इस्लामाबाद: पाकिस्तान सरकार के नए आतंकवाद विरोधी अभियान के तहत अफगानिस्तान में पाकिस्तानी तालिबान (TTP) के ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन को मंजूरी दी जा सकती है। खुरासान डायरी ने एक उच्च पदस्थ पाकिस्तानी अधिकारी के हवाले से ये जानकारी दी है। अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि पाकिस्तान सरकार सीमा पार आतंकवादी ठिकानों का पीछा करने और उन्हें खत्म करने में संकोच नहीं करेगी। शनिवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने नेशनल एक्शन कमेटी की शीर्ष समिति की बैठक में चरमपंथ के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाने को मंजूरी दी थी। इसे ऑपरेशन अज्म-ए-इस्तेहकाम नाम दिया गया है, जिसके तहत उत्तरी वजीरिस्तान से लेकर बलूचिस्तान तक चरमपंथ के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। इस बैठक में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ ही सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।
तालिबान को मनाने की कोशिश भी
सैन्य अभियान के साथ ही पाकिस्तान आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए अफगानिस्तान की अंतरिम तालिबान सरकार को राजी करने के कूटनीतिक प्रयास भी करेगा। पाकिस्तानी अखबार ट्रिब्यून ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अभियान के दो पहलू हैं। एक आंतरिक सुरक्षा स्थिति को संबोधित करता है, जबकि दूसरे में अफगानिस्तान से पैदा होने वाले बाहरी खतरे पर ध्यान केंद्रित किया गया है। अगस्तर 2021 में काबुल में तालिबान की वापसी के बाद पाकिस्तान के अंदर टीटीपी के हमलों तेजी आई है, जो इस्लामाबाद के लिए एक झटके की तरह है।
चीन की मदद भी लेगा पाकिस्तान
इस साल के पहले पांच महीनों में आतंकवादी हमलों में 83 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जिसके बाद पाकिस्तान को चरमपंथ के खिलाफ एक नया अभियान शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा। सूत्रों ने बताया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पर रोक लगाने के लिए अफगान तालिबान को मनाने में इस्लामाबाद की चीन से भी मदद लेने की योजना है। पाकिस्तान ने भले ही तालिबान को पाल पोस कर बड़ा किया लेकिन आज वह इस्लामाबाद को दुश्मन के रूप में देखता है। काबुल की सत्ता में वापसी के बाद से पाकिस्तान और तालिबान सरकार के संबंध बद से बदतर होते चले गए हैं। इसी साल मार्च में पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान की सीमा के भीतर टीटीपी के कथित ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी, जिसके बाद अफगानिस्तान ने युद्ध की धमकी दे डाली थी।
चीन के दबाव में पाकिस्तान का ऑपरेशन
हाल के दिनों में पाकिस्तान में विद्रोही गुटों के हमले तेज हुए हैं। इनका टॉप टारगेट पाकिस्तान में मौजूद चीनी निवेश है, जो इन हमलों के चलते बाधित हुआ है। हाल ही में पाकिस्तान की यात्रा पर आए एक प्रमुख चीनी मंत्री ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि चरमपंथी हमलों के चलते चीनी निवेशकों का विश्वास हिल गया है। मंत्री ने साफ चेतावनी दी कि बिना सुरक्षा के पाकिस्तान में कारोबारी माहौल नहीं बन सकता। चीनी मंत्री के बयान के एक दिन बाद ही पाकिस्तान के नागरिक और सैन्य नेतृत्व ने चरमपंथ विरोधी नए सैन्य अभियान को मंजूरी दी।
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