सीजफायर के बाद आर-पार या डिप्लोमेसी से होगा चमत्कार! ईरान-अमेरिका बातचीत में अगले 24 घंटे निर्णायक

अमेरिका और ईरान सीजफायर की अवधि 22 अप्रैल को समाप्त हो रही है. बातचीत के लिए अमेरिकी डेलिगेशन के पाकिस्तान जाने को लेकर असमंजस बना हुआ है. सोमवार को खबर आई थी कि जेडी वेंस की अगुवाई में अमेरिकी डेलिगेशन कुछ घंटों में इस्लामाबाद पहुंच सकता है. लेकिन बाद में ये खबरें गलत साबित हुई. सीजफायर की समयसीमा कल खत्म हो रही है तो ऐसे में अगले 24 घंटे अमेरिका-ईरान के लिए निर्णायक साबित होंगे.

अगर सीजफायर खत्म होने से पहले दोनों पक्षों में सहमति नहीं बनी तो जंग दोबारा शुरू हो सकती है. अब तक साफ नहीं है कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होगी या नहीं. दूसरी तरफ, तबाही की घड़ी टिक-टिक कर आगे बढ़ रही है.
अमेरिकी वेबसाइट Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मंगलवार को पाकिस्तान के लिए उड़ान भरेंगे. जहां तक सीजफायर की समयसीमा खत्म होने की बात है तो ब्लूमबर्ग से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ये अमेरिकी समय बुधवार रात आठ बजे तक लागू रहेगा. इस हिसाब से अमेरिका और ईरान को गुरुवार सुबह तक किसी फैसले पर पहुंचना होगा.

दूसरी तरफ, ईरान ने साफ कर दिया है कि अब तक उसकी कोई टीम बातचीत के लिए पाकिस्तान नहीं गई है. ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, ना आधिकारिक और ना ही अनौपचारिक डेलिगेशन इस्लामाबाद पहुंचा है. जो खबरें चल रही थीं कि टीम रवाना हो गई है या पहुंच गई है, वो गलत हैं.

ईरान ने कहा कि हम धमकी के माहौल में बातचीत नहीं करेंगे. बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब अमेरिका अपना रवैया बदले. अभी बातचीत पर ब्रेक लगा हुआ है. पहले माहौल बदलेगा, तब ही आगे की बात होगी.

ईरान बातचीत पर आगे क्यों नहीं बढ़ रहा?

ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वो सीजफायर को आगे नहीं बढ़ाएंगे. वहीं, ईरान भी फिर से युद्ध की तैयारी किए बैठा है. लेकिन सवाल ये है कि पहले दौर की बातचीत के बाद आखिर ईरान दूसरे दौर की बातचीत को लेकर हामी क्यों नहीं भर रहा?
न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा है कि ट्रंप के तौर-तरीकों से ही बात बिगड़ गई है.ट्रंप का स्टाइल धमकी भरा, जबरदस्ती और सोशल मीडिया पर खुलेआम बयानबाजी करने वाली है. इससे ईरान को सुलह के बजाए हर बार मुंहतोड़ जवाब देने का रुख अपनाना पड़ता है. ट्रंप बड़े-बड़े दावे कर देते हैं कि ईरान ने सारी बातें मान ली हैं, वो संवर्धित यूरेनियम सौंप देगा, संवर्धन बंद कर देगा. इसके कुछ ही देर बाद ईरान उनके दावों को झूठा बता देता है.
ट्रंप को डील की जल्दी है और इसके लिए वो पावर प्लांट, पुल उड़ाने की धमकी से दबाव बनाते हैं. इसके उलट, ईरान धैर्य के साथ धीमी चाल चल रहा है और वो लंबा खेल खेलना चाहता है. ट्रंप सुर्खियां बटोरने में जुटे रहते हैं जबकि ईरान कठोर और सहनशील रवैया अपना रहा है. ट्रंप कह रहे हैं कि वो ईरान के साथ ओबामा से अच्छी परमाणु डील करेंगे. इस बयान के बाद ईरान ने कहा है कि अमेरिका भरोसे के लायक नहीं क्योंकि एक राष्ट्रपति समझौता करता है, दूसरा उसे तोड़ देता है.

ऐसे में अगर ट्रंप बातचीत के बीच हमले की धमकी दे सकते हैं तो ईरान भी उन्हें सब सिखाने की चेतावनी दे रहा है. ईरान की संसद के स्पीकर और उसके मुख्य वार्ताकारह मोहम्मद बाघेर गलिबाफ ने अमेरिका को चेताया है. गलिबाफ ने कहा कि अगर फिर से युद्ध छिड़ता है तो ईरान के पास नए कार्ड हैं. गलिबाफ ने कहा कि उनका देश रणभूमि में नए कार्ड से पर्दा उठाएगा. दरअसल, ये ईरान की छिपी धमकी है जिसका मतलब है कि 14 दिनों के युद्धविराम में ईरान ने उन मिसाइलों को निकाल लिया है जिन्हें तहखाने में छिपा दिया गया थ.  वो ड्रोन के झुंड तैयार कर चुका है जिनका हमला अमेरिकी नौसेना पर हो सकता है. इसका मकसद होर्मुज की अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने के लिए होगा. इसके अलावा, वो हूती को भी सक्रिय करेगा और बाब अल मंदेब का दूसरा समुद्री रास्ता भी बंद कर सकता है.
गलिबाफ ने साफ कहा है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है लेकिन अमेरिका की ओर से दी गई धमकियों से डर कर और उसकी थोपी गई शर्तों पर बातचीत नहीं करेगा. ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या सीजफायर के बाद आर-पार की स्थिति बनेगी या फिर डिप्लोमेसी से ही काम बन जाएगा.

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