मध्य प्रदेश के जबलपुर में बर्गी डैम की लहरों ने कुछ ही मिनटों में खुशियों को चीखों में बदल दिया. सैर-सपाटे के लिए निकले परिवारों ने शायद ही सोचा होगा कि यह सफर उनकी जिंदगी का सबसे भयावह अनुभव बन जाएगा. गुरुवार शाम यह हादसा हुआ था. डूबने वालों की तलाश आज सुबह तक जारी रही. आज आखिरी लापता व्यक्ति का शव बरामद कर लिया गया है. इसके साथ ही क्रूज हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई.
एजेंसी के अनुसार, रविवार सुबह बर्गी डैम की लहरों पर दो शव तैरते दिखाई दिए. इनमें पांच साल का मासूम मयूरम और उसके चाचा कमराज शामिल थे. कमराज ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में काम करते थे. पुलिस और बचाव दल ने दोनों शवों को बाहर निकाला. जैसे ही यह खबर परिवार तक पहुंची, डैम के किनारे मातम और चीख-पुकार गूंज उठी. इसके साथ ही उन सभी 13 लोगों का पता चल गया, जो हादसे के बाद से लापता थे. चार दिनों से चल रहा लंबा इंतजार खत्म हुआ, लेकिन यह अंत बेहद दर्दनाक था.
दरअसल, गुरुवार शाम बर्गी डैम में राज्य पर्यटन विभाग का करीब 20 साल पुराना क्रूज पर्यटकों को लेकर पानी में उतरा था. पुलिस के अनुसार, क्रूज पर 41 यात्री सवार थे, हालांकि सीसीटीवी फुटेज में 43 लोग सवार होते दिखाई दिए थे.
यात्रियों के सवार होने के बाद शाम का मौसम अचानक बदल गया. तेज हवाएं चलने लगीं और देखते ही देखते तूफान ने डैम को अपनी चपेट में ले लिया. तेज लहरों और आंधी के बीच पुराना क्रूज संतुलन खो बैठा. कुछ ही पलों में वह पलट गया. जो लोग कुछ देर पहले हंसी-मजाक कर रहे थे, वे अचानक जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष करने लगे.
पानी में चीखें, किनारे पर अफरा-तफरी
क्रूज पलटते ही डैम में चीख-पुकार मच गई. कई यात्री लाइफ जैकेट के सहारे तैरते रहे, जबकि कई लोग तेज लहरों में बह गए. स्थानीय लोगों, पुलिस और प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया. पूरे रेस्क्यू के दौरान बचाव दल ने 28 यात्रियों को बाहर निकाल लिया, लेकिन 13 लोग लापता हो गए. इसके बाद से ही बर्गी डैम पर रेस्क्यू चल रहा था.
लापता लोगों की तलाश के लिए सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों को लगाया गया. आगरा से करीब 20 आर्मी डाइवर्स को एयरलिफ्ट कर जबलपुर लाया गया. दिन-रात डैम की गहराइयों में तलाश जारी रही. हर गुजरते घंटे के साथ परिजनों की बेचैनी बढ़ती गई. रविवार सुबह जब आखिरी दो शव मिले, तब जाकर यह खोज अभियान समाप्त हुआ.
सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया, जब पांच साल के मासूम मयूरम का शव बाहर निकाला गया. जो बच्चा कुछ दिन पहले तक घर में किलकारियां भर रहा था, उसकी निर्जीव देह देखकर हर आंख नम हो गई. कमराज का परिवार भी गहरे सदमे में है. एक सैर ने पूरे परिवार की दुनिया बदल दी.
यह क्रूज करीब 20 साल पुराना था, जो राज्य पर्यटन विभाग द्वारा चलाया जा रहा था. सवाल उठ रहे हैं कि क्या तूफानी मौसम में पानी में उतारना सही था? क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे.
हादसे के अगले ही दिन राज्य सरकार ने जांच के आदेश दे दिए. क्रूज के तीन क्रू मेंबर्स को तत्काल बर्खास्त कर दिया गया. साथ ही राज्य में इसी तरह के सभी पुराने जहाजों के संचालन पर रोक लगा दी गई है. घटना स्थल के पास लगे सीसीटीवी में 43 लोग क्रूज की ओर जाते दिखे, जबकि अब तक केवल 41 यात्रियों की पहचान हो पाई है.
यह हादसा सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है. क्या मौसम चेतावनी के बावजूद क्रूज को रवाना किया गया? क्या यात्रियों की संख्या तय सीमा से अधिक थी? क्या पुराने जहाज की फिटनेस जांच हुई थी? इन सभी पहलुओं की जांच जारी है. यह त्रासदी उन 13 परिवारों के लिए कभी न भरने वाला घाव बन गई है, जिन्होंने अपनों को खो दिया. बर्गी डैम की लहरें अब शांत जरूर हैं, लेकिन उनके भीतर उस भयावह शाम की चीखें लंबे समय तक गूंजती रहेंगी.
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