अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध से टेंशन हाई पर है और तेल संकट गहराता जा रहा है. इसे लेकर तमाम एक्सपर्ट बड़े-बड़े खतरे सामने होने की आशंका जता रहे हैं. अब ब्लैकरॉक के सीईओ ने दुनिया को डराने वाली चेतावनी दी है और कहा है कि तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची, तो वैश्विक इकोनॉमी पर गंभीर असर पड़ेगा और ग्लोबल मंदी का सामना कर पड़ेगा.
BlackRock सीईओ लैरी फिंक ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में ये बड़ी वार्निंग दी है. उन्होंने कहा कि Crude Oil Price तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने पर वैश्विक अर्थव्यवस्था गंभीर परिणाम भुगतेगी. उन्होंने कहा कि अगर ये युद्ध (US-Iran War) रुकता नहीं है, तो फिर कई सालों तक तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर या 150 डॉलर के करीब रह सकती हैं और ये बेहद खराब स्थिति होगी.
‘युद्ध न रुका तो परिणाम…
‘ मिडिल ईस्ट युद्ध से पैदा होने वाले बड़े खतरों के बारे में बात करते हुए लैरी ने कहा कि अगर सीजफायर (US-Iran Ceasefire) हो जाता है, और फिर भी ईरान व्यापार के लिए खतरा बना रहता है, होर्मुज स्ट्रेट पर संकट जारी रहता है, तो मेरा मानना है कि हमें कई वर्षों तक लगभग 150 डॉलर प्रति बैरल तेल की कीमत देखनी पड़ सकती है, जिसका अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है, तो फिर हमें वैश्विक मंदी का सामना करना पड़ेगा.
युद्ध का क्या होगा कहना मुश्किल
ब्लैक रॉक चीफ ने कहा है कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध (US-Israel vs Iran War) किस तरह आगे बढ़ेगा, यह तय करना अभी बहुत जल्दबाजी होगी. फिंक के मुताबिक, ऊर्जा की बढ़ती लागत का सबसे ज्यादा असर कम आय वाले परिवारों पर देखने को मिलेगा. ये एक तरह का टैक्स होगा, जो अमीरों के बजाय गरीबों को ज्यादा प्रभावित करने वाला होगा.
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि देशों को एनर्जी पॉलिसी के लिए संतुलित विजन अपनाना चाहिए, जिसमें मौजूदा संसाधनों के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों में निवेश भी शामिल हो. अगर तेल की कीमतें कई वर्षों तक हाई लेवल पर बनी रहती हैं, तो कई देश सौर ऊर्जा और अन्य एनर्जी विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ेंगे. मतलब साफ है कि फिंक ने ऊर्जा के एक ही स्रोत पर निर्भरता के प्रति अलर्ट किया है.
Hormuz ने बढ़ाई ग्लोबल टेंशन ईरान
युद्ध शुरू होने के बाद से ही तेल की कीमतों में जोरदार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और तेल बाजार अस्थिर बना हुआ है. होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद तो स्थिति और भी बिगड़ गई है, कई देशों में तेल संकट से हाय-तौबा मची हुई है. जो दुनिया की कुल तेल खपत के 20 फीसदी तेल की आवाजाही के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रूट है.
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