ताजा अटैक के बाद बाद दो भारतीय जहाजों ने पार किया होर्मुज, LPG टैंकर को लेना पड़ा U-टर्न

ईरान और अमेरिका के बीच अंतरिम शांति समझौते के बाद दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज स्ट्रेट पर धीरे-धीरे जहाजों की आवाजाही शुरू हो गई है. हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं. शुक्रवार को दो भारतीय जहाज सुरक्षित तरीके से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने में सफल रहे, जबकि एक भारतीय ध्वज वाला LPG टैंकर बीच रास्ते से ही यू-टर्न लेकर वापस लौट गया.

समुद्री ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, भारतीय जहाज देश सुरक्षा और एसएसएल कावेरी शुक्रवार सुबह ओमान के समुद्री रास्ते से होकर सुरक्षित होर्मुज पार कर गए. खास बात यह रही कि युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार किसी भारतीय जहाज ने ईरान की बजाय ओमान वाले दक्षिणी मार्ग का इस्तेमाल किया. इससे पहले बाहर निकले भारतीय जहाज मुख्य रूप से लारक चैनल के रास्ते गए थे, जो ईरान द्वारा निर्धारित समुद्री कॉरिडोर के करीब माना जाता है.

वहीं भारतीय ध्वज वाला LPG टैंकर बीडब्ल्यू लॉयल्टी भी होर्मुज की ओर बढ़ा, लेकिन स्ट्रेट के करीब पहुंचने के बाद उसने अचानक दिशा बदल ली और वापस लौट गया. हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं है कि उसने ऐसा क्यों किया. एक दिन पहले ओमान के तट के पास एक कार्गो शिप पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ था. इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इसके बाद सुरक्षा चिंताएं फिर बढ़ गई हैं. फिलहाल बीडब्ल्यू लॉयल्टी के यू-टर्न और इस हमले के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है.

भारत LPG टैंकर, कच्चे तेल के टैंकर, कंटेनर जहाज फंसे

युद्ध के दौरान फंसे भारतीय जहाजों की संख्या अब भी काफी है. दो जहाजों के बाहर निकलने के बाद भी करीब 10 भारत से जुड़े जहाज फारस की खाड़ी के अंदर मौजूद हैं. इनमें LPG टैंकर, कच्चे तेल के टैंकर, कंटेनर जहाज और अन्य कारोबारी पोत शामिल हैं. इन जहाजों की गतिविधियां अलग-अलग दिख रही हैं. कुछ जहाज बाहर निकलने की दिशा में बढ़ रहे हैं, जबकि कुछ ने अपनी स्थिति बदल ली है या फिर खाड़ी के अंदर ही लौट गए हैं. इससे साफ है कि जहाज संचालक अभी भी सुरक्षा हालात का आकलन कर रहे हैं.

होर्मुज की वजह से फंसे 11 हजार नाविक

इसी बीच संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने 11 हजार से ज्यादा नाविकों को सुरक्षित बाहर निकालने के अपने अभियान पर अस्थायी रोक लगा दी है. दरअसल, ओमान के पास एक जहाज पर हुए हमले के बाद IMO ने कहा कि जब तक सुरक्षित आवाजाही की गारंटी दोबारा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक निकासी अभियान आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. जिस जहाज पर हमला हुआ, वह IMO के निकासी अभियान का हिस्सा नहीं था.

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