यूरेनियम नहीं सौंपेगा ईरान, कैसा है अमेरिका का शांति समझौता?

अमेरिका और ईरान के बीच जंग रोकने को लेकर चल रही बातचीत में अब नया मोड़ आ गया है. एक तरफ अमेरिकी मीडिया में दावा किया गया कि तेहरान अपना हाईली एनरिच्ड यूरेनियम स्टॉक अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार हो गया है, तो दूसरी तरफ ईरान ने इस खबर को लगभग खारिज कर दिया है. रिपोर्ट की मानें तो ईरान संवर्धित यूरेनियम पर कोई समझौता नहीं किया है.
रॉयटर्स को एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने बताया कि, “तेहरान ने अपना संवर्धित यूरेनियम स्टॉक छोड़ने पर सहमति नहीं दी है” और फिलहाल शुरुआती समझौते में न्यूक्लियर मुद्दा शामिल ही नहीं है. इससे पहले न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि संभावित डील के तहत ईरान अपने न्यूक्लियर स्टॉकपाइल पर समझौता करने को तैयार हो गया है. हालांकि अब ईरान के रुख ने साफ कर दिया है कि असली लड़ाई अभी बाकी है.
इसी बीच एक्सियोस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान एक ऐसे समझौते के करीब हैं जिसमें 60 दिन का सीजफायर एक्सटेंशन शामिल होगा. इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोला जाएगा और वहां किसी तरह का टोल नहीं लगाया जाएगा. दुनिया के सबसे अहम ऑयल रूट में गिने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से वैश्विक तेल बाजार को बड़ी राहत मिल सकती है.

ईरान को मिल सकती है तेल बेचने की छूट

रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान को खुलकर तेल बेचने की छूट मिल सकती है. बदले में अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाएगा और कुछ प्रतिबंधों में ढील देगा ताकि तेहरान दोबारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल एक्सपोर्ट कर सके.
हालांकि, अमेरिका ने साफ कर दिया है कि स्थायी राहत तभी मिलेगी जब ईरान ठोस रियायतें देगा. एक्सियोस के मुताबिक ईरान चाहता था कि उसके फ्रीज फंड तुरंत रिलीज किए जाएं और स्थायी रूप से प्रतिबंध हटाए जाएं, लेकिन वॉशिंगटन इसके लिए तैयार नहीं हुआ.

न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएगा ईरान!

ड्राफ्ट समझौते में यह भी शामिल है कि ईरान कभी न्यूक्लियर हथियार बनाने की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा. साथ ही मध्यस्थों के जरिए ईरान ने अमेरिका को यह संकेत भी दिए हैं कि वह यूरेनियम एनरिचमेंट सीमित करने पर कुछ रियायतें दे सकता है.

क्या अमेरिका मिडिल ईस्ट से अपनी सेना वापस बुलाएगा?

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 60 दिनों तक अमेरिका की अतिरिक्त सैन्य तैनाती मध्य पूर्व में बनी रहेगी. अगर अंतिम समझौता हो जाता है तभी अमेरिकी फौजों की वापसी पर विचार किया जाएगा. इससे माना जा रहा है कि अमेरिका ने मिडिल ईस्ट से निकलने पर सहमति दे दी है लेकिन आखिरी फैसला आना अभी बाकी है.

बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कई अरब और मुस्लिम देशों के नेताओं से कॉन्फ्रेंस कॉल पर इस प्रस्तावित डील को लेकर चर्चा की और ज्यादातर देशों ने इसका समर्थन किया. लेकिन ईरान के ताजा बयान ने साफ कर दिया है कि न्यूक्लियर मुद्दे पर दोनों देशों के बीच भरोसे की खाई अब भी बहुत गहरी है.

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