अमेरिका ने कहा कि वो भारत को रूस से तेल खरीदने की ‘अनुमति’ देता है. कांग्रेस समेत विपक्ष ने अमेरिका के बयान पर मोदी सरकार को घेर लिया. भारत सरकार ने सफाई जारी कर कहा कि भारत वहीं से तेल खरीदेगा, जहां उसे सस्ता दाम मिलेगा. हालांकि, भारत ने रूस से तेल खरीदना कतई बंद नहीं किया, बस मिकदार (मात्रा) घटा दी. अन्य देशों के मुकाबले रूसी तेल सस्ता भी पड़ रहा था. अब अमेरिका भले ही ग्रीन सिग्नल दे रहा हो, लेकिन एक समस्या आड़े आ रही है.
रूसी तेल में पहले वाली बात नहीं रही. भारत ने रूस से तेल इसलिए खरीदा, क्योंकि वो बाकी देशों के मुकाबले सस्ता पड़ रहा था. लेकिन अब भारत को ये तेल पहले की तुलना में महंगा पड़ सकता है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को रशियन यूराल (रूसी तेल का एक प्रकार), ब्रेंट के मुकाबले 4-5 डॉलर प्रति बैरल (1 बैरल में 158.987 लीटर) महंगा मिल रहा है.
ये तेल मार्च और अप्रैल की शुरुआत में भारतीय पोर्ट्स पर पहुंचेगा. यह पहले मंगाए गए कार्गो के लिए 13 डॉलर प्रति बैरल के डिस्काउंट के बिल्कुल उलट है. जंग शुरू होने से पहले 28 फरवरी को हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने 13 डॉलर के डिस्काउंट पर रूसी तेल के दो कार्गो खरीदे थे.
भारत खरीद रहा लाखों बैरल तेल
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के कारण तेल की सप्लाई में कमी आई है. इस बीच भारतीय रिफाइनरियां रूस से लाखों बैरल कच्चा तेल खरीद रही हैं. भारत केे सरकारी रिफाइनर जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) रूसी कार्गो की तेज डिलीवरी के लिए ट्रेडर्स से बात कर रहे हैं. भारत केे सरकारी रिफाइनरों ने अब तक ट्रेडर्स से लगभग 2 करोड़ बैरल रूसी तेल खरीदा है.
भारत को रूसी तेल बेचने वाले एक ट्रेडर ने कहा कि भारतीय रिफाइनर मार्केट में वापस आ गए हैं. लेकिन कीमतों से ज्यादा, मॉलिक्यूल्स उपलब्ध होना एक मुद्दा है. कच्चे तेल में मॉलिक्यूल्स की उपलब्धता का मतलब है किसी खास तेल केे सोर्स में मौजूद अलग-अलग हाइड्रोकार्बन और दूसरे केमिकल कंपाउंड्स (जैसे सल्फर, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और मेटल्स) की खास बनावट, कंसंट्रेशन और आसानी से मिलने की क्षमता. यह कॉन्सेप्ट तेल की क्वालिटी और इस्तेमाल को बताता है. क्योंकि अलग-अलग मॉलिक्यूल्स यह तय करते हैं कि क्रूड ऑयल को पेट्रोल या डीजल जैसे प्रोडक्ट्स में रिफाइन करना आसान है या मुश्किल.
इस बीच, रूसी दूतावास के एक अधिकारी ने कहा था कि एनर्जी सप्लाई में रुकावट आने पर रूस, भारत की एनर्जी की मांगों को पूरा करने के लिए तैयार है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिफाइनर ने मिडिल ईस्ट क्रूड के नुकसान की भरपाई के लिए देश के तट पर तैर रहे जहाजों पर रूसी तेल निकालना शुरू कर दिया है.
2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद भारत रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार था. लेकिन जनवरी 2025 में कथित अमेरिकी दबाव में उसने खरीदारी कम कर दी. इससे भारत-अमेरिका की अंतरिम डील के तहत भारत पर थोपा गया 50 फीसदी टैरिफ घटकर 18 फीसदी हो गया.
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