ईरान ने हाल ही में एक नया हथियार ‘359’ पेश किया है, जो लॉयटरिंग सरफेस-टू-एयर मिसाइल है. यह पुराने ‘358’ मिसाइल का अपग्रेडेड और बड़ा वर्जन है. यह मिसाइल बिना रडार के इस्तेमाल कर दुश्मन के ड्रोन को ढूंढकर मार गिराती है. पिछले 11 दिनों में ‘358’ ने कई अमेरिकी MQ-9 रीपर और इजरायली हर्मीस 900 ड्रोन को गिराया है. अब ‘359’ के आने से अमेरिका के मिडिल ईस्ट में सभी ड्रोन खतरे में पड़ गए हैं. पेंटागन के पास इसका कोई सीधा जवाब नहीं है.
358′ मिसाइल क्या है और क्या कर चुकी है?
‘358’ एक जेट-पावर्ड लॉयटरिंग इंटरसेप्टर है. इसे ट्रक से लॉन्च किया जाता है. यह हवा में घूमता रहता है. खुद लक्ष्य ढूंढता है. इसकी स्पीड लगभग 740 किमी/घंटा है. यह इन्फ्रारेड सेंसर और AI से हीट सिग्नेचर, रडार क्रॉस-सेक्शन और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल से लक्ष्य पहचानता है.
कोई रडार सिग्नल नहीं भेजता, इसलिए ड्रोन ऑपरेटर को कुछ पता नहीं चलता – अचानक वीडियो फीड बंद हो जाता है. इसकी ऊंचाई 8,500 मीटर तक है, जहां MQ-9 रीपर और हर्मीस 900 उड़ते हैं. इसने इजरायल के हर्मीस 900 को गिराया है. इसकी कीमत सिर्फ 20,000-50,000 डॉलर है, जबकि MQ-9 रीपर की कीमत 32 मिलियन डॉलर है.
359′ में क्या बदला है?
‘358’ की तुलना में ‘359’बड़ा और बेहतर है. इसका एयरफ्रेम बड़ा है, इसलिए ज्यादा समय हवा में रह सकती है. बड़े इलाके कवर कर सकती है. टर्मिनल स्पीड तेज है, जिससे बचना मुश्किल होता है. रेंज ‘358’ की 100 किमी से ज्यादा है. ऊंचाई और घातकता बढ़ गई है. यह भी रडार-साइलेंट है और ऑटोनॉमस हंटिंग करता है.
ईरान इसे मोबाइल ट्रक लॉन्चर से दर्जनों की संख्या में लॉन्च कर सकता है. हर मिसाइल अपना किल जोन बनाकर घूमती रहती है. इससे ईरान के पूरे एयरस्पेस में ऑटोनॉमस एंटी-ड्रोन नेटवर्क बन जाता है, जिसका कोई सेंट्रलाइज्ड रडार नहीं होता.
अमेरिका और इजरायल के लिए खतरा क्यों?
अमेरिका की एयर सुपीरियरिटी ड्रोन पर टिकी है – MQ-9 रीपर ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेंस) के लिए इस्तेमाल होते हैं. लेकिन ‘358/359’ जैसे हथियार ड्रोन को आसानी से मार गिराते हैं. ऑपरेटर को कोई वार्निंग नहीं मिलती. पिछले 11 दिनों में कई MQ-9 और हर्मीस 900 गिराए गए.
ईरान सस्ते हथियार से महंगे ड्रोन को नष्ट कर रहा है. इससे अमेरिका की हवाई निगरानी कमजोर हो रही है. पेंटागन के पास इसका कोई आसान काउंटर नहीं है क्योंकि ये मिसाइलें रडार नहीं यूज करतीं.
यह बदलाव कितना बड़ा है?
यह हवाई रक्षा में स्टिंगर मिसाइल के आने के बाद सबसे बड़ा बदलाव है. ईरान ने जानबूझकर ऐसा हथियार बनाया क्योंकि दुश्मन ड्रोन पर बहुत निर्भर है. पहले ‘358’ सफल रहा, अब ‘359’ और घातक है. इससे पश्चिमी देशों की ड्रोन सर्विलांस पूरी तरह बेअसर हो सकती है. ईरान की एयर डिफेंस अब मजबूत हो गई है.
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