खालड़ा हत्याकांड के दोषी पूर्व DSP हुए गायब? सतलुज विवाद के बीच नया बवाल

फिल्म सतलुज (पहले ‘पंजाब 95’) के पर लगे बैन और इससे जुड़े तमाम विवाद के बीच एक नया रहस्यमय घटनक्रम सामने आया है. जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड में दोषी करार दिए गए पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह को लेकर भी नया विवाद खड़ा हो गया है. नाभा ओपन एग्रीकल्चरल जेल प्रशासन ने पंजाब पुलिस से उनके वर्तमान पते का सत्यापन करने को कहा, क्योंकि होशियारपुर जिले में दर्ज उनके पते पर वह नहीं मिले.

होशियारपुर के दर्ज पर पते पर नहीं हैं DSP!

होशियारपुर के एसएसपी संदीप मलिक ने बताया कि जेल प्रशासन की ओर से मिले अनुरोध के बाद पुलिस ने संबंधित गांव में सत्यापन किया, लेकिन वहां जसपाल सिंह नहीं मिले. उन्होंने कहा कि संभव है कि जेल रिकॉर्ड में उनके एक से अधिक पते दर्ज हों, लेकिन होशियारपुर वाले पते पर उनका पता नहीं चल सका.

वकील ने किया खबरों को खारिज

हालांकि, जसपाल सिंह के वकील गगनदीप सिंह घिरे ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल लापता नहीं हैं. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही खबरें भ्रामक हैं. जसपाल सिंह अंतरिम जमानत पर बाहर हैं और फिलहाल पंजाब में अपने बेटे के साथ जालंधर में रह रहे हैं. उनके अनुसार हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी है और उन्होंने एक लाख रुपये का निजी मुचलका भी जमा कराया है. यदि वह वास्तव में लापता होते तो जमानतदार से उन्हें अदालत के सामने पेश करने को कहा जाता. उन्होंने यह भी बताया कि जालंधर नगर निगम पहले ही उनके पते की पुष्टि संबंधित अधिकारियों को कर चुका है.

साल 2005 में खालड़ा हत्याकांड में सुनाई गई थी सजा

गौरतलब है कि साल 2005 में सीबीआई की पटियाला अदालत ने 1995 में मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के अपहरण और हत्या के मामले में जस्पाल सिंह को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. मई 2023 में उन्हें नाभा ओपन जेल से राज्यपाल के समक्ष लंबित दया याचिका पर निर्णय होने तक अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था.

राजनीतिक बहसें भी हुईं तेज

इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं. शिरोमणि अकाली दल ने आम आदमी पार्टी सरकार पर दोषियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है. अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि सरकार ने पहले 2022 में सजा में राहत की सिफारिश की, जिससे रिहाई का रास्ता खुला, और अब उनके ठिकाने का पता लगाने में भी नाकाम रही है. 
वहीं, आम आदमी पार्टी सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा हत्याकांड के दोषियों की समयपूर्व रिहाई को मंजूरी नहीं दी गई थी और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस संबंध में किसी भी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए.

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