CIA की ना सुनी, नेतन्याहू के ‘तिकड़म’ में फंस गए ट्रंप… अधिकारियों ने अंदर की बातें बता दीं

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मारते समय अमेरिका और इजरायल ने खूब सपने संजोए थे. तेहरान से इस्लामिक रिवोल्यूशन के शासन का खात्मा होगा. आम जनता के विरोधी स्वर सुनकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अधिकारी दुम दबाकर भाग जाएंगे. ईरान की गद्दी पर वेस्ट का पसंदीदा लीडर काबिज होगा. या यूं कह लें कि वाशिंगटन से ही तेहरान में सरकार चलेगी. मगर सारे सपने चकनाचूर हो गए. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कॉल पर जो नतीजे बुने थे, वो सब उधड़ गए.

आरोप लगे कि बेंजामिन नेतन्याहू ने ही डॉनल्ड ट्रंप पर दबाव डालकर अली खामेनेई को मारने के लिए मजबूर किया और अमेरिका को जंग में घसीटा. हालांकि, दोनों नेताओं ने इन दावों को खारिज किया है. 28 फरवरी को ईरान पर हमले से 48 घंटे पहले ट्रंप और नेतन्याहू की फोन पर बात हुई थी.

रॉयटर्स की रिपोर्ट में ट्रंप और नेतन्याहू के बीच बातचीत से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इसी फोन कॉल में नेतन्याहू ईरान पर हमला करने और अली खामेनेई को मारने के लिए ट्रंप को मनाने में कामयाब रहे. सूत्रों ने दावा किया कि ट्रंप ईरान पर सैन्य हमले के लिए तो राजी हो गए, लेकिन उन्होंने हमले की टाइमिंग को लेकर स्थिति साफ नहीं की थी.
बेंजामिन नेतन्याहू ने नई खुफिया जानकारी का हवाला देते हुए ‘सिर काटने वाले हमले’ यानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके करीबी लोगों को निशाना बनाकर हमले करने के बारे में ट्रंप को बताया था. इजरायली नेता ने उस टाइमिंग पर जोर दिया जब खामेनेई को आसानी से निशाना बनाया जा सकता था.

बेंजामिन नेतन्याहू ने नई खुफिया जानकारी का हवाला देते हुए ट्रंप को सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके करीबी लोगों के खात्मे के लिए हमले की प्लानिंग बताई थी. इजरायली नेता ने उस टाइमिंग पर भी जोर दिया, जब खामेनेई को आसानी से निशाना बनाया जा सकता था.

नेतन्याहू ने ट्रंप को हमले के लिए कैसे मनाया?

नई खुफिया जानकारी से पता चला कि अली खामेनेई, उनके साथी सीनियर नेता और अफसर एक मीटिंग करने वाले हैं. नेतन्याहू ने तर्क दिया कि “खामेनेई को मारने का इससे बेहतर मौका शायद ही कभी मिले.” इजरायली पीएम ने इस ऑपरेशन को स्ट्रेटेजिक और सिंबॉलिक दोनों तरह से दिखाया. नेतन्याहू ने ट्रंप को यह भी याद दिलाया कि ईरान ने कथित तौर पर किस तरह ट्रंप की हत्या की साजिशें रची हैं.
सूत्रों ने बताया कि नेतन्याहू और ट्रंप की बातचीत में ट्रंप की हत्या की कथित साजिश का बदला लेना भी बड़ा मुद्दा रहा. हालांकि, यह पूरी तरह यह साफ नहीं है कि बातचीत का वो कौन सा टर्निंग पॉइंट रहा, जहां ट्रंप इस बात को मान गए कि अमेरिका ईरान पर हमला करेगा और अली खामेनेई को मारेगा. रिपोर्ट में दावा किया गया कि नेतन्याहू के आखिरी बोल ने कुछ ऐसा रंग जमाया कि ट्रंप इजरायल की बातों को मान गए.

CIA की बात नहीं मानी?

ट्रंप का फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिकी खुफिया एजेंसी ‘सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी’ (CIA) ने बताया था कि ईरान पर हमले के बाद भी तेहरान में रिजीम नहीं बदलेगी. CIA ने दावा किया था कि अगर अली खामेनेई मारे गए, तो उनसे भी कट्टर शख्स ईरान की सत्ता पर बैठ जाएगा. और हुआ भी ऐसा ही. इसका एक मतलब ये भी निकलता है कि डॉनल्ड ट्रंप ने CIA की बात को तरजीह नहीं दी और हमले का देश दे दिया. 
28 फरवरी को तेहरान में सुप्रीम लीडर के कंपाउंड में अली खामेनेई और उनके अफसरों की मीटिंग हुई. इसी दिन अमेरिका-इजरायल ने मिलकर कंपाउंड पर हमला कर दिया, जिसमें अली खामेनेई, उनके परिवार के सदस्य और 40 से ज्यादा अधिकारियों की मौत हो गई. अली खामेनेई के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुन लिया गया. मोजतबा को उनके पिता अली खामेनेई से भी ज्यादा अमेरिका विरोधी माना जाता है.

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