टेंपो चालक से करोड़ों की संपत्ति तक…कैसे चंपत राय का ड्राइवर टिन्नू यादव बन गया ‘रईस’?

विशेष जांच दल (SIT) ने अयोध्या के राम मंदिर में रोजाना आने वाले लाखों रुपये के चढ़ावे में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में छानबीन तेज कर दी है. इन सबके बीच मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पूर्व ड्राइवर और बेहद करीबी सहयोगी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पर सवाल उठ रहे हैं. भाजपा के पूर्व सांसद विनय कटियार सहित कई दिग्गज नेताओं द्वारा चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और व्यवस्थापक गोपाल राव के साथ-साथ इस निजी व्यक्ति पर लगातार तीखे हमले किए जा रहे हैं. एसआईटी की टीम के अयोध्या पहुंचने की संभावना के बीच मीडिया ने नाका और कैंट इलाके में स्थित टिन्नू यादव की संपत्तियों पर जाकर वहां रहने वाले छात्रों और पड़ोसियों से पूछताछ कर जमीनी हकीकत का पता लगाया है.

साधारण अतीत से करोड़ों की संपत्ति तक

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का अतीत बेहद साधारण रहा है. स्थानीय विहिप सूत्रों के अनुसार, उनके पिता नया घाट क्षेत्र में चाय बेचते थे और टिन्नू ने अपने शुरुआती दिनों में टेंपो चलाने और ड्राइवरी का काम किया था. राम मंदिर निर्माण की शुरुआत से ही चंपत राय का ड्राइवर बनने के बाद अचानक उनके दिन पलटने लगे और वह ट्रस्ट में वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने लगे. आज उन पर करोड़ों की संपत्ति का मालिक होने का आरोप है, जिसमें अयोध्या के कैंट और नाका इलाके में बने आलीशान दो मंजिला मकान और 24 कमरों का हॉस्टल शामिल है.

हॉस्टल के छात्रों और पड़ोसियों के बयान

नाका क्षेत्र स्थित टिन्नू यादव के नए मकान में बने कमरों का किराया लगभग 2700 रुपये प्रति कमरा है, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र रहते हैं. हॉस्टल के किरायेदार लवकुश गुप्ता सहित अन्य छात्रों ने बताया कि टिन्नू यादव सिर्फ महीने में एक बार किराया लेने आते हैं और उनका व्यवहार हमेशा अच्छा रहा है. उनके नए आवास की पड़ोस में रहने वाली निर्मल वर्मा ने उन्हें बेहद सरल, ईमानदार और मददगार व्यक्ति बताया. पड़ोसियों के अनुसार, टिन्नू मंदिर का प्रसाद भी मोहल्ले में बांटते थे, इसलिए उन्हें इन आरोपों पर यकीन नहीं हो रहा है.

एसआईटी जांच पर टिकी सबकी निगाहें

इस मामले में एक तरफ जहां टिन्नू यादव पर भ्रष्टाचार के जरिए अकूत संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके करीबी और किरायेदार उनके पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं. राम मंदिर के दानपात्र से जुड़ी इन कथित अनियमितताओं और चढ़ावे की रकम के मामले की वास्तविक सच्चाई अब पूरी तरह से एसआईटी और अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी हुई है. इस हाई-प्रोफाइल मामले की निष्पक्ष जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन वित्तीय आरोपों में कितनी सच्चाई है और टिन्नू यादव की संपत्ति का असली जरिया क्या है.

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