ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की जंग के बीच तेल और गैस की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं. कीमतों को स्थिर रखने के लिए अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों पर अस्थायी छूट दी है जिसके बाद खरीद के लिए ईरानी तेल भी उपलब्ध हो गया है. ईरान ने भारत की रिफाइनरियों को भी तेल खरीदने का ऑफर दिया है. लेकिन मुश्किल यह है कि ईरान के ट्रेडर्स भारत को अपना तेल अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड से भी महंगा ऑफर कर रहे हैं.
इंडस्ट्री से जुड़े तीन सूत्रों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि ईरान भारत को तेल बेचने को तैयार है लेकिन इसकी कीमत काफी ज्यादा रखी गई है. दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता भारत ने मई 2019 के बाद से ईरान से कोई तेल का कार्गो नहीं लिया है. ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों को देखते हुए भारत को ईरान से तेल खरीद रोकनी पड़ी थी.
लेकिन ईरान में लगभग चार हफ्तों से चल रहे युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है. इससे भारत समेत कई देशों पर बड़ा असर पड़ा है.
डॉलर में पेमेंट मांग रही ईरानी कंपनियां
रॉयटर्स के सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों के पास एक महीने का समय है कि वो ईरान से, जो भौगोलिक रूप से भारत के करीब है, तेल और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) ज्यादा से ज्यादा खरीद लें. इससे पहले अमेरिका ने तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए उस पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी थी जिसके बाद भारत की रिफाइनरियां रूस से भी लाखों बैरल तेल खरीद चुकी हैं.
तेल की कमी के अलावा, भारत को खाना पकाने वाली गैस LPG की भी भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स को इंडस्ट्री के सूत्रों ने बताया, ‘ईरान के ट्रेडर्स और वहां की सरकारी तेल कंपनियां तेल का पेमेंट डॉलर में चाहती हैं, हालांकि, कुछ कंपनियां भारतीय रुपये में भी पेमेंट लेने को तैयार हैं.’
मौजूदा ऊर्जा संकट को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने 1970 के दशक के दोनों तेल संकटों से भी ज्यादा गंभीर बताया है.
पेमेंट के लिए ये है शर्त
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को ईरानी तेल की खरीद के लिए 30 दिनों की छूट दी, जिसके तहत पहले से समुद्र में मौजूद ईरान के तेल की खरीद की अनुमति दी गई. ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, यह छूट 20 मार्च तक जहाजों में लोड किए गए तेल पर लागू होगी और 19 अप्रैल तक उसे उतारना होगा.
सूत्रों ने कहा कि ईरान का तेल ब्रेंट से 6-8 डॉलर प्रति बैरल प्रीमियम पर ऑफर किया गया है और पेमेंट कार्गो पहुंचने के सात दिन के भीतर करना होगा.
हालांकि, भारतीय रिफाइनरियां किसी भी डील से पहले पेमेंट सिस्टम को लेकर आश्वस्त होना चाहती हैं, क्योंकि ईरान अंतरराष्ट्रीय पेमेंट सिस्टम SWIFT से बाहर है. SWIFT (Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication) एक ग्लोबल मैसेजिंग नेटवर्क है, जिसका इस्तेमाल बैंक और फाइनेंशियल संस्थान एक-दूसरे को सुरक्षित तरीके से पैसे से जुड़ी जानकारी भेजने के लिए करते हैं
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