नेपाल में एक नया और बेहद दिलचस्प अध्याय शुरू हो गया है. नेपाल की सियासत में युवाओं की एंट्री हो गई है. शुक्रवार को 35 साल के बालेन शाह को नेपाल का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया और फिर उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. वे नेपाल के इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बन गए हैं. इसके साथ ही वे मधेस क्षेत्र से देश का नेतृत्व करने वाले पहले प्रधानमंत्री भी हैं.

राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संविधान के नियमों के तहत बालेन को प्रधानमंत्री नियुक्त किया. शपथ समारोह राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में हुआ, जो काफी खास रहा. इसमें हिंदू और बौद्ध दोनों परंपराओं को मिलाया गया. सात ब्राह्मणों ने शंख बजाए, 108 युवा ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्र पढ़े और 107 लामाओं ने बौद्ध धर्मग्रंथों का पाठ किया.
बालेन की कहानी बेहद अनोखी है. कुछ साल पहले तक वे एक रैपर के तौर पर जाने जाते थे. फिर वे काठमांडू के मेयर बने और अपने काम से इतनी लोकप्रियता हासिल की कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी यानी RSP ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया.
चीन ने क्या कहा?
चीन की विदेश मंत्रालय ने नेपाल के नए प्रधानमंत्री को बधाई दी है. चीन ने कहा कि हम नेपाल की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में पूरा समर्थन करेंगे. नेपाल की नई सरकार के साथ व्यावहारिक सहयोग और गहरा करेंगे.
नेपाल चुनाव के परिणाम
हाल ही में हुए आम चुनाव में RSP ने जबरदस्त जीत दर्ज की. 275 सीटों वाली संसद में पार्टी ने 182 सीटें जीतीं, यानी पूरे बहुमत के साथ. यह चुनाव नेपाल में उस बड़े युवा आंदोलन के बाद हुआ था जिसमें लोगों ने पुरानी और भ्रष्ट राजनीति को बदलने की मांग की थी.
बालेन ने खुद चुनाव में चार बार के प्रधानमंत्री रह चुके केपी शर्मा ओली को उनके ही गढ़ झापा-5 से बड़े अंतर से हरा दिया. यह जीत इस बात का सबूत थी कि नेपाल की जनता पुराने नेताओं से ऊब चुकी है.
अब बालेन 15 से 18 मंत्रियों का एक छोटा मंत्रिमंडल बनाने की तैयारी में हैं. नेपाल की नई पीढ़ी को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं.
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