नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पड़ोसी देशों को दी जाने वाली सहायता राशि में बड़े बदलाव किए हैं। बांग्लादेश को मिलने वाली सहायता आधी कर दी गई है। वहीं, ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई भी पैसा आवंटित नहीं हुआ है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों में कुछ खटास आई है। वहीं, कुल ‘देशों को सहायता’ का खर्च पिछले साल के मुकाबले बढ़ाया गया है। लेकिन, यह पिछले साल के संशोधित अनुमानों से कम है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026 में बांग्लादेश को दी जाने वाली सहायता राशि में भारी कटौती की है। पिछले साल के बजट अनुमानों में जहां बांग्लादेश को 120 करोड़ रुपये मिले थे। वहीं, 2026-27 के लिए यह रकम घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दी गई है। यह कटौती ऐसे समय में हुई है जब अगस्त 2024 में शेख हसीना के देश छोड़कर जाने के बाद अंतरिम प्रमुख मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों में कुछ तनाव देखा गया है।
चाबहार बंदरगाह को क्यों नहीं मिली तजवज्जो?
इस बजट में एक और बड़ा आश्चर्य चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए फंडिंग का पूरी तरह से बंद होना है। बजट दस्तावेजों में 2026-27 के लिए इस परियोजना के लिए कोई भी राशि आवंटित नहीं की गई है। भारत ने 2024-25 में चाबहार पर 400 करोड़ रुपये खर्च किए थे। 2025-26 के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये का बजट रखा था। इसे बाद में संशोधित अनुमानों में बढ़ाकर 400 करोड़ रुपये कर दिया गया था। लेकिन, इस साल यह राशि शून्य हो गई है। यह फैसला तब आया है जब भारत ने 2024 में चाबहार में शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को संचालित करने के लिए 10 साल का समझौता किया था। इस परियोजना को पाकिस्तान से गुजरे बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में तेहरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।
किन देशों की सहायता राशि बढ़ी, किन देशों की घटी?
बांग्लादेश की सहायता में कटौती और चाबहार परियोजना पर रोक के बावजूद भूटान भारतीय सहायता प्राप्त करने वाला सबसे बड़ा देश बना हुआ है। भूटान के लिए आवंटन में लगभग 6 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है, जो अब 2,289 करोड़ रुपये हो गया है। नेपाल को भी लगभग 14% अधिक सहायता मिलेगी। इसका आवंटन बढ़ाकर 800 करोड़ रुपये कर दिया गया है। श्रीलंका को 400 करोड़ रुपये मिलेंगे, जो पिछले स्तर से लगभग एक-तिहाई ज्यादा है।
वहीं, मालदीव के लिए सहायता राशि में 8% की कटौती की गई है, जो अब 550 करोड़ रुपये हो गई है। मॉरीशस को भी 550 करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए हैं। हालांकि उसे 10% की बढ़ोतरी मिली है। अफगानिस्तान के लिए सहायता राशि 150 करोड़ रुपये पर स्थिर रखी गई है। इसमें ज्यादातर राशि मानवीय सहायता पर खर्च होगी। म्यांमार के लिए आवंटन में लगभग 14% की कमी की गई है, जो अब 300 करोड़ रुपये हो गया है।
कुल मिलाकर, ‘देशों को सहायता’ पर कुल खर्च को बढ़ाकर 5,686 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले साल के बजट अनुमानों 5,483 करोड़ रुपये से लगभग 4% ज्यादा है। हालांकि, यह रकम 2025-26 के संशोधित अनुमानों 5,785 करोड़ रुपये से कम है। यह बजट दिखाता है कि भारत अपनी विदेश सहायता नीतियों में रणनीतिक बदलाव कर रहा है। इसमें कुछ देशों को प्राथमिकता दी जा रही है और कुछ परियोजनाओं से हाथ खींचा जा रहा है।
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