचदेव कपूर को कंपनी के प्रमोटर ‘ऑरियस इन्वेस्टमेंट्स’ के नॉमिनेशन के आधार पर गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में शामिल किया गया है.
संजय कपूर की मां ने मांग की थी कि इस बैठक को आयोजित न किया जाए. इस पर कंपनी ने कहा उन्हें रानी कपूर की चिट्ठी 24 जुलाई की देर रात को मिली थी. कानूनी सलाह लेने के बाद कंपनी ने तय किया कि इस बैठक को स्थगित करने का कोई कारण नहीं है.
2016 में करिश्मा कपूर से तलाक के बाद संजय ने 2017 में मॉडल प्रिया सचदेव से शादी की थी.

विवाद पर एक्सपर्ट की राय क्या है?

सीनियर कॉर्पोरेट और उत्तराधिकार वकील, दिनकर शर्मा की मानें, तो भारतीय कानून के तहत शेयरधारक की मृत्यु के बाद नॉमिनेट लोग शेयरों के अंतिम मालिक नहीं होते. नामित व्यक्ति केवल शेयरों का संरक्षक या ट्रस्टी होता है, जो शेयरों को अस्थायी रूप से तब तक अपने पास रख सकता है जब तक कि कानूनी उत्तराधिकारी या लाभार्थी एक वैध वसीयत के तहत शेयरों पर अपना अधिकार स्थापित नहीं कर लेते.
उन्होंने रानी कपूर को लेकर ये भी कहा कि अब उनका अगला कदम अपने दिवंगत पति की वसीयत की प्रोबेट प्रक्रिया प्राप्त करना हो सकता है. ये एक अदालती प्रक्रिया है जो वसीयत की प्रामाणिकता स्थापित करती है. अगर ये परमिशन मिलती है, तो उन्हें शेयरों पर औपचारिक रूप से मालिकाना हक का दावा करने और अंतरिम अवधि में कंपनी के लिए गए निर्णयों को चुनौती देने का अधिकार मिल जाएगा.

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