TMC में टूट के बाद बागियों में फूट, ममता बनर्जी के लिए कितनी उम्मीद बाकी?

ममता बनर्जी की राजनीति में कभी खुशी कभी गम जैसी स्थिति देखने को मिल रही है. लेकिन फर्क यह है कि थोड़ी खुशी ज्यादा गम जैसा मामला हो चुका है. विधायकों की बगावत के बाद अब सांसदों के भी वैसा ही रुख अपनाने की चर्चा जोरों पर है. ताजा चर्चा यह है कि तृणमूल कांग्रेस के 23 सांसद बागी गुट के संपर्क में हैं. तृणमूल कांग्रेस के पास 28 लोकसभा सांसद हैं. 

विधायकों ने अभी अलग गुट ही बनाया है, 20 सांसदों के तो बीजेपी में शामिल होने की भी चर्चा हो चुकी है. टीएमसी के बागी गुट का नेतृत्व कर रहे ऋतब्रत बनर्जी ने अपने बयान से और सस्पेंस बढ़ा दिया है. ऋतब्रत बनर्जी ने कहा तो बस इतना ही है, ‘थोड़ा धैर्य रखिए, बहुत कुछ हो सकता है,’ लेकिन उसे ‘थोड़ा बोला, ज्यादा समझा’ वाले अंदाज में लिया जा रहा है. 
यह खबर भी आ चुकी है कि बागी गुट में भी फूट पड़ गई है. पांचला के टीएमसी विधायक गुलशन मलिक ने बागी गुट के नेता के इरादे पर सवाल उठा दिया है. गुलशन मलिक भी उसी गुट में शामिल हैं जिसका नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं. गुलशन मलिक का कहना है कि ममता बनर्जी सिर्फ मार्गदर्शक मानने वाले गुट में तो वो नहीं रहने वाले हैं. गुलशन मलिक का दावा है कि बागी गुट में उनकी जैसी सोच वाले और भी विधायक हैं. 

विधायकों के बाद सांसद भी कतार में

विधायकों के बाद सांसदों की बगावत की चर्चा के बीच ममता बनर्जी ने कोलकाता में कालीघाट स्थित अपने आवास पर विशेष बैठक बुलाई है. ममता बनर्जी की बैठक में तृणमूल कांग्रेस के तकरीबन सभी बड़े नेताओं को बुलाया गया है. स्पीकर के बागी विधायकों के नेता ऋतब्रत बनर्जी को 58 विधायकों के समर्थन वाले विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद ममता बनर्जी की तरफ से बुलाई गई यह पहली बैठक है.  
असल में, ऋतब्रत बनर्जी से तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के कयासों पर सवाल पूछा गया था. जवाब में ऋतब्रत बनर्जी ने कहा था कि पिछले सात दिन से उनकी किसी भी सांसद से कोई बात नहीं हुई है. ऋतब्रत बनर्जी ने आगे कहा, इसलिए यह नहीं कह सकता कि सांसद क्या कदम उठाएंगे.
लेकिन, उसके ठीक बाद ऋतब्रत बनर्जी ने अपनी बातों से सस्पेंस बढ़ा दिया. बोले, वर्तमान में जीता हूं. कल क्या होगा, यह कोई नहीं कह सकता. 
इस बीच सूत्रों के हवाले से आई खबर के अनुसार, टीएमसी के 23 सांसद भी बागी गुट के साथ जा सकते हैं. ये सांसद भी विधायकों की तरह अलग गुट बना सकते हैं. बताते हैं कि सांसद भी विधायकों की तरह तृणमूल कांग्रेस महासचिव अभिषेक बनर्जी से ही ज्यादा नाराज हैं.

लोकसभा में टीएमसी के 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं. अगर राज्यसभा के सांसदों ने भी विधायकों और लोकसभा सांसदों की राह पकड़ी तो अलग गुट के रूप में मान्यता पाने के लिए 9 सांसदों की जरूरत होगी. 

टीएमसी के बागियों में फूट क्यों

बागियों के नए नवेले नेता बने ऋतब्रत बनर्जी के सामने भी अपने गुट के विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो गई है. मालूम हुआ है कि विधायकों को अभिषेक बनर्जी के विरोध और तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक ममता बनर्जी के प्रति वफादारी के बीच फर्क दिखाकर बगावत के लिए राजी किया गया था, लेकिन अब कुछ विधायकों को इरादे पर संदेह होने लगा है. 
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट की बैठक में कई विधायकों ने जोर देकर कहा कि ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस का सर्वोच्च नेता बने रहना चाहिए. ऐसा तब हुआ जब ऋतब्रत बनर्जी ने प्रस्ताव रखा कि नए सिरे से बनाए गए विधायक दल में ममता बनर्जी को मुख्य सलाहकार की भूमिका दी जाए. ऋतब्रत बनर्जी के प्रस्ताव को यह भरोसा दिलाने की कोशिश माना गया कि बगावत ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं है. लेकिन, बागी गुट के कुछ विधायकों को यह प्रस्ताव नागवार गुजरा. प्रस्ताव सुनकर कुछ विधायक असहज दिखे. 

बागी विधायकों की बैठक के बाद पांचला विधायक गुलशन मलिक का कहना था, हमें बताया गया था कि पार्टी ममता बनर्जी के नेतृत्व में ही चलती रहेगी… वो सिर्फ सलाहकार नहीं हैं… हम चाहते हैं कि पार्टी उनके नेतृत्व में ही काम करे.
और लगे हाथ गुलशन मलिक ने चेतावनी भी दे डाली, अगर ममता बनर्जी को सर्वोच्च नेता के रूप में स्वीकार नहीं किया गया, तो हमें यह सोचना पड़ेगा कि हमें इस गुट में रहना चाहिए या नहीं.
सिताई की विधायक संगीता रॉय बसुनिया से भी गुलशन मलिक जैसी ही बातें सुनने को मिलीं. संगीता रॉय बसुनिया ने भी मांग को एनडोर्स किया कि ममता बनर्जी का निर्विवाद नेतृत्व कायम रहना चाहिए. बोलीं, ममता बनर्जी हमारी सर्वोच्च नेता हैं, और आगे भी रहेंगी… वो सलाहकार नहीं हो सकतीं… वह हमारी नेता हैं.
टीएमसी विधायक गुलशन मलिक का दावा है कि हावड़ा जिले में पांच से छह विधायक ऐसे हैं, जिनसे उनकी इस मुद्दे पर बात हुई है. गुलशन मलिक के मुताबिक, इन विधायकों के साथ मीटिंग में भी इस बात पर चर्चा हुई है. कहते हैं, ममता बनर्जी हमारी नेता हैं… और यह जो मार्गदर्शक की बात हो रही है, उसे हम नहीं मानेंगे. 
गुलशन मलिक जोर देकर अपनी बात दोहराते हैं, ममता बनर्जी ही हमारी नेता हैं और ऐसी ही बात हुई भी थी. अब बागी गुट के विधायकों ने भी साथ बने रहने के लिए नेतृत्व परिवर्तन की डिमांड शुरू कर दी है – और यह ममता बनर्जी के लिए उम्मीद की एक किरण तो है ही. 

1. गुलशन मलिक और संगीता रॉय बसुनिया के बयान से कई बातें साफ हो गई हैं. टीएमसी में यह बगावत ममता बनर्जी के नाम पर शुरू की गई थी, लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि ममता बनर्जी ने नहीं, बल्कि उनको दिक्कत उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव से है.
2. बागियों के नेता ने, लीडरशिप के खिलाफ व्यवस्था को तोड़ने की कोशिश जैसे आरोपों से बचने के लिए, ही ममता बनर्जी के प्रति वफादारी और अभिषेक बनर्जी के विरोध की मुहिम चलाई थी, लेकिन असली इरादा साफ हो जाने के बाद विरोध की नई आवाजें भी उठने लगी हैं. 
3. तृणमूल कांग्रेस में बगावत की मुहिम अभिषेक बनर्जी के इर्द गिर्द पावर सेंटर बन जाने से बिगड़े हालात को दुरुस्त करने की कोशिश के रूप में पेश किया गया है, न कि उस नेता के खिलाफ विद्रोह के रूप में जिसने 1998 में कांग्रेस से निकल कर पार्टी बनाई, और 2011 में उसे सत्ता तक पहुंचाया.
4. चाहे वो ऋतब्रत बनर्जी हों या फिर संदीपन साहा, बगावत के दौरान वे खुद को ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती देने वाले लोगों के रूप में नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के मूल आदर्शों के प्रोटेक्टर के तौर पर पेश करते रहे हैं.

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *