बचने के लिए जिस भीड़ में छिपे, उसने ही पीट दिया’, घायल पुलिसवालों ने सुनाई आपबीती

दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्ग में हुई हिंसा में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं. पुलिसकर्मियों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उन्हें टारगेट करके उनपर हमला किया और पत्थर भी फेंके. इन हमलों का शिकार हुए दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों ने आपबीती सुनाई है. 
घटना के समय ड्यूटी पर तैनात इंस्पेक्टर नंद किशोर सिंह ने बताया कि रात लगभग 8:15 बजे वो ड्यूटी के लिए जंतर-मंतर जा रहे थे. पार्किंग न मिलने की वजह से उन्होंने अपनी गाड़ी हनुमान मंदिर रोड पर पार्क की और पैदल ही संसद मार्ग की तरफ बढ़ने लगे और इसी दौरान उनपर हमला हो गया.

इंस्पेक्टर सिंह ने बताया, ‘मैं यूनिफॉर्म में अकेला था. शुरुआत में मुझे लगा कि सड़क पर मौजूद लोग छात्र हैं और मैं आसानी से निकल जाऊंगा. लेकिन वो छात्र नहीं थे. मैंने ध्यान दिया कि कई लोगों ने काले कपड़े से अपने चेहरे ढके हुए थे और मास्क लगा रखा था. उनके हाथों में लाठियां और लोहे की रॉड थीं. वो पूरी तैयारी के साथ आए थे.’

मेरा सामान भी छीनने की कोशिश की’

नंद किशोर सिंह ने आगे कहा, ‘ऐसा लग रहा था कि जो भी सामने आएगा, वो उस पर हमला करेंगे. उन्होंने मेरा सामान भी छीनने की कोशिश की. भीड़ में लगभग 150 से 200 लोग शामिल थे. वीडियो में भी साफ देखा जा सकता है कि ये कोई छोटा ग्रुप नहीं था. वो सभी एक साजिश के तहत काम कर रहे थे. ऐसा लग रहा था कि वो उस दिन मुझे जान से मारने के इरादे से आए थे. मुझे काफी गंभीर चोटें आई हैं. अगर सही समय पर बचाव न होता तो वो मुझे मार डालते. पुलिस अब वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है.’

जवान खून से लथपथ था, बचाने गया तो मुझे भी घेर लिया’

इलाके की सुरक्षा में तैनात ACP विवेक भगत ने भी उस रात का खौफनाक मंजर बयां किया. वो सेक्टर-1 जोन-1 में तैनात थे, जिसमें जंतर-मंतर का इलाका शामिल है. शाम की शिफ्ट के दौरान वो रीगल बिल्डिंग (कनॉट प्लेस) से संसद मार्ग और टॉल्स्टॉय मार्ग की रेड लाइट की तरफ रिपोर्ट करने जा रहे थे. उनके साथ एसीपी प्रोबेशनर रोहित, ऑपरेटर नवनीत और 5-6 पुलिसकर्मी पैदल चल रहे थे.
ACP भगत ने बताया, ‘जैसे ही हम आगे बढ़े, हमने देखा कि आगे चल रहे हमारे स्टाफ पर पानी की बोतलें फेंकी जा रही थीं. पुलिस के खिलाफ नारेबाजी और हूटिंग की जा रही थी. जान बचाने के लिए जैसे ही जवान थोड़ा इधर-उधर हुए, भीड़ ने एक जवान को घेर लिया. उसके सिर से तेजी से खून बह रहा था और पूरा चेहरा खून से सन चुका था.’
उन्होंने आगे कहा, ‘अपने जवान की जान बचाने के लिए मैंने तुरंत बीच-बचाव किया. हम उसे खींचकर एक-दो मीटर आगे भी ले आए, लेकिन भीड़ बहुत बड़ी और हिंसक थी. उन्होंने मुझे भी घेर लिया. भीड़ का रवैया बेहद हिंसक था. पुलिस अधिकारियों को अलग-थलग करके उन्हें खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा था.’

पुलिसकर्मियों पर भीड़ ने फेंके पत्थर

ACP रोहित सतवान ने भी अपना दर्द बयां किया. उन्होंने कहा, ‘हम रात करीब 8.15 बजे रीगल सिनेमा, आउटर सर्कल, कनॉट प्लेस में अपनी ड्यूटी कर रहे थे. हमें मैसेज मिला कि भीड़ हंगामा कर रही है, इसलिए सारा स्टाफ अलर्ट रहे… जब हम पार्क होटल के पास पहुंचे, तो उन लोगों ने हम पर बोतलें फेंकनी शुरू कर दीं. फिर उन्होंने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया. उन्होंने हमारे स्टाफ को मारना शुरू कर दिया.’

मुझे पीछे से डंडों से मारा और…’

ACP ने आगे बताया कि हमारा एक स्टाफ मेंबर फंस गया था और वो सब मिलकर उसे पीट रहे थे. हम उसे बचाने के लिए भीड़ में घुस गए. फिर उन्होंने ही विवेक सर और मुझे भी पीटना शुरू कर दिया. हालांकि, हम उन्हें थोड़ी ही दूर तक खदेड़ पाए, इससे पहले कि वो हमें फिर से पकड़ लेते. विवेक सर को एक बड़ी भीड़ ने घेर लिया था, इसलिए उन्हें गंभीर चोटें आईं. उनका पूरा चेहरा खून से लथपथ था और उन्होंने उन्हें लात मारकर गिरा दिया. 

उन्होंने कहा, ‘मैं एक तरफ भागा और उन्होंने मुझे पीछे से डंडों से मारा और मुझ पर पत्थर फेंके. उन्होंने हम पर बहुत सारी ईंटें और बड़े पत्थर फेंके, जिनमें से कई मुझे लगे और तभी मैं घायल हो गया. जहां तक ​​उनके पास डंडों की बात है, तो उन्होंने उनमें से कई पुलिसवालों से छीन लीं.’

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