..जब वकील ने प्यार से जजों की सुनाई खरी-खोटी,

जबलपुर. मध्य प्रदेश की जबलपुर हाईकोर्ट का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. यह वीडियो हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जबलपुर के प्रेसिडेंट डीके जैन का है. उन्होंने 24 मई को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवि मलीमथ के विदाई समारोह में जबरदस्त भाषण दिया. इस वीडियो को लोग जबरदस्त लाइक और शेयर कर रहे हैं. एडवोकेट डीके जैन ने जजों की मौजूदगी में बिना लाग-लपेट के सच रख दिया. उनकी बात को जजों ने बिना कोई रुकावट पैदा किए पूरे ध्यान से सुना. इसमें जैन कह रहे हैं, ‘माननीय हमारे न्यायालयों के कुछ माननीय न्यायाधीशगण हमारे अधिवक्ताओं से असंयमित भाषा में बात कर रहे हैं. जरा-जरा सी बात पर प्रकरण डिसमिस करना न्यायीधीशगणों की गरिमा के प्रतिकूल है.

एडवोकेट जैन ने आगे कहा, ‘एक अधिवक्ता एक ही समय एक से अधिक न्यायालयों में प्रस्तुत नहीं हो सकता है. ऐसी स्थिति में प्रकरणों को सुनने के बजाय डिसमिस करना आम बात होती जा रही है. फाइलिंग सेक्शन में घंटों इंतजार के बाद भी नंबर नहीं आता है. अगर प्रकरण में कोई डिफॉल्ट आ जाए तो डिफॉल्ट के सुधार के बाद नंबर कब आएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं. अगर किसी कारणवश 7 दिनों में डिफॉल्ट दूर न हो तो एकमुश्त अनेकों प्रकरण डिसमिस किए जा रहे हैं. जबकि, ऐसे हजारों प्रकरण न्यायालयों में सुनवाई के लंबित हैं. और, उनका नंबर ही नहीं आ रहा. तो क्या यह नियम उचित है. कृपया इस पर पुनर्विचार करें. ऐसा प्रतीत होता है कि माननीय उच्च न्यायालय को आम जनता को न्याय देने के बजाए प्रकरणों का बोझ करने में ज्यादा रुची है. इसके लिए यह बेहतर होगा कि फाइलिंग सेक्शन में ही माननीय न्यायाधीशों की नियुक्ति कर दी जाए.’

आशा है आप हमारी पीड़ा अवश्य सुनेंगे- जैन

इसके अलावा उन्होंने कहा, ‘मान्यवर इस साल मध्य प्रदेश उच्च नायालय ने गर्मी की छुट्टियां 15 दिन आगे बढ़ा दी हैं. जब छुट्टियां मिलेंगी तो बच्चों के स्कूल खुल जाएंगे. मैं यह जानता हूं कि आपने यह सबकुछ अपनी मर्जी से नहीं किया होगा. हमारी बार के पूर्व अध्यक्ष भी हर समय कंधे से कंधा मिलाकर आपके साथ खड़े रहे. इसलिए तो हमारी बार ने उनके स्थान पर अबकी बार धन्य कुमार का नारा देकर मुझे आपके सामने सच्चाई से अवगत कराने का अवसर दिया है. मुझे भरोसा है कि आप हमारी पीड़ा को अवश्य सुनेंगे. आज भी आप हमारे मुख्य न्यायाधीश हैं, और आप समस्याओं को मिनटों में निपटाने का सामर्थ्य रखते हैं. हमारे यहां यह परंपरा है कि जब हमारे बुजुर्ग जब भी घर से बाहर जाते हैं तो बच्चों को जी भरकर उपहार देकर जाते हैं.’

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