दिवाली पर चीन का निकला ‘दिवाला’, ड्रैगन को एक लाख करोड़ रुपये की तगड़ी चपत

नई दिल्ली: आर्थिक मोर्चे पर कई दिक्कतों का सामना कर रहे चीन के लिए इस बार दिवाली भी फीकी होने जा रही है। इसकी वजह यह है कि इस बार देश में वोकल फॉर लोकल की धूम है। लोग जमकर देसी सामान की खरीदारी कर रहे हैं। इससे चीन को एक लाख करोड़ रुपये की चपत लगने का अनुमान है। शुक्रवार को धनतेरस है लेकिन उससे पहले ही बाजारों में खरीदारी शुरू हो गई है। देशभर के बाजारों में काफी रौनक देखी जा रही है। इस मौके पर राजधानी दिल्ली समेत देशभर में 50 हजार करोड़ रुपये की बिक्री का अनुमान है। इस बार दिवाली पर स्वदेशी सामान की धूम मची है। सरकार चीन पर निर्भरता कम करना चाहती है और घरेलू स्तर पर प्रॉडक्शन को बढ़ाया जा रहा है। इसका असर दिवाली की खरीदारी पर साफतौर पर दिखाई दे रहा है।

देश में व्‍यापारियों के सबसे बड़े संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि गुरुवार और शुक्रवार को धनतेरस के मौके पर देश भर में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये के रिटेल कारोबार होने का अनुमान है। साथ ही इस बार बाजारों में पूरी तरह वोकल फॉर लोकल का जोर दिख रहा है। लोग चीनी सामान छोड़कर भारतीय सामानों की खरीदारी कर रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार दिवाली से जुड़े चीनी सामानों की बिक्री न होने से चीन को करीब एक लाख करोड़ रुपये के व्यापार की चपत लग सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से इस दिवाली वोकल फॉर लोकल पर जोर देने का आह्वान किया है।

क्या-क्या खरीद रहे लोग

धनतेरस के दिन सिद्धि विनायक गणेश जी, धन की देवी महालक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है। इस दिन नई वस्तु को खरीदना शुभ माना जाता है। इस मौके पर खासतौर पर सोना और चांदी के गहने और अन्य वस्तुएं, बर्तन, रसोई का सामान, गाड़ी, कपड़े और रेडीमेड गारमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली का सामान, बिजनस में काम आने वाले उपकरण जैसे कंप्यूटर और कंप्यूटर से जुड़े उपकरण, मोबाइल, बहीखाते, फर्नीचर और अकाउंटिंग से जुड़े सामान की खरीदारी की जाती है। साथ ही झाड़ू भी खरीदी जाती है। ज्वेलरी व्यापारियों में भी धनतेरस की बिक्री को लेकर बड़ा उत्साह है।

चीन का दिवाला

सेमीकंडक्टर चिप्स से लेकर कई तरह के सामान को लेकर भारत चीन पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं। इससे देश में आर्थिक विकास को गति मिली है। पिछले पांच साल में देश से सेमीकंडक्टर, मटरीरियल्स, ऑटो कंपोनेंट्स और मैकेनिकल मशीनरी के निर्यात में काफी तेजी आई है। इस दौरान भारत से अमेरिका को सेमीकंडक्टर और मटीरियल का निर्यात 143 परसेंट बढ़ा है जबकि चीन के निर्यात में 29 परसेंट गिरावट आई है। साथ ही भारत से ऑटो कंपोनेंट का एक्सपोर्ट 65 परसेंट और मैकेनिकल मशीनरी का एक्सपोर्ट 70 परसेंट बढ़ा है। एक स्टडी के मुताबिक 2018 से 2022 के दौरान भारत से अमेरिका को एक्सपोर्ट 23 अरब डॉलर बढ़ा है। दूसरी तरफ इस दौरान चीन का अमेरिका को एक्सपोर्ट 10 परसेंट घटा है।

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी वाला देश चीन पिछले कुछ समय से आर्थिक मोर्चे पर कई दिक्कतों का सामना कर रहा है। देश का एक्सपोर्ट गिर रहा है, बेरोजगारी चरम पर है, विदेशी कंपनियां और निवेशक भाग रहे हैं, रियल एस्टेट सेक्टर बुरी तरह बैठ गया है और लोग पैसा खर्च करने के बजाय बचत करने पर लगे हैं। इकॉनमी को बूस्ट देने के सरकार के सारे प्रयास नाकाम साबित हो रहे हैं। साथ ही अमेरिका के साथ तनाव चरम पर है। अमेरिका के आयात में चीन की हिस्सेदारी 15% रह गई है जो 2016 में 22% थी। इस बीच भारत में भी चीन को तगड़ा झटका लगा है। यानी इस बार चीन की दिवाली फीकी होने जा रही है।

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