कांवड़ियों को बदनाम करने के लिए हो रहा मीडिया ट्रायल, क्यों बरसे सीएम योगी?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाकर कांवड़ यात्रियों को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। कांवड़ियों को उपद्रवी और आतंकवादी तक कहने का दुस्साहस कर रहे हैं। यह ऐसी मानसिकता है जो हर जगह भारत की विरासत का अपमान करना चाहती है। सीएम योगी का इशारा सोशल मीडिया पर चल रहे कांवड़ियों के उन वीडियो की तरफ था जिसमें ढाबा, स्कूल बस, कार, बाइक आदि में तोड़फोड़ करते कांवड़िया दिखाई दे रहे हैं। इस तरह के वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। सीएम योगी ने इन वीडियो को मीडिया ट्रायल भी बताया।

वाराणसी में जनजातीय गौरव बिरसा मुंडा पर आधारित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए योगी ने कहा कि यूपी में हम लोगों ने व्यवस्था बनाई है कि किसी अस्त्र शस्त्र का इस्तेमाल नहीं करेंगे। मुहर्रम का जुलूस उत्पात, आगजनी, तोड़फोड़ का कारण बनता था। बहन बेटियां सड़क पर नहीं निकल पाती थीं। अब कांवड़ यात्राएं निकल रही हैं। हर व्यक्ति इस अभियान से जुड़ा हुआ है। एकता का अद्भुत संगम है। न जाति, न क्षेत्र, न वर्ग, न मत और न संप्रदाय का भेद है। हर-हर बम-बम बोलते हुए जाते हैं। तीन सौ चार सौ किलोमीटर पैदल जाते हैं। वहां से जल लेकर कांवड़ को कंधे पर रखकर उसी भक्ति भाव से आते हैं। इसके बाद भी एक मीडिया ट्रायल होता है। बदनाम किया जाता है। खूब उसके बारे में लिखा जाता है। उन्हें उपद्रवी और आतंकवादी तक बोलने का दुस्साहस होता है।

सीएम योगी ने कहा कि यह एक प्रकार की मानसिकता है जो भारत की हर प्रकार की विरासत को अपमानित करना चाहती है। यह वही लोग हैं जिन्होंने जनजातिय समुदाय को भारत से अलग करने का प्रयास किया। उन्हें भड़काने का काम किया। उन्हें भारत के खिलाफ संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया गया। यह वही समुदाय है जो भारत की आस्था का सदैव अपमान करता है। यही वो लोग हैं जो आज सोशल मीडिया में फेक अकाउंट बनाकर जातीय संघर्ष की स्थिति बनाना चाहते हैं। कुछ लोग जातियों में विभेद और संघर्ष को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसे रोकने की आवश्यकता है।

उन्होंने जनजातीय समाज को भारत का मूल समाज बताते हुए इसके ऐतिहासिक योगदान पर चर्चा की और कहा कि यह समाज हर कालखंड में देश की रक्षा और संस्कृति के संरक्षण के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि त्रेता युग में जब माता सीता का अपहरण हुआ, तब वनवास में रह रहे भगवान राम के पास अयोध्या या जनकपुर की सेना नहीं थी लेकिन जनजातीय समाज उनके साथ मिलकर रावण के खिलाफ युद्ध लड़ा।
उन्होंने कहा कि इसी तरह, महाराणा प्रताप ने अरावली के जंगलों में भटकते हुए जनजातीय समाज के सहयोग से अपनी सेना का पुनर्गठन किया और अकबर से युद्ध किया। योगी आदित्यनाथ ने बिरसा मुंडा को राष्ट्रीय आंदोलन का उत्प्रेरक बताते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने हमेशा भारत की विरासत और धरोहर को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ”बिरसा मुंडा ने अल्पायु में धरती माता और गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने का संदेश दिया, जो आज भी प्रेरणा देता है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारें जनजातीय समाज तक शासन की सुविधाएं नहीं पहुंचा सकीं। उन्होंने कहा कि जहां संवाद बाधित होगा, वहां संघर्ष की स्थिति पैदा होगी। उन्होंने कहा “हमारी सरकार ने 2017 के बाद जनजातीय गांवों को राजस्व गांव का दर्जा दिया। 1947 से 2017 तक इन गांवों में मतदान का अधिकार तक नहीं था। हमने राशन कार्ड, जमीन के पट्टे और पेंशन जैसी सुविधाएं दीं। सोनभद्र, चंदौली, मीरजापुर और नेपाल की तराई में जनजातीय समाज को योजनाओं से जोड़ा गया।”
मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज को सनातन परंपरा का सच्चा प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि यह समाज वेदों की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारता है और इसने प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर वेदों की शिक्षाओं को जिया है।
उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में यह कभी नहीं कहा गया कि मंदिर जाने वाला या ग्रंथ मानने वाला ही हिंदू है। उन्होंने कहा ”जो मानेगा, वह भी हिंदू है और जो नहीं मानेगा, वह भी हिंदू है। चार्वाक और भगवान बुद्ध ने वेदों को नहीं माना, फिर भी वे हमारे लिए पूज्य हैं।”

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