रानी की बावड़ी की खुदाई के बीच ASI ने किया फिरोजपुर किले का सर्वे, जानें क्या है इसका इतिहास?

उत्तर प्रदेश के संभल में रानी की बावड़ी की खुदाई का काम जारी है। इस बीच भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) ने फिरोजपुर किले का सर्वे भी किया। एएसआई के अलावा डीएम और एसपी ने भी यहां निरीक्षण किया। इस दौरान अतिक्रमण को लेकर नाराजगी भी जाहिर की गई। इस दौरान अतिक्रमण कर बनाई गई एक दीवार को भी गिरा दिया गया। जानकारी के मुताबिक यह किला 500 साल से भी ज्यादा पुराना है। इस किले का संरक्षण एएसआई की ओर से किया जा रहा है। इस किले की स्थिति लगातार जर्जर होती जा रही है।

क्या है फिरोजपुर किले का इतिहास

फिरोजपुर किला संभल से 7 किमी की दूरी पर है। मुगल बादशाह शाहजहां के दौर में 1650 या 1655 में इस किले का निर्माण कराया गया था। जानकारी के मुताबिक शाहजहां के सेनापति सैयद फिरोज शाह फिरोजपुर गांव में आकर बसे थे। जब दुश्मनों ने आगरा किले की घेराबंदी कर ली तो उन्होंने अपने रहने के लिए फिरोजपुर को चुना। उन्हीं के नाम पर इस किले का नाम फिरोजपुर किला रखा गया। किले के अंदर एक कुआं और बुर्ज बना हुआ है। दोनों के ही संरक्षण का जिम्मा एएसआई के पास है।

2018 में हुई थी किले की मरम्मत

2017-18 में इस किले की मरम्मत का काम किया गया था। तब एएसआई ने इसकी मरम्मत पर 1.40 करोड़ रुपये खर्च किए थे। निरीक्षण के बाद संभल के डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि बुधवार को फिरोजपुर स्थित पुराने किले, तोता मैना की कब्र, प्राचीन बावड़ी (चोर कुआं) का एएसआई की टीम के साथ निरीक्षण किया है। किले का मुआयना कर स्थिति की जानकारी ली गई। इसमें कुछ सुधार करने को भी कहा गया है। प्राचीन बावड़ी और तोता मैना की कब्र को संवारने का काम किया जाएगा।

तोना मैना की भी मौजूद है कब्र

इस किले के पास ही संभल-गवां मार्ग पर एक कब्र है। इस कब्र को तोता-मैना की कब्र कहा जाता है। प्रेम की निशानी के तौर पर स्थानीय लोग इस कब्र को देखते हैं। दूर-दराज के लोग भी यहां पहुंचते हैं। इस कब्र पर आयतल कुर्सी और दूसरी तरफ नाद ए अली आयत लिखी है। इस कब्र पर 939 हिजरी लिखा हुआ है।

रानी की बावड़ी की खुदाई जारी

संभल में पिछले 5 दिनों से रानी की बावड़ी की खुदाई का काम जारी है। प्रशासन के मुताबिक ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित रखने के लिए इसकी बुलडोजर से खुदाई नहीं कराई जा सकती है। इसलिए मजदूरों द्वारा ही खुदाई कराई जा रही है। अब तक सीढ़ीदार कुएं की संरचना स्पष्ट रूप से उभर रही है। करीब 150 साल पुरानी और 400 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली यह बावड़ी पिछले सप्ताह चंदौसी के लक्ष्मण गंज इलाके में खुदाई के दौरान मिली थी।

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