पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और इजराइल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया भर के सैन्य रणनीतिकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल (रिटायर्ड) वी.आर. चौधरी ने कहा कि इस संघर्ष से भारत के लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि देश को तत्काल एक ‘अत्यधिक शक्तिशाली एयर डिफेंस’ सिस्टम विकसित करना होगा.
राजधानी के मानकेशा सेंटर में आयोजित एक नेशनल कॉन्क्लेव के दौरान पीटीआई से बातचीत करते हुए पूर्व वायुसेना प्रमुख ने आधुनिक युद्धों में ड्रोन की भूमिका पर चर्चा की. उन्होंने स्वीकार किया कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया के युद्ध में ड्रोन्स ने अहम भूमिका निभाई है और भविष्य में भी यह एक बड़ा फैक्टर होंगे.
हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि भारत को अभी अपनी पूरी रणनीति सिर्फ ड्रोन्स पर केंद्रित नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा, “ड्रोन मौजूदा प्रयासों के पूरक (supplement) हो सकते हैं, लेकिन युद्ध जीतने के लिए हम पूरी तरह उन पर निर्भर नहीं रह सकते.”
अभेद सुरक्षा चक्र की मांग: ‘वन नेशन, वन ग्रिड
‘चौधरी ने देश की सुरक्षा प्रणालियों के एकीकरण (Integration) पर जोर देते हुए कहा कि हमें एक ऐसा ‘मेश नेटवर्क’ (Mesh Network) बनाने की जरूरत है जो सभी सेंसरों, शूटर्स और सैन्य प्लेटफॉर्म्स को एक साझा नेशनल नेटवर्क पर जोड़ दे.
उन्होंने कहा कि यह समय की मांग है कि हम अलग-अलग सेनाओं की व्यक्तिगत क्षमता देखने के बजाय ‘नेशनल पावर’ के रूप में दुश्मन का मुकाबला करें. इसमें साइबर क्षमताओं को एयर डिफेंस के साथ जोड़ना सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा.
बढ़ता ऊर्जा संकट और वैश्विक असर
बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच हुए हमलों ने वैश्विक विमानन संचालन और तेल की कीमतों को बुरी तरह प्रभावित किया है. पूर्व वायुसेना प्रमुख ने इसी अस्थिरता का हवाला देते हुए कहा कि हमें अधिक हथियार प्रणालियों, रडार और साइबर सुरक्षा के साथ अपने हवाई कवच को मजबूत करना होगा ताकि किसी भी बहुआयामी हमले का प्रभावी जवाब दिया जा सके.
उन्होंने यह भी कहा कि इस नेटवर्क में साइबर क्षमताओं का एकीकरण बेहद जरूरी है ताकि युद्ध की स्थिति में अलग-अलग सैन्य सेवाओं की बजाय पूरे देश की संयुक्त ताकत का इस्तेमाल किया जा सके.
पूर्व वायुसेना प्रमुख ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों का उदाहरण देते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. Russia–Ukraine War और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दिखाया है कि कम लागत वाले ड्रोन भी युद्ध के मैदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
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