त्रिपुरा सरकार बाल विवाह रोकने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि राज्य सरकार सभी सामाजिक विवाहों के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी करने पर विचार कर रही है। राज्य के सामाजिक शिक्षा और समाज कल्याण विभाग के 2020 के आंकड़ों के अनुसार, त्रिपुरा बाल विवाह के मामले में पश्चिम बंगाल और बिहार के बाद देश में तीसरे स्थान पर है।
सीएम साहा ने पश्चिम त्रिपुरा के गांधीग्राम में सरकारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘सरकार सामाजिक विवाहों के लिए प्री-मैरिज रजिस्ट्रेशन लागू करके बाल विवाह को रोकने पर विचार कर रही है। इसके लिए आवश्यक कानूनी पहलुओं पर भी विचार किया जाएगा। इसके तहत जन्म प्रमाण पत्र जमा करना जरूरी होगा।’
बर्थ सर्टिफिकेट बनवाना होगा अनिवार्य
माणिक साहा ने कहा कि अगर विवाह पंजीकरण के लिए बर्थ सर्टिफिकेट अनिवार्य किया जाता है, तो लड़के और लड़की की उम्र खुद ही सामने आ जाएगी। उन्होंने बताया कि मौजूदा कानून के अनुसार, सामाजिक विवाह के लिए लड़कियों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने लोगों से बाल विवाह को रोकने और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसके लिए जागरूक लोगों को भी आगे आने की जरूरत है।
राष्ट्रपति से मिला पुरस्कार
सीएम साहा ने कहा कि हाल ही में राज्य की एक अल्पसंख्यक समुदाय की लड़की को बाल विवाह के खिलाफ विरोध करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से पुरस्कार मिला है। उन्होंने कहा कि दूसरों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। इस अवसर पर, साहा ने नशीली दवाओं के व्यापार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज के कुछ प्रमुख लोग आर्थिक लाभ के लिए इस कारोबार में शामिल हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘समाज के कई जाने-माने लोग पैसे के लिए नशीली दवाओं के व्यापार में लिप्त हैं। लेकिन यह साफ हो कि कानून के शिकंजे में आने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।’,
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