प्लांटों की मरम्मत व सुंदरीकरण पर तीन करोड़ खर्च करने की तैयारी, नहीं मिल रहे ठेकेदार

ग्वालियर। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 की शुरुआत आगामी दिसंबर माह में होने की संभावना है। इसको देखते हुए हर साल की तरह नगर निगम ने अब सर्वेक्षण की तैयारियां तेज कर दी हैं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत निगम के पास पांच करोड़ रुपये का बजट है, जिसमें अब तीन करोड़ रुपये निगम के केदारपुर प्लांट की मरम्मत और शिवपुरी लिंक रोड तक ड्रेन कार्य के साथ ही सात कचरा ट्रांसफर स्टेशनों पर भी सिविल वर्क कराया जाना है, लेकिन निगम को फिलहाल इन कार्यों के लिए कोई काबिल फर्म नहीं मिल पा रही है।

इसके चलते अधिकारियों ने अब दोबारा आफर आमंत्रित किए हैं। सर्वेक्षण के लिए दिसंबर में टीमें आने की संभावना है। हालांकि केंद्रीय मंत्रालय स्तर पर अभी मैदानी टीमों को रवाना करने के लिए टेंडर प्रक्रिया की जा रही है। इस क्रम में स्थानीय स्तर पर नगर निगम ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके लिए मैदानी स्तर पर तो अमले को झौंक दिया गया है, साथ ही अब अधोसंरचना विकास पर भी जोर दिया जा रहा है।

इसके लिए प्लांटों पर मरम्मत के काम कराए जाएंगे। निगम के सात कचरा ट्रांसफर स्टेशनों को बने हुए छह साल से अधिक समय हो चुका है और अब इनकी हालत खराब है। ऐसे में प्लांटों पर सिविल स्ट्रक्चर की मरम्मत करने के साथ ही टीनशेड आदि सुधार कार्य कराए जाएंगे। केदारपुर प्लांट के अंदर भी सड़क जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। ऐसे में यहां डामर और सीमेंट कंक्रीट की रोड तैयार कराई जाएंगी, जिनका पांच साल का गारंटी पीरियड होगा।

इसके अलावा वर्तमान आफिस बिल्डिंग की मरम्मत का काम भी होना है, क्योंकि यहां पिछले दिनों ग्रामीणों ने तोड़फोड़ कर दी थी। इस बिल्डिंग वर्क का दो साल का गारंटी पीरियड रहेगा। हालांकि पहले किए गए टेंडर में एक भी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई थी।

अतिवर्षा से भर गया था पानी

इस वर्ष बरसात के मौसम में हुई अतिवर्षा के कारण केदारपुर प्लांट के अंदर पानी भर गया था। जलजमाव होने के कारण कई दिनों तक प्लांट में कचरा संग्रहण का कार्य प्रभावित रहा। निगम को अलग से पानी निकास की व्यवस्था करनी पड़ी। ऐसे में अब यहां प्लांट से लेकर शिवपुरी लिंक रोड तक विशेष रूप से ड्रेनेज लाइन की व्यवस्था कराई जाएगी, ताकि वर्षा के मौसम में जलजमाव होने से काम प्रभावित नहीं हो। यह ड्रेनेज लाइन शिवपुरी लिंक रोड पर बनाई गई वाटर हार्वेस्टिंग लाइन से जोड़ी जाएगी, ताकि भू-जल स्तर में भी बढ़ोतरी हो सके।

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